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    Jammu Kashmir Weather: पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार 16 घंटे हुई बारिश, सड़कों पर मलबा गिरने से आवाजाही बंद

    Updated: Mon, 12 Aug 2024 07:33 AM (IST)

    जम्मू- कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई। लगातार कई घंटे बारिश होने से नदी के किनारे के गांवो में लोगों का जीना मुश्किल हो गया। वहीं बारिश और भूस्खलन से सड़कों पर मलबा गिरा जिससे आवाजाही बंद रही। वहीं ये बारिश किसानों के लिए वरदान बनकर आई। किसानों को उम्मीद है कि इस बार धान की उपज अधिक और गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी।

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    16 घंटे से हो रही बारिश की वजह से मैदानी क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर (फाइल फोटो)

    जागरण टीम, कठुआ बिलावर बनी। जिले के पहाड़ी क्षेत्र में लगातार 16 घंटे से हो रही बारिश की वजह से मैदानी क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर हैं। इसके चलते आमजन की परेशानी बढ़ गई है। आलम यह है कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश व भूस्खलन के कारण जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

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    प्रशासन ने नदी-नालों के आसपास जाने की मनाही की है। नदियों के आसपास स्थित खेतों में भी पानी भर गया है। वहीं, सूखे की मार झेल रहे किसानों ने राहत की सांस ली है।

    उधर, मौसम विभाग के अनुसार जिले में पिछले 24 घंटे में 88.5 एमएम बारिश हुई है, जिसके बाद रविवार को अधिकतम तापमान 31.5 व न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रहा।

    उज्ज दरिया का बढ़ा जलस्तर

    जिले के पहाड़ी क्षेत्र बनी व बिलावर में शनिवार रात शुरू हुई बारिश रविवार को भी दिनभर होते रही। करीब 16 घंटे से हो रही बारिश के कारण मैदानी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली उज्ज दरिया उफान पर है। रविवार सुबह 7 बजे 95 हजार क्यूसिक बहाव था। हालांकि, खतरे के निशान से अभी कम है।

    उज्ज दरिया में खतरे का निशान दो लाख क्यूसिक जलस्तर है, लेकिन इस समय उज्ज दरिया के उपर दिल्ली-कटड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस-वे पर दो बड़े पुलों का निर्माण कार्य जारी है, जिस पर काम ठप हो गया है। हालांकि, जलस्तर बढ़ने से कोई नुकसान तो नहीं हुआ है, लेकिन नदी के किनारे रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    लोगों के घरों में घुस गया पानी

    इसी तरह, बिलावर उप जिले में भी शनिवार रात हुई मूसलधार बारिश के कारण भिन्नी, नाज, पंजथीर्थी और उज्ज दरिया का जलस्तर बढ़ गया है। इसके साथ ही बाढ़ के पानी में किनारे की खेती योग्य जमीनें बह गई।

    भिन्नी दरिया के बीच बसे टापू पर स्थित गांव बेरल में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में जा घुसा और कई कनाल जमीन दरिया के किनारे बाढ़ के पानी में बहकर जलमग्न हो गई।

    बेरल के पूर्व सरपंच अख्तर अली ने बताया कि पुल के अभाव में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि हर वर्ष भिन्नी दरिया में आने वाली बाढ़ काफी सारी जमीन बहा कर ले जाती है। अब तो लोगों के घरों में भी पानी घुस रहा है।

    सड़कों पर मलबा गिरने से यातायात बंद

    बिलावर उपजिले में मूसलधार बारिश की वजह से कई संपर्क मार्ग पर भूस्खलन होने के चलते यातायात ठप रही। रियाड-बग्गन, कटली-मल्हार रोड पर जगह-जगह पहाड़ों से मलबा गिरने की वजह से गाड़ियों की आवाजाही बंद रही।

    वहीं कोहग, दालियां, धार डुग्गनु, होटार, डुग्गेनी ब्लाक के सदरोता, पटोदी आदि संपर्क मार्ग पर कोई भी वाहन रविवार को नहीं चली, जिसके चलते लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    पहाड़ी क्षेत्र बनी में इस मौसम में सबसे लंबी बारिश हुई, जो कि लगातार 16 घंटे तक होते रही। हालांकि, बारिश से बनी क्षेत्र में कोई ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ है, क्योंकि सभी मार्ग पर यातायात दिनभर सुचारु रहे। बिजली सप्लाई भी सुचारु रहा।

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    राहत बनकर बरसी बारिश

    पहाड़ी क्षेत्र में बारिश नहीं होने की वजह से नदी नाले सूखने लगे थे, लेकिन देर रात हुई बारिश राहत बनकर बरसी। यह बारिश पहाड़ी क्षेत्र बनी के माल मवेशियों के चारे के लिए लाभदायक मानी जा रही है। इस बरसात में पहाड़ी क्षेत्र में बहुत कम बारिश होने की वजह से बहुत कम घास लगा था।

    इसके कारण लोगों को माल मवेशियों के चारे की दिक्कत आ रही थी। शनिवार देर रात हुई बारिश की वजह से अब माल मवेशियों को चारा उपलब्ध हो जाएगा। वहीं, सुखे पानी के झरने में भी पानी आ जाने से लोगों को राहत मिली है।

    इतना ही नहीं, सिंचाई के लिए पानी न मिलने के कारण सूखे की चपेट में आ चुकी धान की फसल को भी हुई बारिश के चलते सिंचाई के लिए पानी मिल गया। जिससे किसानों ने भी राहत की सांस ली। किसानों को उम्मीद है कि इस बार धान की उपज अधिक और गुणवत्ता भी बेहतर रहेगी।

    किसानों को बारिश के कारण सिंचाई की मद में काफी फायदा हुआ है। उनका कहना था कि बारिश न होने के कारण धान और मक्की की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई थी। बारिश उनके लिए सोना बनकर बरसी है।

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