लद्दाख मुद्दे पर गृह मंत्रालय के साथ बैठक पर क्या बोले पूर्व MP छेवांग? सोनम वांगचुक के आंदोलन की चेतावनी पर उठाए सवाल
लद्दाख के वरिष्ठ नेता थुपसन छेवांग ने केंद्र सरकार के साथ हुई हालिया वार्ता को सकारात्मक बताया है। उन्होंने क्षेत्र ...और पढ़ें
-1789237285330_m.webp)
सोनम वांगचुक के आंदोलन की चेतावनी पर उठाए सवाल। फाइल फोटो
HighLights
केंद्र सरकार संग लद्दाख वार्ता को थुपसन छेवांग ने बताया सकारात्मक।
आंदोलन के बजाय बातचीत से हुई प्रगति बढ़ाने की अपील की।
यूटी स्तर पर प्रतिनिधि निकाय गठन पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद थुपसन छेवांग ने केंद्र सरकार के साथ हाल ही की वार्ता को सकारात्मक बताते हुए क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व से आंदोलन का रास्ता दोबारा अपनाने के बजाए बातचीत के जरिए हुई प्रगति को आगे बढ़ाने की अपील की है।
छेवांग ने शनिवार को लेह में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 9 सितंबर को लेह अपेक्स बॉडी (एलएबी), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) और केंद्रीय गृह मंत्रालय की उपसमिति के बीच हुई बैठक में लद्दाख से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि बैठक में केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक प्रतिनिधि निकाय के गठन, उसकी शक्तियों, संरचना और चुनावी व्यवस्था सहित कई पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने बैठक के बाद एलएबी और केडीए की ओर से व्यक्त निराशा पर असहमति जताते हुए कहा कि वार्ता में हुई कई सकारात्मक चर्चाओं और सहमति के बिंदुओं को जनता के सामने नहीं रखा गया।
अधिकार सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी प्रतिभागियों से सुझाव
उनके अनुसार, प्रस्तावित यूटी स्तर के निकाय को भूमि, संस्कृति, पर्यावरण और खनिज संसाधनों जैसे विषयों पर भूमिका देने के साथ-साथ वित्तीय अधिकार भी दिए जाने पर चर्चा हुई। छेवांग ने कहा कि लद्दाख के जनजातीय स्वरूप को देखते हुए प्रस्तावित व्यवस्था में अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने तथा नामांकन के प्रावधानों पर भी विचार किया गया।
निर्वाचन क्षेत्रों और सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व एवं अधिकार सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी प्रतिभागियों से सुझाव लिए गए।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित निकाय के लिए प्रत्यक्ष चुनाव समेत विभिन्न चुनावी विकल्पों पर चर्चा हुई है। उनके मुताबिक, बातचीत इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि यूटी स्तर के प्रतिनिधि निकाय को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर स्पष्ट समझ बनी है।
पूर्व सांसद ने कहा कि भर्ती और संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों की मांग भी शामिल है, जिस पर 22 मई की बैठक में चर्चा हुई थी।
छेवांग ने कहा कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची का विस्तार जैसे मुद्दे व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं, लेकिन वार्ता आगे बढ़ने के साथ व्यावहारिक संवैधानिक और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
सोनम वांगचुक की ओर से दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी
उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित संस्थागत व्यवस्था को आगे बढ़ाने में देरी एमएचए की ओर से नहीं, बल्कि एलएबी और केडीए के बीच संस्थाओं के गठन और उनके क्रियान्वयन के क्रम को लेकर मतभेदों के कारण हो रही है।
छेवांग ने जलवायु कार्यकर्ता और एलएबी सदस्य सोनम वांगचुक की ओर से दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब एमएचए के साथ बातचीत के माध्यम से प्रगति हुई है, तो फिर नए आंदोलन की जरूरत क्यों है।
उन्होंने लद्दाख में 24 सितंबर की घटना के गंभीर परिणामों का उल्लेख करते हुए किसी भी ऐसे कदम से बचने की चेतावनी दी, जिससे फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है।
