कश्मीर में बर्फबारी से खिले पर्यटकों के चेहरे, वैष्णो देवी भवन पर भी स्नोफॉल; देखें Photos
कश्मीर में नए साल पर हुई बारिश और बर्फबारी से पर्यटन को बढ़ावा मिला है, खासकर वैष्णो देवी में भी हल्की बर्फबारी हुई। इससे किसानों को भी लाभ हुआ है, क् ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। प्रदेश में नए साल पर बारिश और बर्फबारी राहत लेकर आई है। जहां खेतीबाड़ी के लिए पानी का इंतजार कर रही जमीन को हल्की बारिश ने मजबूती दी है, वहीं पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी ने सैलानियों की आमद बढ़ा दी है।
श्री माता वैष्णो देवी में त्रिकुटा पहाड़ियों पर भी हल्की बर्फबारी हुई है। मौसम में आए बदलाव से अक्तूबर से लंबे समय से चल रहे शुष्क मौसम से भी राहत मिली है, इससे लोगों की सेहत में सुधार आएगा।

बर्फबारी से जिला राजोरी और पुंछ को जोड़ने वाला मुगल रोड (शोपियां) और जोजि ला पर यातायात प्रभावित है। इस बीच जोजि ला पास पर एक टैंपो ट्रैवल दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, लेकिन इसमें कोई घायल नहीं हुआ। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार आगामी 20 जनवरी तक मौसम में बड़ा बदलाव नहीं आएगा। लेकिन दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के चलते 2 से 5 जनवरी के बीच उत्तरी व मध्य कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं।
-1767323976520.jpeg)
जम्मू समेत अन्य मैदानी इलाकों में अगले दिन तक कोहरा छाया रहेगा। यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों से बर्फबारी वाले इलाकों में यातायात व प्रशासन की एडवाइजरी के तहत यात्रा करने की सलाह दी गई है। कश्मीर के विश्व विख्यात स्की रिजार्ट गुलमर्ग के अलावा पहलगाम, सोनमर्ग, सादना पास, गुरेज, तुलैल घाटी, राजदान टाप, माछिल, साधना टाप, जोजि ला पास, मुगल रोड, सिंथन टाप सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है।
-1767323990647.jpeg)
हालांकि, गत 21 दिसंबर से शुरू हुए 40 दिन की कठोर सर्दी वाले चिल्ले कलां में अधिक बर्फबारी नहीं हुई है। राजधानी श्रीनगर व आसपास के इलाकों में वीरवार दिन में बूंदाबांदी हुई। यहां दिन का तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा। पहलगाम में अधिकतम तापमान 4.0 और गुलमर्ग में 1.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू में सुबह हल्की बारिश के बाद बादल छाए रहे। यहां अधिकतम तापमान 16.0 और न्यूनतम तापमान 10.7 डिग्री सेल्सियस रहा।

मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक डॉ. मुख्यतार अहमद के अनुसार आगामी 20 जनवरी तक मौसम में अधिक बदलाव नहीं आएगा। पूर्व कृषि निदेशक एएस रीन का कहना है कि सर्दियों में फसलों के लिए बारिश राहत लेकर आती है। इस समय कनक, सरा, दालें आदि की खेती लगाई गई है।रात को ओस नमी को पूरा करने का काम करती है। लेकिन इस हल्की बारिश से जमीन को पानी मिला है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।