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    पहलगाम हमले के वक्त 'अल्लाह हू अकबर' का नारा लगाने वाले का आतंकियों से है कोई संबंध? पता लगाने में जुटी NIA

    Updated: Tue, 29 Apr 2025 10:14 PM (IST)

    पहलगाम आतंकी हमले में एक जिपलाइन ऑपरेटर मुजम्मिल अहमद की भूमिका को लेकर एनआईए उससे पूछताछ कर रही है। मुजम्मिल पहलगाम हमले के दौरान अल्लाह हू अकबर का नारा लगाता दिख रहा था। इस नृशंस हमले में उसकी संभावित संलिप्तता और आतंकियों से उसके संबंध की जांच हो रहा है। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी।

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    जिपलाइन ऑपरेटर मुजम्मिल अहमद की भुमिका पर उठे सवाल (फाइल फोटो)

    एएनआई, श्रीनगर। कश्मीर के अनंतनाग जिलान्तर्गत पहलगाम शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर बैसरन में जब आतंकी गोलियां बरसा रहे थे तो एक जिपलाइन ऑपरेटर मुजम्मिल अहमद पर्यटकों को बचाने के बजाए 'अल्लाह हू अकबर' का नारा लगाते हुए उन्हें तार पर लटकी लिफ्ट पर आगे धकेल रहा था।

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    इस नृशंस हमले में उसकी संभावित संलिप्तता और आतंकियों से उसके संबंध की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कर रही है। एजेंसी उससे सोमवार से पूछताछ कर रही है।

    मुजम्मिल की भुमिका की जांच कर रही है NIA

    इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में वह 22 अप्रैल को दोपहर दो बजे बैसरन में आतंकियों की गोलीबारी के बीच 'अल्लाह हू अकबर' का नारा लगाता हुआ सुनाई दे रहा है।

    सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस हमले में उसकी भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आतंकियों से उसका कोई संबंध है या नहीं।

    जम्मू-कश्मीर पुलिस से पहलगाम आतंकी हमले का मामला अपने हाथ में लेने के बाद से एनआईए ने कई लोगों से पूछताछ की है। इनमें पीड़ितों के परिवार के सदस्य, घटनास्थल पर मौजूद पर्यटक, पोनीवाले और अन्य शामिल हैं।

    पहलगाम में 20-25 मिनट में पहुंचे जवानों का आभारी हूं : ऋषि भट्ट

    22 अप्रैल को जब आतंकियों ने बैसरन में हमला किया तो उस समय मुजम्मिल गुजरात से सपरिवार कश्मीर घूमने आए ऋषि भट्ट नामक पर्यटक को जिपलाइन की सैर करा रहा था। ऋषि ने जिपलाइन की सैर का वीडियो तैयार किया है।

    उन्होंने हमले के अगले दिन वीडियो को ध्यान से देखा तो उन्हें संदेह हुआ। उस दिन की यादों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वह भारतीय सेना के जवानों के आभारी हैं जो 20-25 मिनट के भीतर ही वहां पहुंच गए। उन्होंने मिनटों में ही सभी पर्यटकों को कवर दे दिया..सेना द्वारा कवर दिए जाने के बाद हम सुरक्षित महसूस करने लगे।' हमले से पहले इलाके में सुरक्षा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, 'सेना निचले इलाकों में हर जगह मौजूद थी, यहां तक कि जंगल में भी। लेकिन, मुख्य स्थान पर कोई भी अधिकारी नहीं था।'

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