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    ऑनलाइन गेम की लत ने बिगाड़ी सेहत खो बैठा सुध-बुध, जानलेवा साबित हो रहा पबजी गेम

    By Preeti jhaEdited By:
    Updated: Sat, 12 Jan 2019 09:33 AM (IST)

    mobile game, ऑनलाइन गेम बच्‍चों व युवा पीढ़ी को अपना शिकार बना रहे हैं। इनकी लत उनके लिए जानलेवा भी साबित होने लगी है। ...और पढ़ें

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    ऑनलाइन गेम की लत ने बिगाड़ी सेहत खो बैठा सुध-बुध, जानलेवा साबित हो रहा पबजी गेम

    जागरण संवाददाता, जम्मू । ऑनलाइन गेम बच्‍चों व युवा पीढ़ी को अपना शिकार बना रहे हैं। इनकी लत उनके लिए जानलेवा भी साबित होने लगी है। जम्मू में एक फिटनेस ट्रेनर भी ऑनलाइन गेम पबजी के चक्कर में सुध-बुध खो बैठा और स्‍वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। बाद में उसे चिकित्‍सक के पास ले जाया गया। फिलहाल उसकी सेहत सुधर रही है।

    हाल ही में सोशल साइट पर पबजी गेम काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह युवक भी लगातार इस गेम्स में ऐसा डूबा कि सुधबुध ही खो बैठा। गेम के लक्ष्य के लिए 99 स्कोर पाना आसान नहीं होता, लेकिन किशोरों का जुनून उनके दिलो दिमाग पर इस कदर हावी हो रहा है।

    जम्मू कश्मीर में यह फिटनेस ट्रेनर इस गेम की लत में फंसकर ऐसा खोया कि कई दिन तक लगातार उसी में डूबा रहा। उसके बाद बताया जा रहा है कि लक्ष्य को हासिल न कर पाने के कारण स्‍वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। परिजन उसे चिकित्‍सक के पास लेकर गए। जहां उसकी सेहत में सुधार हुआ है। अभी भी वह लत से पूरी तरह बाहर नहीं आया है।

    बच्चे की गतिविधि पर नजर रखें अभिभावक

    मनोरोग अस्पताल जम्मू में एचओडी डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि ऐसे खतरनाक गेम पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। अभिभावकों का भी दायित्व बनता है कि बच्चों पर नजर रखें। उनका बच्चा रात में क्या कर रहा है। पबजी गेम में बच्चा सोने का बहाना करता है, और जब सब सो जाते हैं तो गेम में कुछ और युवा जुड़ते जाते हैं। प्रतिस्पर्धा के इस युग में हार उन्हें बर्दाश्त नहीं होती जिससे उनकी जान पर बन आती है।

    क्‍यों खतरनाक है यह गेम

    यह गेम ऑनलाइन फ्री में उपलब्‍ध है और यह एक ऐसा बैटल ग्राउंड उपलब्‍ध करवाता है जिसमें स्‍वयं को बचाने के लिए जद्दोजहद चलती है। जैसे-जैसे खेल आग बढ़ता है इसके अनुसार रैंकिंग मिलती है। नतीजा किशोर व युवा इसमें बुरी तरह डूबने लगते हैं। इस गेम को खेलने वाले की मानसिकता ऐसी हो जाती है कि वह लक्ष्‍य माने में विफल रहने पर खुद को बुरी तरह मारता और पीटता है।

    कई बार गंभीर रूप से घायल हो जाता है। कई बार बेहोशी के आलम में भी चला जाता है। किशोर रात को ऑनलाइन होकर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन किशोरों को गेम में सिर्फ रैंकिंग चाहिए। गेम का मकडज़ाल उन्हें इस कदर अपनी गिरफ्त में ले रहा है कि कई तो बीमार होने लगे हैं। हालांकि चीन और कई देशों ने इस गेम पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन भारत में यह ऑनलाइन गेम काफी प्रचलित हो रहा है। इससे पहले ब्लू वेल गेम ने भी युवाओं को भटका दिया था। जिसमें देश के कई किशोर अपनी जान तक गंवा चुके हैं।