Jammu Kashmir Fire: थम नहीं रहा आग लगने का सिलसिला, धू-धूकर जल रहे आशियाने; 7 दिनों में घटी 41 घटनाएं
श्रीनगर के हजरतबल इलाके में एक भीषण आग ने तीन रिहायशी मकानों को तबाह कर दिया। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। दमकल विभाग मामले की जांच कर रहा है। पिछले एक हफ्ते में घाटी में आग लगने की 41 घटनाएं हो चुकी हैं। दमकल विभाग लोगों से आग से बचने के उपायों के प्रति जागरूक रहने की अपील कर रहा है।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। Srinagar News: शहर के हजरतबल इलाके में आग की एक भयानक दुर्घटना में तीन रिहायशी मकान क्षतिग्रस्त हो गए। अलबत्ता इस घटना में कोई जानी नुकसान नही हुआ। मिली सूचना के अनुसार घटना फारूक अहमद नायक नामक एक व्यक्ति के दो मंजिला रिहायशी मकान में बुधवार दोपहर 12 बजे उस समय घटी जब उसके मकान की दूसरी मंजिल से अचानक आग की लपटें निकलने लगी।
इससे पूर्व की स्थानीय लोगों की सूचना पाकर दमकल विभाग वहां पहुंच जाता, आग ने तेजी से फैलते हुए साथ सेट दो अन्य रिहायशी मकानों को अपनी चपेट में ले बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नही चल पाया है। इधर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आग लगने से 41 घटनाएं आईं सामने
बता दें कि आग की इसी तरह की एक घटना के दौरान कल यानी मंगलवार को भी शहर के नौहट्टा इलाके में चार रिहायशी मकान व तीन दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई थी।
घाटी में आग लगने की घटनाओं का न खत्म होने वाला लगातार जारी है। दमकल विभाग के अनुसार नव वर्ष शुरू होने के एक सप्ताह के दौरान यहां आग लगने की 41 घटनाएं घटी। इनमें से 9 घटनाएं श्रीनगर शहर में घटी।
विभाग के एसिसटेंट डायरेक्टर आबिग हुसैन मीर ने कहा कि अक्सर घटनाएं बिजली, गैस व मिट्टी के तेल पर चलने वाले उपकरों का लापरवाही से इस्तेमाल करने के चलते घटती है।
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लोगों को किया जा रहा जागरूक
मीर ने कहा, विभाग अपनी तरफ से लोगों को आग से बचने के उपायों संबंधित जागरूक करने में पूरी तरह से जुटा हुआ है और बीते वर्ष यानी 2024 में विभाग ने समूची घाटी में 4,000 के करीब जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर कर लोगों को आग से बचाव तथा गर्मी पहुंचाने तथा खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का सही इस्तेमाल करने संबंधित जानकारी दी।
उन्होंने कहा,इन जागरूक्ता कार्यक्रमों के आयोजन के बावजूद भी आग लगने की घटनाओं का बार बार घटना इस बात की तरफ इशारा करता है कि लोग लापरवाही से काम लेते हैं। नतीजतन ऐसी घटनाओं में न केवल माली बल्कि जानी नुकसान से भी जूझना पड़ता है।
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