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    श्रीनगर में झेलम की सहायक नहर बनी गटर, गंदगी से बढ़ा बीमारियों का खतरा; प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 03:36 PM (IST)

    श्रीनगर में झेलम नदी की एक सहायक नहर प्रशासन की उदासीनता और कचरा फेंकने के कारण गंभीर रूप से प्रदूषित हो गई है। हब्बा कदल स्थित यह नहर अब प्लास्टिक कच ...और पढ़ें

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    झेलम की सहायक नहर बनी गटर (प्रतिकात्मक तस्वीर)

    जागरण संवाददाता, श्रीनगर। श्रीनगर में झेलम नदी की एक सहायक नहर प्रशासन की उदासीनता और कचरा फेंकने के कारण गंभीर रूप से प्रदूषित हो गई है। हब्बा कदल स्थित यह नहर अब प्लास्टिक कचरे और घरेलू कूड़े से भरी एक गटर बन गई है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा है।

    नहर में गंदगी से बीमारियों का खतरा

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित रूप से कचरे की सफाई, कमजोर निगरानी व्यवस्था और आस-पास के इलाकों के लोगों द्वारा अनियंत्रित रूप से कचरा फेंकने के कारण नहर एक गटर में परिर्वतित हो गई है। यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है।

    लोगों का कहना है कि गर्मियों के दिनों में दुर्गंध और भी बढ़ जाती है, जिससे नहर के पास रहने वाले परिवारों को अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं।

    पहले जीवनरेखा हुआ करती थी नहर

    अरशद अहमद नामक एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि यह नहर कभी हमारे इलाके की जीवनरेखा हुआ करती थी और स्वच्छ बहता पानी मुहैया कराती थी। इससे लोगों की पानी जरूरतें भी पूरी हो रही थी। आज सरकारी उपेक्षा के कारण यह बीमारी का स्रोत बन गई है।

    अरशद ने बताया कि संबंधित विभागों में बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद अब तक इसके रखरखाव व संरक्षण के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो अगले एक दो सालों के भीतर इस नदी का वजूद ही मिट जाएगा। इससे पहले आसपास के इलाकों में बीमारियां फूट पड़ेगी।

    सुधारात्मक उपाय करने की अपील

    स्थानीय निवासियों ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया है, जिसमें जमा कचरा हटाना, पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना और नहर का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना शामिल है।

    उन्होंने जलमार्ग में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ चेतावनी बोर्ड लगाने और आगे दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी की भी मांग की है।