जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर 5 KM तक ढह गई जमीन, बीच रास्ते में फंसे सैकड़ों वाहन; पढ़ें कब तक खुलेगा?
रविवार को जम्मू-कश्मीर के रामबन (Ramban Disaster) में बादल फटने के बाद से जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बुधवार को हाईवे आंशिक रूप से बहाल होने की संभावना है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत अभियान जारी है। वहीं बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 3 तीन लोगों की मौत हो गई है।

एजेंसी, जम्मू। जम्मू संभाग के रामबन में रविवार को बादल फटने की घटना के बाद जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पिछले तीन दिनों से बंद है।
इस पर अपडेट देते हुए केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर से लोकसभा सदस्य डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार को आंशिक रूप से बहाल होने की संभावना है और रामबन जिले में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत अभियान चलाया जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक्स पर कहा,
राहत अभियान जोरों पर है। प्रशासन सबसे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहा है। डीसी श्री बेसर चौधरी व्यक्तिगत रूप से प्रभावित क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। बिजली आपूर्ति बहाल की जा रही है। 1762 डीटी में से 1486 डीटी बहाल कर दी गई हैं और शेष 286 डीटी पर काम चल रहा है। जहां तक जलापूर्ति का सवाल है, 98 में से, डब्ल्यूएसएस 89 जलापूर्ति योजनाएं चालू कर दी गई हैं और शेष 9 योजनाओं पर बहाली का काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार तक आंशिक रूप से बहाल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन के साथ आगे के उपायों पर काम करने के लिए कल व्यक्तिगत रूप से जिला मुख्यालय रामबन में जाने की योजना बना रहा हूँ।
मंगलवार को लगातार तीसरे दिन, बड़े पैमाने पर भूस्खलन के बाद श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के इंजीनियरों ने कहा कि राजमार्ग 22 स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है और बहाली का काम जोरों पर चल रहा है।
बाढ़ और भूस्खलन से तीन लोगों की मौत
रामबन जिले में रविवार को अचानक आई बाढ़ के कारण हुए भूस्खलन में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोगों को बचाया गया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 4 से 5 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह बह गया और मलबे के नीचे कई वाहन दब गए।
सैकड़ों यात्री राजमार्ग पर फंसे हुए हैं, जबकि अधिकारियों ने फंसे हुए यात्रियों को आश्रय और भोजन उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला प्रतिकूल मौसम का सामना करते हुए राहत अभियान की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने और नुकसान का आकलन करने के लिए सोमवार को राजमार्ग पर काली मोड़ पहुंचे।
आपदा पर क्या बोले सीएम उमर अब्दुल्ला?
उन्होंने कहा कि नुकसान अधिक मात्रा में हुआ है। लेकिन यह आपदा स्थानीय स्तर पर हुई है और इसलिए इसे 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित नहीं किया जा सकता।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव राहत और सहायता प्रदान की जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र से प्रभावित परिवारों के लिए राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है।
इस बीच, डिवीजनल कमिश्नर (कश्मीर) वी.के. बिधूड़ी ने फिर से घाटी के लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें क्योंकि एक पखवाड़े तक चलने के लिए खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार है। लोग अपनी दैनिक आवश्यकता से कहीं अधिक पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए घाटी भर में पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगा रहे हैं।
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