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    खेत खलिहान : केंचुआ खाद तैयार कर ग्रामीण युवा निकाल सकते हैं रोजगार की राह, होगा खासा मुनाफा

    Updated: Mon, 07 Jul 2025 01:17 PM (IST)

    जम्मू के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का अवसर! कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक राम लाल भगत के अनुसार युवा वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) उत्पादन से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। यह खाद रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में लोकप्रिय हो रही है। युवा छोटे स्तर पर यूनिट शुरू करके गोबर का उपयोग करके केंचुआ खाद बना सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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    कृषि विभाग यूनिट स्थापित करने के लिए सब्सिडी भी प्रदान करता है।

    जागरण संवाददाता, जम्मू। कई ग्रामीण युवाओं के पास रोजगार नहीं हैं। इतना पैसा भी नहीं कि कोई काम धंधा ही खोल लें। ऐसे में कैसे अपनी जिंदगी आगे बढ़ाए। घर में थोड़ी बहुत खेती है। घर की चौखट पर माल मवेशी भी बंधा है और घर वाले इस काम में लिप्त है। ऐसे में युवा क्या करे कि उसका रोजगार भी निकल आए।

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    इस बार में कृषि विभाग जम्मू के संयुक्त निदेशक रहे राम लाल भगत ने इन युवाओं का मार्ग दर्शन किया है। उनका कहना है कि अगर ग्रामीण युवा कुछ करने पर आ जाए तो कम से कम पूंजी से भी काम शुरू किया जा सकता है और अपने सपनों को साकार किया जा सकता है। केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर ग्रामीण युवाओं के घरों से कुछ माल मवेशी बंधे हैं तो इन मवेशियों के गोबर का सद उपयोग करें।

    केंचुआ खाद के लिए गोबर ही तो प्रमुख जरूरत रहती है। चूंकि वर्तमान समय ऐसा आ रहा है कि किसान रसायन खाद से दूरी बना रहा है। ऐसे में केंचुआ खाद की मांग बढ़ती जा रही है। ग्रामीण युवा छोटा सा यूनिट शुरू करके बड़े यूनिट पर जा सकता है और मनचाहा मुनाफा कमा सकता है।

    क्या है केंचुआ खाद

    दरअसल केंचुआ जिसे हम अर्थ वार्म कहते हैं, गोबर व बचाखुचा कृषि उत्पाद खाते हैं और इनके द्वारा त्यागा गया मल ही केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) कहलाई जाती है। यह खाद बहुत ताकतवर होती है। यह खाद हल्की, दानेदार चाय की पत्ती की तरह होती है। इस खाद की बेहद मांग है। क्योंकि इसमें पोष्ज्ञक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व, एंजाइम आदि होते हैं जोकि भूमि की सेहत को बेहतर करते हैं और पौधे की हर जरूरत को पूरा करते हैं।

    कैसे लग सकता है केंचुआ खाद का यूनिट

    केंचआ खाद का यूनिट स्थापित करना बहत आसान है। अगर आपके पास 4-4 माल मवेशी हैं तो आपको 2 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा, 1 मीटर गहरा पक्का पिट या खड्ढा तैयार करना है जिसके अंदर तीन चैंबर बनाने होते हैं। गौबर की उपलब्धता के हिसाब से पिट की लंबाई बढ़ाई जा सकती है। फिर इसमें नित्य गोबर, व बचा खुचा कृषि उत्पाद मिलाते जाना है। इसमें पहले ही केंचुए छोड़ देने हैं। समय समय पर पानी का छिड़काव भी होता रहेगा। केंचुए खाद खाकर इसे पचाने और मल त्यागने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। दो तीन माह बाद आप देखेंगे कि एक चैंबर में चायपत्ती की तरह खाद तैयार है। अब आपकी मर्जी है कि इसे अपने खेतों में डालें या बाजार में बेच दें। आमतौर पर बाजार में 8 से 10 रुपये में यह खाद बिकती है। केंचुआ खाद का यूनिट तैयार करने के लिए कृषि विभाग सब्सिडी भी देता है। अगर ग्रामीण चाहे तो अपने यूनिट को कई गुणा बढ़ा सकता है मगर उसे गोबर की उपलब्धता के बारे में सोचना होगा। अगर किसी युवा की अपनी डेयरी है तो उसके लिए केंचुआ खाद का बड़ा लगाना आसान रहता है।

    केंचुआ खाद के विशेषज्ञ बन सकते हैं युवा

    केंचुआ खाद की माग लगातार बढ़ रही है। अच्छी से अच्छी खाद किसानों को चाहिए। इसके लिए तरतीब से काम करना आना चाहिए। केंचुआ खाद तैयार कर युवा अपना ब्रांड बाजार में उतार सकते हैं। अगर युवाओं में काम करने की हिम्मत है तो यूनिट का दायरा बढ़ा करके केंचुआ खाद की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। इस काम से युवा अपना नाम तो बनाएगा ही वहीं कमाई भी बढ़ती जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे युवाओं को चाहिए कि वे अपनी नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क कर इस प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी हासिल करे। - राम लाल भगत, पूर्व, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग जम्मू

    अब हर दिन ही वर्षा

    बरसात का सीजन है और आने वाले दिनों में आए दिन रुक रुक कर अब वर्षा के आसार बने हुए हैं। गुरुवार के बाद कुछ वर्षा के क्रम में एक दो दिन ठहराव हो सकता है। धान की रोपाई में जुटे किसानों को चाहिए कि वे अपना काम इन दिनों में निपटाने का प्रयास करें । धान की खेती को भरपूर पानी की जरूरत रहती है और आए दिन वर्षा होने से पानी की जरूरत पूरी हो रही है। वहीं बाग बगीचों से पानी की निकासी करते रहें ताकि पेड़ पौधों को कोई नुकसान न हो।

    गन्ने की खेती को सरकार बढ़ावा दे

    मढ़ के काहना चक बेल्ट में किसान गन्ने की पारंपरिक खेती कर रहे हैं। लेकिन वहां के किसानों का कहना है कि सरकार इन किसानों की सहायता के लिए आगे नहीं आ रही। किसान व समाज सेवी दर्शन मेहरा का कहना है कि यहां तकरीबन डेढ़ दर्जन गांवों में किसान गन्ने की खेती करते हैं और उनकी कई दिक्कतें है। कई बार ऐसा समय आता है कि माल बिकता नहीं है। सरकार को इनके लिए कोई रास्ता निकालना चाहिए। इस क्षेत्र का गन्ना नरम और मीठा होता है जिसकी मांग बहुत रहती है। गर्मियों में जूस की रेहड़ियों पर यही गन्ना अधिकतर इस्तेमाल होता है।

    खेती के लिए किसानों को मिले मुफ्त बिजली

    किसानों की मांग है कि खेती के लिए उनको बिजली मुफ्त दी जाए ताकि किसान अपने खेती के काम को आसानी से बढ़ा सके। उन्नत किसान कुलभूषण खजूरिया का कहना है कि पंजाब की तरह जम्मू में भी किसान खेती में जुटे हुए हैं। खासकर सीमांत क्षेत्रों में तो इन लोगों की मुख्य कार्य खेती ही तो है। फिर किसानों को खेती के लिए बिजली निशुल्क मिलनी चाहिए। चूंकि इन दिनों पर्याप्त वर्षा हो रही है और पानी की कमी नहीं है। लेकिन अक्सर इन किसानों को खेती के लिए पंपसेट चलाने होते हैं। इन किसानों को मुफ्त बिजली मिल जाए तो उनकी राह आसान हो जाएगी।

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