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    कश्मीर में अवैध नियुक्ति, सरकारी फंड गबन के मामले में 108 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप दायर, जानिए पूरी डिटेल

    By Raziya Noor Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 01:09 PM (IST)

    श्रीनगर की अपराध शाखा कश्मीर की आर्थिक अपराध विंग ने सुंबल के इलेक्ट्रिक डिवीजन में अवैध नियुक्तियों और सरकारी फंड के गबन से जुड़े मामले में 108 आरोपि ...और पढ़ें

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    यह मामला सरकारी खातों से धोखाधड़ी से करोड़ों निकालने और फर्जी नियुक्तियों में मदद से संबंधित है।

    जागरण संवाददाता, श्रीनगर। अपराध शाखा कशमीर की आर्थिक अपराध विंग , श्रीनगर सरकारी फंड के गबन और इलेक्ट्रिक डिवीजन सुंबल में अवैध नियुक्तियों से जुड़े एक बड़े मामले में 108 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर नंबर 25/2018 में रणबीर पीनल कोड की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 201 और 120-बी के तहत, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 5(2) के साथ, स्पेशल जज, एंटी-करप्शन, बारामूला की माननीय अदालत में आरोप दायर की है।

    आरोपियों में 15 एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, 06 असिस्टेंट अकाउंट्स आफिसर, 01 अकाउंट्स असिस्टेंट, 06 हेड असिस्टेंट, 04 सीनियर असिस्टेंट जिसमें मुख्य आरोपी मुश्ताक अहमद मलिक पुत्र सोनाउल्लाह मलिक निवासी अरागाम, बांडीपोरा शामिल है), 04 जूनियर असिस्टेंट और 01 आर्डरली शामिल हैं, ये सभी इलेक्ट्रिक डिवीजन सुंबल में तैनात थे। आरोपपत्र में जम्मू कश्मीर बैंक, सुंबल शाखा सोनावारी के 25 अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा 46 फर्जी कर्मचारियों के नाम भी हैं, जिन्हें अवैध रूप से नियुक्त किया गया था।

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    सरकारी खातों से करोड़ों रुपये धोखाधड़ी से निकाले

    यह मामला विश्वसनीय जानकारी मिलने के बाद दर्ज किया गया था कि ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग आफिसर ने विभाग के अन्य अधिकारियों और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी खातों से करोड़ों रुपये धोखाधड़ी से निकाले और फर्जी नियुक्तियों में मदद की। जांच में बड़े पैमाने पर अपराधों का पता चला, जिसमें सरकारी फंड का दुरुपयोग भी शामिल है।

    जांच के दौरान, मुख्य आरोपी मुश्ताक अहमद मलिक से करोड़ों रुपये बरामद किए गए और सरकारी खजाने में जमा किए गए। यह भी पता चला कि आरोपी के कई बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी, जिसमें बचत खाते और फिक्स्ड डिपाजिट, साथ ही जमा ब्याज भी शामिल है।

    सरकार ने आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी और उसी के अनुसार न्यायिक फैसले के लिए सक्षम अदालत में आरोपपत्र जमा किया गया है।