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    वक्फ कानून पर सदन में भिड़े NC विधायक, CM अब्दुल्ला ने रेड कार्पेट पर किरेन रिजिजू का किया स्वागत; विपक्ष ने कसा तंज

    Updated: Mon, 07 Apr 2025 07:00 PM (IST)

    सीएम उमर अब्दुल्ला और किरेन रिजिजू की मुलाकात काफी तूल पकड़ लिया है। विपक्षी पार्टी ने सत्तारूढ़ पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। पीपुलस कान्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने कहा कि यहां तो नेकां-भाजपा के बीच दुश्मनी नजर आती है लेकिन दोनों में जो भाईचारा है वह टयूलिप गार्डन में देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि किरेन रिजिजू ही सदन में वक्फ संशोध विधेयक को पेश किया है।

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    किरेन रिजिजू को ट्यूलिप गार्डन में घुमाते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला।

    नवीन नवाज, श्रीनगर। शरदकालीन राजधानी जम्मू में जारी विधानसभा सत्र में सोमवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस(नेकां) के विधायकों ने वक्फ संशोधन बिल को मुस्लिम विरोधी बताते हुए हंगामा किया। नेकां विधायकों की भाजपा विधायकों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    वहीं ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला भी केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के साथ एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन की सैर कर रहे थे।

    वक्फ विधेयक संशोधन अधिनियम को संसद में किरेन रिजिजू ने ही पेश किया और जम्मू कश्मीर में भाजपा को छोड़ अन्य सभी दल वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ है।

    केंद्रीय मंत्री के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सैर की तस्वीरें इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के साथ ही विपक्ष ने भी उमर अब्दुल्ला को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष ने उमर अब्दुल्ला पर तंज कसते हुए कहा कि वह किरेन रिजिजू के साथ वक्फ भाईचारा निभाने के लिए उनके स्वागत में रेड कार्पेट बिछा रहे हैं।

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    मुलाकात की फोटो वायरल

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को श्रीनगर के प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन में सुबह की सैर की। यह एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है, रिजिजू ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से भी मुलाकात की।

    उन्होंने इंटरनेट मीडिया मीडिया पर पोस्ट में इस इस मुलाकात को "ताजा करने वाली सुबह की सैर" बताया, जिसमें "सार्थक बातचीत" हुई। लेकिन सभी को यह मुलाकात इतनी ताज़ा नहीं लगी।

    जिस समय केंद्रीय मंत्री इंटरनेट मीडिया पर ट्यूलिप गार्डन की अपनी तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर साझा कर रहे थे, उस समय शरदकालीन राजधानी जम्मू में विधानसभा में नेकां विधायक वक्फ बिल के विरोध में चर्चा की मांग कर रहे थे। उनकी भाजपा विधायकों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    क्या बोले सज्जाद गनी लोन

    पीपुलस कान्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने कहा कि यहां तो नेकां-भाजपा के बीच दुश्मनी नजर आती है, लेकिन दोनों में जो भाईचारा है, वह टयूलिप गार्डन में देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि किरेन रिजिजू ही सदन में वक्फ संशोध विधेयक को पेश किया है।

    जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र मुस्लिम प्रदेश है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में कम से कम किरेन रिजिजू से दूर रहना चाहिए था। वह उनके स्वागत में पलकें बिछाए बैठे हैं।

    'नेकां का रवैया दोगला'

    विधानसभा में पीडीपी विधायक दल के नेता वहीद उर रहमान परा ने कहा कि नेकां का रवैया दोगला है, उसके विधायक कह रहे हैं कि वक्फ बिल पर चर्चा हो, लेकिन स्पीकर मना करते हैं। नेकां के विधायक दिखावे के लिए चाहे जितना भी हंगामा करें।

    लेकिन यहां सभी जानते हैं कि मुख्यमंत्री और नेकां संरक्षक ने किसी और के लिए नहीं, बल्कि किरेन रिजिजू के लिए ट्यूलिप उद्यान में रेड कार्पेट बिछाया है। यह वही मंत्री हैं जिन्होंने संसद में विधेयक पेश किया और उसे सही बताया है।

    'सीएम को तमिलनाडु से सीख लेनी चाहिए'

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह वाकई निराश करने वाला है। मुख्यमंत्री जो स्वयं कहते हैं कि वक्फ बिल मुस्लिमों के खिलाफ है और वह इसका पुरजोर विरोध करते हैं, लेकिन सदन में वक्फ बिल पर बहस नहीं कराई जाती और टयूलिप गार्डन में मुख्यमंत्री उसी केंद्रीय मंत्री के साथ सैर करते हैं, जो वक्फ बिल को सही ठहराते हैं।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को कम से कम तमिलनाडु से सबक लेना चाहिए। तमिलनाडु सरकार ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है, लेकिन मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी दल सत्ता के लिए ऐसा करने से बचता है।

    'इस मुलाकात को ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं'

    जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि किरेन रिजिजू और उमर अब्दुल्ला की मुलाकात को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में हमें उन लोगों से भी संवाद और समन्वय बनाए रखना होता है जिनसे हम असहमत हों, जिनकी विचारधारा हमसे भिन्न हो।

    अगर आप इन दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर किसी तरह का राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश करेंगे तो आप सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसके साथ हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि वक्फ अधिनियम को लेकर जो आशंकाएं हैं, जो डर हैं, उन्हें दूर करने के लिए सार्थक और समावेशी विचार विमर्श होना चाहिए। इस तरह के फोटो सेशन से यह मामला हल नहीं होगा।

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