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उमर कैबिनेट विस्तार पर NC में बगावत के सुर, मुबारक गुल को मनाने पहुंचे फारूक; पर महासचिव पद लेने को तैयार नहीं नेता

Published: Tue, 27 Oct 2026 02:45 PM (IST)

उमर मंत्रिमंडल विस्तार से NC में असंतोष उभरा, जिससे कई वरिष्ठ विधायक मंत्री पद न मिलने से नाराज हैं। पार्टी ...और पढ़ें

मुबारक गुल के साथ फारूक अब्दुल्ला। (फोटो- इंटरनेट मीडिया)

मुबारक गुल के साथ फारूक अब्दुल्ला। (फोटो- इंटरनेट मीडिया)

HighLights

  1. उमर कैबिनेट विस्तार से नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष उभरा।

  2. वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल मंत्री पद न मिलने से दुखी।

  3. फारूक अब्दुल्ला ने नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश की।

नवीन नवाज, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही नेशनल कान्फ्रेंस के भीतर का असंतोष भी सामने आया। मंगलवार को चार नए मंत्रियों की ताजपोशी के साथ ही मंत्री बनने की उम्मीद में बैठे कई वरिष्ठ विधायक मायसू हो गए। बेशक उन्होंने पार्टी नेतृत्व के फैसले को मान्य बताया, लेकिन उनके समर्थकों का गुस्सा पार्टी मुख्यालय में नारेबाजी के रूप में फूट पड़ा। हालात संभालने के लिए पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डा फारूक अब्दुल्ला को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।

सात बार के विधायक मुबारक गुल को संगठन का महासचिव नियुक्त कर उन्होंने असंतोष पर मरहम लगाने की कोशिश की। हालांकि, इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर वरिष्ठता, राजनीतिक योगदान और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है।

अनुभवी चेहरों पर उमर का भरोसा

16 अक्टूबर 2024 को सत्ता संभालने वाले उमर अब्दुल्ला के लिए मंत्रिमंडल विस्तार महज चार नए मंत्रियों को शामिल करने की कवायद नहीं था। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करने, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने और सरकार को समर्थन दे रहे विधायकों की अपेक्षाओं को साधने की चुनौती भी थी।

मंत्री पद की दौड़ में नेशनल कान्फ्रेंस के कई दिग्गजों के अलावा निर्दलीय विधायक भी उम्मीद लगाए बैठे थे। इनमें बशीर अहमद वीरी, अब्दुल मजीद लारमी, अल्ताफ अहमद कालू, हसनैन मसूदी, हिलाल अकबर लोन, सज्जाद शफी, नजीर गुरेजी, फारूक शाह, जावेद मिर्चल, मुबारक गुल, सलमान सागर, तनवीर सादिक, डा. मोहम्मद शफी वानी और अली मोहम्मद डार समेत कई नाम शामिल थे। पुंछ के एजाज जान और रामबन के अर्जुन सिंह राजू भी मंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए थे।

उमर अब्दुल्ला ने विवाद सीमित रखने के लिए पहली बार विधायक बने किसी नेता को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया। इसके बावजूद कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर नहीं हो सकी। मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से उनकी राजनीतिक अपेक्षाओं को झटका लगा और समर्थकों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया।

'30 बार शपथग्रहण में शामिल, खुद मंत्री बनने का मौका कभी नहीं मिला'

श्रीनगर के ईदगाह विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक चुने गए मुबारक गुल ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, 'मैं बेहद दुखी हूं। आखिर हर बार मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है? पहले भी मुझे मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया और इस बार भी वही हुआ। करीब 30 बार शपथग्रहण समारोहों में शामिल हुआ हूं, लेकिन खुद मंत्री के तौर पर शपथ लेने का मौका कभी नहीं मिला।'

गुल की इस प्रतिक्रिया में वर्षों की राजनीतिक सक्रियता के बावजूद अपेक्षित अवसर न मिलने की कसक साफ झलकी। उनके समर्थकों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी मुख्यालय में नारेबाजी की। इससे नेतृत्व के सामने असंतोष को तत्काल शांत करने की चुनौती खड़ी हो गई।

‘वरिष्ठता, ईमानदारी और वफादारी के बावजूद नहीं मिला मौका’

दक्षिण कश्मीर के विधायक अब्दुल मजीद लारमी भी मंत्री पद नहीं मिलने से आहत नजर आए। उन्होंने कहा, 'मैं भी इंसान हूं, मुझे भी दुख होता है। मुझे उम्मीद थी कि मेरी वरिष्ठता, ईमानदारी और पार्टी के प्रति वफादारी को देखते हुए इस बार मुझे जिम्मेदारी दी जाएगी। कल शाम तक ही नहीं, मंगलवार सुबह तक भी मुझे भरोसा था कि शपथ लेने के लिए बुलावा आएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।'

लारमी ने हालांकि नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने और पार्टी के लिए काम जारी रखने की बात कही। उनका कहना था कि निराशा अपनी जगह है, लेकिन इससे पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा प्रभावित नहीं होगी। उनके बयान ने उन वरिष्ठ नेताओं की मनोदशा सामने रखी, जो वर्षों की राजनीतिक सेवा के बाद भी मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रह गए।

फारूक ने संभाला मोर्चा

पार्टी मुख्यालय में नारेबाजी और विधायकों की नाराजगी के बीच फारूक अब्दुल्ला ने खुद हस्तक्षेप किया। उन्होंने असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर उन्हें शांत करने और भविष्य में बेहतर अवसर मिलने का भरोसा दिलाने की कोशिश की।

मुबारक गुल के साथ करीब 15 मिनट की बातचीत के बाद उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया। इस कदम को नाराज वरिष्ठ नेता को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर संतुष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 

महासचिव पद लेने को तैयार नहीं नेता मुबारक गुल 

नेशनल कान्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और ईदगाह के विधायक मुबारक गुल ने पार्टी महासचिव बनाए जाने के फैसले को अभी तक स्वीकार नहीं किया है। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज समर्थक उन पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, ईदगाह के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पिछले 40 वर्षों से पार्टी को क्षेत्र में जीत दिलाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि मुबारक गुल को अब भी मंत्री पद नहीं मिलता, तो फिर कब मिलेगा? मंत्रिमंडल विस्तार में गुल को जगह नहीं दिए जाने से उनके समर्थकों में नाराजगी है।

फारूक ने अन्य नाराज विधायकों से भी संपर्क साधा

फारूक ने अन्य नाराज विधायकों से भी संपर्क साधा और उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारियों की संभावना से अवगत कराया। नेतृत्व की कोशिश साफ है मंत्रिमंडल से बाहर रह गए नेताओं की नाराजगी को संगठनात्मक भूमिका देकर सीमित किया जाए और पार्टी की एकजुटता पर उठ रहे सवालों को थामा जाए।

वहीं, शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्री सकीना इट्टू ने पार्टी में मतभेदों की बात खारिज करते हुए कहा कि कुछ साथियों का मायूस होना स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी का हित सर्वोपरि है। उन्होंने दावा किया कि नेता, कार्यकर्ता और मंत्री सभी एकजुट हैं

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