लद्दाख लाए जाएंगे बुद्ध के पवित्र अवशेष, आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने संस्कृति मंत्रालय से बुद्ध के पिपरवाह अवशेषों को लद्दाख लाने का अनुरोध किया है। ये अवशेष वर्तमान में दिल्ली के ...और पढ़ें

लद्दाख लाए जाएंगे बुद्ध के पवित्र अवशेष। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, जम्मू। दिल्ली के राय पिथाैरा में प्रदर्शित बुद्ध के पिपरवाह अवशेषों को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख लाया जाएगा। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने इस पवित्र अवशेषों को लद्दाख लाने का मुद्दा संस्कृति मंत्रालय से उठाया है।
उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता सोमवार को इन अवशेषों की प्रदर्शनी देखने दिल्ली के राय पिथाैरा पहुंचे। वर्ष 1898 में पिपरवाह की खुदाई के दौरान मिले अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जनवरी को किया था।
द लाइट एंड द लोटस: रिलिक्स आफ द अवेकन्ड वन शीर्षक से आयोजित इस प्रदर्शनी में छठी शताब्दी इसा पूर्व की मूर्तियां, पांडु़लिपियां, थांगका आदि शामिल हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख व भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
उन्होंने कहा कि लद्दाख सदियों से अपने मठों, परंपराओं व जीवनशैली के माध्यम से बुद्ध की शिक्षाओं का संरक्षण व पालन करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि इन पवित्र अवशेषों को लद्दाख लाया जाए। लद्दाख प्रशासन ने पवित्र बुद्ध अवशेषों को लाने का मुद्दा केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से मामला उठाया है।
उन्होंने कहा कि हमने पवित्र बुद्ध अवशेषों को लद्दाख लाया जाए। हमें आशा है कि हमारे प्रयास सफल होंगे। यदि ये अवशेष सीमित अवधी के लिए भी लद्दाख लाए जाते हैं, तो यह क्षेत्र के लोगों व हिमालयी क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आध्यात्मिक महत्व का क्षण होगा। इससे बौद्ध अध्ययन व आध्यात्म के केंद्र के रूप में लद्दाख की भूमिका और सशक्त होगी व आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रद्धालुओं को शांत हिमालयी वातावरण में भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उप-राज्यपाल ने पवित्र अवशेषों के दर्शन करने के बाद कहा कि भगवान बुद्ध के अवशेष केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, अपितु भारत के शाश्वत मूल्यों, शांति, करुणा व सौहार्द के जीवंत प्रतीक हैं। ये आज भी समूची मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
कविंद्र गुप्ता ने कहा कि ऐतिहासिक किले राय पिठौरा में इस प्रदर्शनी का आयोजन भारत की समृद्ध विरासत में एक गहन आध्यात्मिक अध्याय है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत की सभ्यता की निरंतरता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से इतिहास व आध्यात्म एक साथ मिलकर वर्तमान व भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।
उप-राज्यपाल ने पवित्र बुद्ध अवशेषों की भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत की पुनर्स्थापना है। यह भगवान बुद्ध की धरोहर के संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
भगवान बुद्ध की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हाल के महीनों में जब जब ये पवित्र अवशेष विश्व के विभिन्न देशों में ले जाए गए। वहां लाखों लोगों में गहरी श्रद्धा व भक्ति देखने को मिली। यह दर्शाता है कि भगवान बुद्ध सम्पूर्ण मानवता के हैं व शांति व सहअस्तित्व के मूल्यों के माध्यम से लोगों को जोड़ते हैं।
उपराज्यपाल ने विशेष रूप से युवाओं से यह प्रदर्शनी देखने व भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत के गौरवशाली अतीत व शांति, सद्भाव व पारस्परिक सम्मान पर आधारित भविष्य के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती है।

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