अमित शाह के कश्मीर दौरे के बीच अलगाववादियों का गिरा एक और विकेट, बशीर अंद्राबी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से तोड़ा नाता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे के बीच एक और अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर फ्रीडम फ्रंट के नेता बशीर अहमद अंद्राबी ने खुद को कश्मीर की आजादी के नारे से आजाद करने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि मेरा कश्मीर की आजादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और इन जैसे किसी भी संगठन से कोई नाता नहीं है। बीते एक माह के दौरान लगभग सात अलगाववादी संगठनों ने गुडबाय बोल दिया है।
नवीन नवाज, श्रीनगर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे के बीच सोमवार को एक और अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर फ्रीडम फ्रंट के नेता बशीर अहमद अंद्राबी ने खुद को कश्मीर की आजादी के नारे से आजाद करने का एलान किया।
उन्होंने कहा कि मेरा कश्मीर की आजादी, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और इन जैसे किसी भी संगठन से कोई नाता नहीं है। बशीर अहमद अंद्राबी के पिता मोहम्मद अमीन अंद्राबी ने ही हुर्रियत कॉन्फ्रेसं के प्रमुख घटकों में शामिल कश्मीर फ्रीडम फ्रंट का गठन किया था।
बीते एक माह के दौरान लगभग सात अलगाववादी संगठनों व उनके नेताओं ने अलगाववाद को सार्वजनिक तौर पर गुडबाय बोल दिया है। भारतीय संविधान और देश की एकता अखंडता में अपनी आस्था जताते हुए कहा कि उनका अब अलगाववाद से या कश्मीर की आजादी का नारा देने वालों से कोई नाता नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं अमित शाह
उल्लेखनीय है कि पांच अगस्त 2019 के बाद से कश्मीर में जिस तरह से सरकार ने आतंकियों और अलगाववादियों खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के साथ ही कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत बनाने और विकास कार्यों को गति देने का अभियान चला रखा है, उससे अलगाववादियों का पारिस्थितिक तंत्र लगभग नष्ट हो चुका है।
आम लोगों ने भी कश्मीर मे जिहाद और आजादी का नारा देने वालों से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गत रविवार से जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। मंगलवार को वह श्रीनगर में होंगे।
'पाकिस्ताने के एजेंडो को पूरा किया जा रहा है'
बशीर अहमद अंद्राबी ने कहा कि मेरा या मेरे संगठन कश्मीर फ्रीडम फ्रंट का अब हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के किसी भी गुट से कोई नाता नहीं है। हमारा आजादी के नारे से कश्मीर में जनमत संग्रह के एजेंडे से कोई सरोकार नहीं है।
हम हुर्रियत कॉन्फ्रेंस समेत ऐसे किसी भी दल और उनकी विचारधारा का विरोध करते हैं, जो जम्मू-कश्मीर की आजादी, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान जैसे नारों की राजनीति करते हैं।
उन्होंने कहा कि हुर्रियत कान्फ्रेंस व इस जैसे अन्य दल आम कश्मीरियों की भावनाओं को समझने, उनके मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। हमें समझ आ चुका है कि यहां जो आजादी का नारा दिया गया है, वह सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान के एजेंडे को पूरा करने के लिए है।
अंद्राबी ने कहा कि मैं मेरा संगठन और मैं भारत के संविधान को बनाए रखने के लिए समर्पित हूं। हम ऐसे किसी भी समूह से संबद्ध नहीं हैं, जो भारत के हितों के खिलाफ काम करता है। अगर कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी अलगाववादी मुद्दे पर मेरा या मेरे संगठन का नाम इस्तेमाल करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कई संगठनों ने हुर्रियत से तोड़ा नाता
पिछले महीने हुर्रियत से नाता तोड़ने वालों में शामिल जम्मू-कश्मीर तहरीक-ए-इस्तिकामत के अध्यक्ष गुलाम नबी वार ने कहा कि मैंने बहुत पहले ही अलगाववादी विचारधारा से किनारा कर लिया था, लेकिन एलान कुछ समय पहले ही किया है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को लोकतांत्रिक अधिकार चाहिए थे, उन्हें शोषण और अवसरवादिता की राजनीति से आजादी चाहिए थी। वह बहुत परेशान था और पाकिस्तान अपने कुछ एजेंटों की मदद से मौके का फायदा उठाकर गुमराह किया और यहां आतंकी हिंसा का दौर शुरू हो गया।
हमें असलियत समझ आ चुकी है। आम कश्मीरी भी सच जान चुका है। इसलिए अब यहां कोई भी आजादी और अलगाववाद की बात करना पसंद नहीं करता। हमें राष्ट्रीय सविधान में पूरा यकीन है।
सिकुड़ रही अलगाववादी विचारधारा की जमीन
जम्मू-कश्मीर मामलों के सलीम पंडित ने कहा कि कश्मीर में अलगाववादियों का पारिस्थितिक तंत्र और उनका नरेटिव अब समाप्त हो चुका है। अब यहा मुख्यधारा की राजनीति और विचारधारा मजबूत हो रही है।
यहां अब भारतीय संविधान की मजबूती का राष्ट्रवाद का एक नेरेटिव जोर पकड़ रहा है और सभी लोग खुद को उससे जोड़ रहे हैं। अलगाववादी संगठनों का अलगाववाद से तौबा करना बता रहा है कि कश्मीर में अब अलगाववादी विचाराधारा की जमीन लगातार सिकुड़ रही है।
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