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    गुलाम जम्मू-कश्मीर में जैश की जिहादी गतिविधियों का खुलासा, कट्टरपंथ के पाठ से आतंक को जिंदा करने का प्रयास

    By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:40 PM (IST)

    पाकिस्तान ने गुलाम जम्मू कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद को जिहादी गतिविधियां फिर से शुरू करने की अनुमति दी है। मीरपुर में 'दौरा-ए-तरबिया' और 'दौरा-ए-तस्किया ...और पढ़ें

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    यह कदम पाकिस्तान के खिलाफ उठ रही आवाज़ों से ध्यान भटकाने और कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने का प्रयास है।

    नवीन नवाज, श्रीनगर। गुलाम जम्मू कश्मीर के लोगों का ध्यान पाकिस्तान से आजादी की मांग से हटाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को वहां खुलेआम अपनी जिहादी गतिविधियां शुरु करने की अनुमति दे दी है।

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    जैश ए मोहम्मद ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ की मदद से गुलाम जम्मू-कश्मीर में दौरा ए तरबिया और दौरा एक तस्किया शुरु किया है। यह शिविर मीरपुर में गुरूवार को ही शुरु हुए हैं और अगले 15 दिनों तक चलेंगे। इन शिविरों के जरिए लोगों में विशेषकर युवाओं में धर्मांध हिंसक जिहादी मानसिकता के बीज बोए जाते हैं और उसके आधार पर आतंकी गतिविधियों के लिए नया कैडर चिह्नित किया जाता है।

    यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि पाकिस्तान सरकार ने दिखावे के लिए जैश-ए-मोहम्मद की पाकस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक सभाओं और रैलियों पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद यदा-कदा जैश-ए-मोहम्मद कराची और बहावलपुर में अपनी रैलियां आयोजित करता रहा है या फिर जैश के कमांडर व जैश के लिए कैडर जुटाने वाले उलेमा और मौलवी अन्य संगठनों की रैलियों के जरिए अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहते हैं।

    जैश ने शुरू किए दौरा ए तरबिया और दौरा एक तस्किया

    दौरा ए तरबिया सिर्फ पुरूषों के लिए होता है जबकि दौरा-ए-तस्किया महिलाओं के लिए है। गुलाम जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा दौरा-ए-तस्किया पहली बार आयोजित किया जा रहा है। दौरा-ए-तरबिया को पहले भी जैश-ए-मोहम्मद द्वारा गुलाम जम्मू-कश्मीर में आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन यह मनशेरा और गढ़ी हबीबुल्ला और बालाकोट में ही आयोजित किया जाता था।

    मीरपुर जैसे शहर में दौरा-ए-तरबिया और दौरा-ए-तस्किया का आयोजन जैश-ए-मोहम्मद की बदली रणनीति और पाकिस्तान सरकार के खुले संरक्षण की पुष्टि है। संबधित सूत्रों ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद की अगर बीते 25 वर्ष की गतिविधियों का आकलन किया जाए तो बीते छह वर्ष में यह पहला अवसर है जब वह सार्वजनिक तौर पर दौरा-ए-तरबिया का आयोजन कर रहा है। वह इस कैंप का आयोजन कराची, गुजरांवाला, सियालकोट, पेशावर और क्वेटा, बहावलपुर, मुलतान और लाहौर में समय समय पर करता आया है।

    मीरपुर में गुरूवार को शुरु हुए यह शिविर

    संबधित सूत्रों ने बताया कि मीरपुर में गुरूवार को यह शिविर शुरु हुए हैं। इनमें जैश-ए-मोहम्मद संबंधित उलेमा और मौलवी इस्लाम के नाम पर जिहाद का सबक पढ़ाएंगे। अजहर मसूद भी इन शिविरों में शामिल होगा,लेकिन अभी तय नहीं है कि वह किस दिन आए। कुछ लोगों को कहना है कि वह वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए ही इन शिविरों में भाग लेने वालों को संबोधित करेगा।

    इन शिविरों में जैश-ए-मोहम्मद के मारे गए आतंकियों के बच्चों और परिजनों को भी मंच पर बुलाया जाएगा। जैश-ए-मोहम्मद का कश्मीरी कैडर जो पाकिस्तान या फिर गुलाम जम्मू-कश्मीर में है, वह भी इन शिविरों में मौजूद रहेगा और कश्मीर में तथाकथित जुल्म की कहानियां सुनाएगा। दौरा-ए-तस्किया जोकि पूरी तरह महिलाओं के लिए है, उनमें मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर और और उसके भतीजे की बेवा आफिरा भी शामिल होंगी।

    कश्मीर के बारे में झूठी कहानियां सुनाई जाती हैं

    जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को कुचलने में अहम भूमिका निभाने वाले, जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक अशकूर वानी ने कहा दौरा-ए-तरबिया औ दौरा ए तस्किया में मजहब के नाम पर पुरूषों और महिलाओं में जिहादी मानसिकता पैदा की जाती है। उन्हें कश्मीर के बारे में झूठी कहानियां सुनाई जाती हैं।

    दौरा ए तरबिया के दौरान कई लोग स्वयं जिहाद में मर मिटने के लिए आगे आ जाते हैं, या फिर कुछ अन्य को जिनमें जिहादी मानिसकता घर जाती है,जैश कमांडर चिह्नित कर लेते हैं। इसके बाद इन लोगों को दौरा-ए-आम के लिए चुना जाता है और उनके आतंकी बनने व कश्मीर में दाखिल होने की कहानी शुरु हो जाती है।

    गुलाम जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठ रही

    गुलाम जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा सार्वजनिक तौर पर अपनी गतिविधियं शुरु करने एडवोकेट अजात जम्वाल ने कहा कि इसे दो तरीकों से देखा जा सकता है। पहला, पाकिस्तान कहेगा कि मीरपुर जा है, वह पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बल्कि तथाकथित आजाद कश्मीर, जिसे हम गुलाम जम्मू-कश्मीर कहते हैं, का हिस्सा है। दूसरा, गुलाम जम्मू-कश्मीर में एक बड़ा वर्ग अब खुलेआम जिहादी तत्वों के खिलाफ बोलता है, वह जम्मू-कश्मीर में जिहाद के नारे पर भी सवाल उठाता है, कहता है कि यह पाकिस्तान की जंग है, कोई जिहाद नहीं है।

    गुलाम जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ भी आवाज उठ रही है। इसलिए जैश-ए-मोहम्मद को वहां प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से अपनी गतिविधियां बढ़ाने की इजाजत दी गइै। जैश-ए-मोहम्मद के उलेमा और मौलवी वहां इस्लाम के नाम पर लोगों में धर्मांध जिहादी मानसिकता पैदा करने का प्रयास करेंगे, उन्हें कश्मीर जिहाद का पाठ पढ़ाएंगे और गुलाम जम्मूकश्मीर से नया कैडर भर्ती कर कश्मीर भेज लोगों का ध्यान वहां पाकिस्तान की करतूतों से हटाने का प्रयास होगा।