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    व्हाइट कॉलर आतंकियों के खिलाफ एक्शन जारी, LG सिन्हा ने दो सरकारी कर्मियों को किया बर्खास्त; हिजबुल के लिए करते थे काम

    सरकारी तंत्र में छिपे व्हाइट कॉलर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को एक पुलिस कांस्टेबल समेत दो सरकारी कर्मियों को बर्खास्त कर दिया। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में से एक पीडब्ल्यूडी विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत इश्तियाक अहमद मलिक और दूसरा श्रीनगर के ब्रेन निशात का रहने वाला पुलिस कांस्टेबल बशारत अहमद मीर है।

    By Jagran News Edited By: Sushil Kumar Updated: Thu, 10 Apr 2025 11:29 PM (IST)
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    आतंक को लेकर एलजी सिन्हा का बड़ा एक्शन। फाइल फोटो

    नवीन नवाज, श्रीनगर। सरकारी तंत्र में छिपे बैठे व्हाइट कॉलर आतंकियों के खिलाफ अभियाान को जारी रखते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को एक पुलिस कांस्टेबल समेत दो सरकारी कर्मियों को बर्खास्त कर दिया।

    उल्लेखनीय है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू कश्मीर में उपराज्यपाल का कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही जीरो टेरर और आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के तहत सरकारी तंत्र में छिपे व्हाइट कॉलर आतंकियों व जिहादियों के सफाए के अभियान शुरू किया और इस अभियान के तहत अब तक आतंकियों के मददगार 80 सरकारी अधिकारी व कर्मी सेवामुक्त किए जा चुके हैं। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और तहसीलदार भी शामिल हैं।

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    फरवरी में तीन सरकारी कर्मियों को किया था बर्खास्त

    इससे पूर्व फरवरी 2025 में उपराज्यपाल ने आतंकियों के मददगार तीन सरकारी कर्मियों को बर्खास्त किया था। जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार के सत्तासीन होने के बाद आतंकियों के मददगार सरकारी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने के यह तीसरा और मौजूदा वर्ष में यह दूसरा अवसर है।

    इससे पूर्व फरवरी 2025 में उपराज्यपाल ने आतंकियों के मददगार तीन सरकारी कर्मियों को बर्खास्त किया था।आज बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मियों में एक पीडबल्यूडी विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत इश्तियाक अहमद मलिक निवासी लारनू, अनंतनाग है और दूसरा श्रीनगर के ब्रेन निशात का रहने वाला पुलिस कांस्टेबल बशारत अहमद मीर।

    वह पुलिस में असिस्टेंट वायरलेस आप्रेटर है। इश्तियाक अहमद और बशारत अहमद दोनों ही निलंबित हैं और जेल में बंद हैं। इन दोनों केा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बरखास्त किया है।

    पाकिस्तान के लिए करता था काम

    संबधित अधिकारियों ने पीडब्लयूडी विभाग के बर्खास्त किए गए वरिष्ठ सहायक इश्तियाक अहमद के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह वर्ष 2000 में सरकारी सेवा में शामिल हुआ था। वह प्रतिबंधित जमाते इस्लामी का एक कट्टर समर्थक और सदस्य है।

    वह हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों के लिए बतौर ओवर ग्राउंड वर्कर काम करता था। उसने अपने पैतृक गांव शितरू लारनू कोकरनाग, अनंतनाग में ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी हिज्बुल मुजाहिदीन के लिए ओवरग्राउंड वर्करों का एक नेटवर्क तैयार करने, हिजबुल मुजाहिदीन के लिए नए आतंकियों की भर्ती में लगातार जुटा हुआ था।

    उसके द्वारा तैयार किए गए ओवरग्राउंड वर्कर ही नहीं, वह खुद भी अपने इलाके में सुरक्षाबलों की गतिविधियों, मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े लोगों की गतिविधियों की हर जानकारी आतंकियों तक पहुंचाता था। वह सीमा पार बैठे आतंकी हैंडलरों से भी संपर्क में रहता था।

    फरवरी में इसहाक नामक आतंकी गिरफ्तार

    इश्तियाक अहमद ने वर्ष 2008, 2009, 2010 और उसके बाद 2016 में लारनू, कोकरनाग व अनंतनाग में हिंसक प्रदर्शनों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई। वह आतंकियों के लिए हथियार, पैसे और ठिकानों का भी बंदोबस्त कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी गतिविधियों पर कई बार संदेह हुआ, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। पुलिस ने पांच मई 2022 को इसहाक नामक एक आतंकी को गिरफ्तार किया।

    इसहाक ने अपनी पूछताछ में इश्तियाक अहमद के बारे में जानकारी और उसकी गतिविधियों के कई पुख्ता सुबूत उपलब्ध कराए। इसके बाद इश्तियाक को गिरफ्तार कर लिया और और पूछताछ के दौरान उसने एक-एक कर अपने गुनाहों को स्वीकार किया। उसने बताया कि वर्ष 2016 में आतंकी बुरहान की मौत के बाद उसने लारनू और उसके साथ सटे इलाकों में हिंसा, आगजनी और हिंसक प्रदर्शनों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई।

    देश की दुश्मनों को कर रहा था मदद

    उसने बताया कि नौ जुलाई 2016 को लारनू पुलिस चौकी पर पेट्रोल बमों और पत्थरों से हमला करने वाली भीड़ का नेतृत्व उसने ही किया था। उन्होंने बर्खास्त किए असिस्टेंट वायरलेस ऑप्रेटर बशारत अहमद मीर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2010 में पुलिस में भर्ती हुआ था और वर्ष 2017 तक वह पुलिस के विभिन्न विंगों में समय- समय पर तैनात रहा।

    वर्ष 2017 में अदालत के एक फैसले के आधार पर उसे व कुछ अन्य पुलिस कांस्टेबल वायरलेस ऑप्रेटरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई। वर्ष 2018 में अदालत के एक निर्देश पर वह पुन: पुलिस में बहाल हो गया और इस बीच वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए काम करने लगा था।

    उसकी पुलिस विभाग के भीतर पहुंच थी और इसका वह पूरा लाभ उठाकर देश के दुश्मनों की मदद कर रहा था। वह आतंकियों के स्थानीय नेटवर्क के लिए भी काम कर रहा। दिसंबर 2023 में एक विश्वसनीय सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसने अत्यंत संवेदनशील सूचनाएं दुश्मन देश तक पहुंचाई थी।

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