Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    राजा जनक के रुप में जाने जाते थे रामलीला के मंजे कलाकार जिंदल

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 04 Sep 2020 12:16 AM (IST)

    संवाद सहयोगी बसोहली कस्बे के वार्ड नंबर 4 निवासी 59 वर्षीय लेक्चरार जिंदल पाधा बसोहली उ ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    राजा जनक के रुप में जाने जाते थे रामलीला के मंजे कलाकार जिंदल

    संवाद सहयोगी, बसोहली: कस्बे के वार्ड नंबर 4 निवासी 59 वर्षीय लेक्चरार जिंदल पाधा बसोहली उप जिले में राजा जनक के रुप में जाने जाते थे। उनके जम्मू में कोरोना से हुई मौत के बाद हर कोई गमगीन है। कस्बे में शोक की लहर है। अगले माह सेवानिवृत्त होने जा रहे पाधा के चले जाने पर रामलीला क्लब के अलावा शिक्षा विभाग को भी गहरा सदमा लगा है। हर क्षेत्र में वे अपनी सेवाएं पूरी देते थे, चाहे रामलीला क्लब हो या शिक्षा विभाग।

    50 वर्षो से रामलीला में अपना योगदान देते आ रहे हैं। कोई भी भूमिका हो, बचपन में उसे निभा लेते चाहे राक्षस, वानर सेना, मंत्री कोई भी। मौजूदा समय में वे 20 वर्षो से राजा जनक की भूमिका बाखूबी निभा रहे थे, उनके द्वारा जनक का पात्र हर बार प्रशंसा में रहा। जब मिथला पुरी में बारिश न हुई तो किसानों की गुहार पर खुद हल चलाते और इसमें एक गीत जो बसोहली रामलीला का अहम गीत है, बरसा दे नाथ अब पानी इतना मुश्किल मल्हार को आसानी से गाते, जिसे सुन हर कोई दंग रह जाता।

    पिछले कई वषरें से जिंदल पाधा निर्देशक की भी भूमिका में थे। जब वे महानपुर में लेक्चरार थे तो वहां से छात्रों को बसोहली रामलीला में किसान बनाया। यह प्रथा लगभग पांच छह सालों से जारी थी। हर दृश्य का मंचन से पूर्व कलाकारों को निर्देश देते और उन्हें एंगल भी समझाते। बसोहली को सर्वश्रेष्ठ रामलीला बनाने में भी रहा योगदान। उनके निधन पर रामलीला क्लब के प्रधान चंद्र शेखर, उप प्रधान वेद फंदा, पूर्व प्रधान प्रेम सागर अजीज, पूर्व उप प्रधान अजय साध, व्यापार मंडल प्रधान अनिल पाधा, सुभाष फंदा, पूर्व म्यूनिसिपल कमेटी के प्रधान सुनील सोनी, केवल कृष्ण पाधा, मोहिन्द्र कपूर, राकेश बाली आदि ने बताया कि बसोहली रामलीला क्लब ने एक मंजे हुए कलाकार को खो दिया है।