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    प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक सोनम ने किया सावधान, बोले-खतरा अभी भी बरकरार, कभी भी पैटर्न बदल सकता है मानसून

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 05:44 PM (IST)

    मौसम विज्ञानी सोनम लोटस ने मानसून अवधि को खतरनाक बताते हुए बादल फटने और बाढ़ की चेतावनी दी है। उन्होंने 31 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी वर्षा की संभावना जताई है। प्रशासन और जनता को सतर्क रहने बाढ़ संभावित क्षेत्रों से दूर रहने और नदी किनारे निर्माण रोकने की सलाह दी गई है।

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    इंटरनेट मीडिया पर गलत जानकारी से बचने और आधिकारिक मौसम बुलेटिन का पालन करने का आग्रह किया गया है।

    जागरण संवाददाता, श्रीनगर। प्रसिद्ध मौसम विज्ञानिक सोनम लोटस ने शनिवार को कहा कि वर्तमान मानसून अवधि - जुलाई, अगस्त और मध्य सितंबर - वर्ष का सबसे खतरनाक चरण है। इस दौरान अकसर बादल फटने और अचानक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।

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    लोटस ने कहा कि अभी खतरा टला नहीं है। 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच दक्षिण कश्मीर, चिनाब घाटी और जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होने की संभावना है। खासकर सुबह के समय। इस मौसम में जब भी बारिश होती है तो यह ज्यादातर बादल फटने का कारण बनती है। यदि 48 घंटे तक लगातार बारिश हो तो भूस्खलन, अचानक बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है।

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    प्रशासन व जनता हमेशा रहें सतर्क

    लोटस ने कहा कि इस अवधि में प्रशासन और जनता दोनों को बेहद सतर्क रहना चाहिए। पहाड़ी इलाकों में ऐसा चरम मौसम आम है लेकिन मौसम वैज्ञानियों के लिए बादल फटने की सटीक जगह का पता लगाना लगभग असंभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ज्यादा खतरा है। खासकर उन लोगों को जिन्होंने नदी के किनारे या बाढ़ के रास्तों पर घर बनाए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने बाढ़ के रास्तों के किनारे घर बनाए हैं। जब जल स्तर बढ़ता है तो ऐसे घर बह जाते हैं।

    इंटरनेट मीडिया पर न दें गलत जानकारी

    अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बाढ़ के रास्ते में कोई निर्माण न हो। लोगों को यह भी समझना होगा कि प्रकृति के क्रम को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर मौसम संबंधी फर्जी अपडेट प्रसारित करने की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह जानकारियों अक्सर लोगों को गुमराह करती हैं। इनसे दहशत फैलाती है। लोटस ने उदाहरण दिया कि हाल ही में उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर 5 सितंबर को बर्फबारी होने का दावा करने वाली झूठी खबरें देखीं। यह पूरी तरह से गलत है। ऐसा करने से हमें परहेज करना चाहिए।

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    समय पर मिली जानकारी से रोकी जा सकती है बर्बादी

    मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि अगर प्रतिकूल मौसम से कम से कम 24 घंटे पहले समय पर और प्रामाणिक सलाह जारी की जाए तो कई आपदाओं को रोका जा सकता है। लोगों को आधिकारिक स्रोतों से आने वाले मौसम बुलेटिनों का सख्ती से पालन करना चाहिए। लोट्स ने भविष्यवाणी की कि 4 सितंबर के बाद मौसम शुष्क और स्थिर होने की उम्मीद है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने इस बात के लिए आगाह भी किया कि मानसून का रुख जल्दी बदल सकता है।

    मौसम बुलेटिन का सख्ती से पालन करें लोग

    लोगों को आधिकारिक स्रोतों से मौसम बुलेटिन का सख्ती से पालन करना चाहिए। उन्होने चेतावनी दी कि मानसून का पैटर्न जल्दी बदल सकता है। मौसम के यह पैटर्न नए नहीं हैं। ये सालों से होते आ रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से उन लोगों के लिए दुखी हूं, जिन्होंने हाल ही में जम्मू संभाग में बादल फटने और बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाई।

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