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    गिलानी के करीबी और अलगाववादी नेता ने हुर्रियत से तोड़ा नाता, भारतीय संविधान में जताई आस्था; बोले- नहीं था कोई रोडमैप

    Updated: Mon, 24 Mar 2025 11:51 PM (IST)

    कश्मीर में बदलाव की बयार के बीच एक और कट्टरपंथी अलगाववादी नेता एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट से अपना नाता तोड़ लिया है। उन्होंने भारत की संप्रभुता और अखंडता में अपनी आस्था जताई है। रेशी ने कहा कि उनका किसी भी अलगाववादी संगठन से कोई सरोकार नहीं है। अगर किसी ने मेरे नाम का इस्तेमाल किया तो कार्रवाई करूंगा।

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    सैयद अली शाह गिलानी का फाइल फोटो

    नवीन नवाज, जम्मू। कश्मीर में बह रही बदलाव की बयार के बीच सोमवार को एक और कट्टरपंथी अलगाववादी नेता एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट से अपना नाता तोड़ने का एलान कर दिया।

    उन्होंने भारत की संप्रभुता अखंडता में अपनी आस्था जताते हुए कहा कि मेरा किसी भी राजनीतिक दल विशेषकर किसी अलगाववादी संगठन से जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कश्मीर की आजादी या कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थक है, मेरा कोई सरोकार नहीं है।

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    'मैं डीपीएम से पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं'

    एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेताओं में एक गिने जाते रहे हैं। वह डीपीएम के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

    मोहम्मद शफी रेशी ने सोमवार को देर रात दैनिक जागरण के साथ टेलीफोन पर बातचीत में कहा कि मेरा हुर्रियत कॉन्फ्रेंस या डीपीएम या किसी अन्य अलगाववादी संगठन से कोई नाता नहीं है। मैं डीपीएम से पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं।

    'हुर्रियत ने कश्मीरियों को पहुंचाया काफी नुकसान'

    मैं करीब सात वर्ष से खुद को अलगाववादी गतिविधियों से दूर रखा हूं। क्योंकि मैं हुर्रियत और इस जैसे अन्य दलों की असलियत को समझ चुका था। इनके पास कोई रोडमैप नहीं था और न है। इनका एजेंडा और विचारधारा अपनी नहीं है, यह एक पड़ोसी मुल्क द्वारा इन्हें दी गई है।

    यही कारण है कि आम कश्मीरी की भावनाओं और आकांक्षाओं को कहीं भी हुर्रियत सही ढंग से व्यक्त नहीं कर सकी। हुर्रियत जैसे संगठनों ने जो कश्मीर और कश्मीरियों का नुकसान किया है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

    'मेरा नाम इस्तेमाल किया तो करूंगा कार्रवाई'

    एडवोकेट मोहम्मद शफी रेशी ने कहा कि मैं अब किसी भी तरह से हुर्रियत के साथ नहीं हूं। मैं एक कानूनपालक नागरिक हूं, मुझे अपने देश की संप्रभुता,सार्वभौमिकता और उसके संविधान की सर्वोच्चता में पूरी आस्था है। अगर कोई गलती से अलगाववादी संगठन मेरा नाम अपनी गतिविधियों के साथ जोड़ता है तो उसके खिलाफ मैं सख्त कानूनी कार्रवाई करूंगा।

    बता दें कि कश्मीर में बदलाव की बयार लगातार सामने आ रही है। जो युवा पहले पत्थर फेंकते थे, वो अब सही दिशा में अपना काम कर रहे हैं। पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान फोकस कर रहे हैं। 

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