सज्जाद लोन ने पहलगाम में मारे गए लोगों को दी श्रद्धांजलि, बोले- 'कश्मीरी अब हिंसा को कलंक मानने लगे हैं'
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन (Sajjad Gani Lone) ने कहा कि कभी कश्मीरी समाज में आतंकियों की हिंसा को स्वीकृति थी जो अब सामाजिक कलंक मानी जाने लगी है। पहलगाम नरसंहार ने दिखाया कि यह स्वीकृति कम हुई है पर पूरी तरह खत्म नहीं हुई। लोन ने हिंसा पीड़ितों के परिवारों को व्यापक समर्थन देने की बात कही।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने सोमवार को कहा कि एक समय था जब कश्मीरी समाज के भीतर कहीं न कहीं आतंकियों की हिंसा को स्वीकृति थी। बैसरन पहलगाम के नरसंहार ने बताया कि यह कम हुई है,लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। वह आज जम्मू कश्मीर विधानसभा में बैसरन पहलगाम के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोल रहे थे।
'आतंक को जम्मू-कश्मीर के लोग ही हरा सकते हैं'
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने अपने संबोधन में कश्मीर में बीते 35-36 वर्ष के दौरान हिंसा की सामाजिक स्वीकृति से लेकर इसी सार्वजनिक अस्वीकृति तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है और यह सच है कि पिछले 35 वर्षों से समाज में हिंसा की कुछ हद तक स्वीकृति थी। अब यह मानसिकता कम हो गई है लेकिन पूरी तरह से गायब नहीं हुई है।
उन्होंने दिवंगत सैयद आदिल शाह के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस और सेना ही हिंसा को रोक सकती है,लेकिन समाप्त नहीं कर सकती, इसे जम्मू-कश्मीर के लोग ही इसे हरा सकते हैं। हिंसा फैलाने वाले तत्वों के एजेंडे को नाकाम बना सकते हैं।
निर्दोष लोगों को नुकसान न पहुंचे- लोन
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता ने आतंकरोधी अभियानों में संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह कि हिंसा करने वालों की तलाश के दौरान निर्दोष लोगों की जान को नुकसान न पहुंचे। अन्यथा जो हमें सकारात्मक नजर आ रहा है, वह कभी भी बिगड़ सकता है।
उन्होंने जम्मू कश्मीर के बाहर कश्मीरी छात्रों और व्यवसायियों के बढ़ते उत्पीड़न की निंदा करते हुए कहा कि कुछ मीडिया संस्थान गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के माध्यम से इन चुनौतियों को बढ़ा रहे हें। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि मुख्यमंत्री अन्य राज्यों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजें जो कश्मीरियों के बारे में नकारात्मक धारणाओं को दूर करने का प्रयास करे।
लोन बोले- मैं आतंकी हिंसा की पीड़ा झेल चुका हूं
सज्जाद गनी लोन ने कहा कि मैं आतंकी हिंसा की पीड़ा झेल चुका हूं इसलिए पीड़ितों के परिवारों का यथासंभव व्यापक सहयोग और समर्थन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सदन के कई सदस्यों ने आतंकी हिंसा के कारण अपने प्रियजनों मृत्यु को करीब से देखा है। हममें से कम से कम चार लोगों ने हिंसा के कारण अपने पिता खो दिए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सबसे दर्दनाक भावना जो बनी रहती है वह है असहायता की भावना। इसलिए जम्मू कश्मीर सरकार को इन परिवारों के लिए एक संरक्षक के रूप में कार्य करते हुए यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि पीड़ितों के आश्रित अपने नुकसान के बावजूद अपने सपनों को पूरा कर सकें। उन्होंने इस दौरान शोक प्रस्ताव में पीड़ितों के नाम शामिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि नामों के बिना, यह केवल एक आंकड़ा है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।