जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी न होने से बढ़ी चिंता, गर्मियों में होगी बहुत दिक्कत; जल संकट का भी मंडराया खतरा
जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी न होना चिंता का विषय बन गया है, खासकर 'चिल्ले कलां' के दौरान। इससे गर्मियों में सिंचाई और पीने के पानी की कमी का खतरा ह ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी न होने से बढ़ी चिंता। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी न होना और घाटी के मैदानी इलाकों में मौसम की पहली बर्फबारी न होना चिंता का कारण बन रहा है। विशेषकर तब जब 21 दिसंबर को शुरू हुआ चिल्ले कलां का 40 दिन का कड़ाके की ठंड का दौर अब तक कोई बड़ी बर्फबारी नहीं दे पाया है।
चिल्ले कलां 30 जनवरी को समाप्त होगा और मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक जम्मू और कश्मीर में आमतौर पर सूखा मौसम रहने का अनुमान लगाया है। अगर चिल्ले कलां के दौरान भारी बर्फबारी नहीं होती है तो जम्मू और कश्मीर को गर्मियों के महीनों में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
सिर्फ सिंचाई ही नहीं बल्कि भारी सर्दियों की बर्फ़बारी न होने पर पीने के पानी की बुनियादी इंसानी ज़रूरत पर भी बुरा असर पड़ेगा।जम्मू और कश्मीर की सभी नदियां, झरने, कुएं और झीलें पहाड़ों में मौजूद बारहमासी पानी के भंडारों से चलती हैं।ये भंडार सर्दियों के महीनों में भारी बर्फ़बारी से भर जाते हैं।
ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो दिनों में कश्मीर में मौसम ज़्यादातर सूखा रहने की उम्मीद है और 6 जनवरी के आसपास इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है।
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 5 जनवरी को पूरे इलाके में मौसम ज़्यादातर सूखा रहने की उम्मीद है जिससे कड़ाके की ठंड से राहत मिलेगी। 6 जनवरी को मौसम आम तौर पर बादल छाए रहने की संभावना है और उत्तरी और मध्य कश्मीर के कुछ ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान मैदानी और निचले इलाकों में कोई खास बारिश होने की संभावना नहीं है। हालांकि अगर बादल ज़्यादा घने होते हैं तो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में थोड़ी बर्फबारी हो सकती है।
7 जनवरी से 15 जनवरी तक कश्मीर में मौसम आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है। इस दौरान किसी बड़े बारिश या बड़े पैमाने पर बर्फबारी की उम्मीद नहीं है जिससे रोज़मर्रा के काम बिना किसी बड़ी रुकावट के जारी रह सकेंगे।
अधिकारियों ने लोगों खासकर ऊंचे इलाकों में यात्रा करने वालों कोए स्थानीय मौसम सलाह पर ध्यान देने की सलाह दी है क्योंकि सर्दियों में पहाड़ी इलाकों में मौसम तेज़ी से बदल सकता है।
मरीजों को परेशानी
कड़वी और सूखी ठंड भी दिल और फेफड़ों की समस्याओं वाले लोगों के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है। डाक्टरों ने ऐसे लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह 10 बजे से पहले अपने घरों से बाहर न निकलें और अगर निकलें भी तो ऊनी कपड़ों, मफलर और ऊनी टोपी की कई परतें पहनकर ही निकलें।

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