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    बर्फ काटकर वंदे भारत को रास्ता दिखाएगी ट्रेन, माइनस 20 डिग्री में भी दौड़ेगी; घाटी में कब से चलेगी रेलगाड़ी?

    Updated: Fri, 17 Jan 2025 08:34 PM (IST)

    कश्मीर घाटी के लिए जल्द ही शुरू होने वाली सीधी ट्रेन सेवा से यात्रियों को काफी सुविधा होगी। पूरी तरह वातानुकूलित आठ कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को ठंडे मौसम और बर्फीले क्षेत्र के लिए खास तौर पर बनाया गया है। इसमें एंटी-फ्रीजिंग सिस्टम है और बर्फबारी होने पर ट्रैक पर सवारी गाड़ी के आगे-आगे बर्फ हटाने वाली एक ट्रेन चलाई जाएगी।

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    Train To Kashmir: घाटी में कब से दौड़ेगी ट्रेन।

    जागरण ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू रेल मंडल की शुरुआत के बाद कटड़ा से बनिहाल के बीच कश्मीर घाटी के लिए सीधी ट्रेन सेवा जल्द ही शुरू होने जा रही है। पूरी तरह वातानुकूलित आठ कोच वाली ट्रेन का सफल और अंतिम स्पीडी ट्रायल पूरा कर लिया गया है।

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    ट्रेन की गति क्षमता 160 किमी प्रतिघंटा है, किंतु रेलवे सुरक्षा आयोग ने 85 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाने की अनुमति दी है। चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई हैं। रेलवे ट्रैक पर ट्रेन को दौड़ाकर निरीक्षण-परीक्षण कर लिया गया है। सिर्फ शीर्ष स्तर पर हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

    गाड़ी के आगे-आगे बर्फ हटाने वाली एक ट्रेन चलाई जाएगी

    चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में ठंडे मौसम और बर्फीले क्षेत्र के लिए खास तर पर बनी वंदे भारत एक्सप्रेस अनवरत चलती रहेगी। मौसम संबंधी बाधा इसे रोक नहीं पाएगी। ठंडे क्षेत्रों में यात्रा के लिए अलग डिजाइन का ट्रेन सेट है, जो रेलवे ट्रैक पर बर्फ जमने के बाद भी नहीं रुकेगी।

    ट्रेन में एंटी-फ्रीजिंग सिस्टम है। घाटी में अगर बर्फबारी होगी तो ट्रैक पर सवारी गाड़ी के आगे-आगे बर्फ हटाने वाली एक ट्रेन चलाई जाएगी, जिससे अनवरत यात्रा सुनिश्चित हो सकेगी। कटड़ा से बनिहाल के बीच 111 किलोमीटर के इस रेल खंड पर परियोजना की शुरुआत 1995-96 में हुई थी, किंतु काम शुरू नहीं हो पाया था।

    आठ वर्ष पहले परियोजना पर काम शुरू हो पाया। कुल लागत 43 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें 33 हजार करोड़ सिर्फ कटड़ा-बनिहाल खंड पर खर्च आया है। इसमें 97 किमी लंबी सुरंग है। मार्ग में चार पुल भी हैं, जिनकी दूरी सात किमी है।

    टनल में प्रत्येक 50 मीटर पर कैमरे लगाए गए

    चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज बना है, जिसकी ऊंचाई 359 मीटर है। इसमें 30 हजार टन स्टील का उपयोग हुआ है। अंजी नदी पर भारत का पहला केबल-स्टेड ब्रिज बनाया गया है। सुरंगों के निर्माण में नवाचार है। पारंपरिक रूप से गिट्टी-बालू का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जोड़ भी नहीं है।

    कंपन रोधी भूकंपीय उपकरण लगे हैं। सुरक्षा के लिए टनल में प्रत्येक 50 मीटर पर कैमरे लगाए गए हैं, जो केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जुड़े हैं। आठ कोच वाली इस ट्रेन को माइनस 20 डिग्री तक की ठंड की स्थिति के लिए डिजाइन किया गया है।

    यात्री के साथ ही लोको पायलट के लिए भी ट्रेन में हीटिंग सिस्टम लगे हैं। पायलट के केबिन में गर्म विंडशील्ड है, जो बर्फबारी और कोहरे में भी ट्रेन के पानी को जमने नहीं देगा। दृष्यता स्पष्ट होगी। प्लंबिंग एवं बायो-टायलेट में भी हीटिंग सिस्टम है।

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