लद्दाख संगठन गृह मंत्रालय की बैठक के इंतजार में, एक बार फिर धरने-प्रदर्शन की रणनीति पर हो सकता है गौर
लद्दाख के संगठन क्षेत्रीय मुद्दों पर गृह मंत्रालय की बैठक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई, जिस ...और पढ़ें

अब तक गृह मंत्रालय ने लद्दाख के मुख्य मुद्दों पर बातचीत नहीं की है।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के संगठन नए साल में क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर गृह मंत्रालय की बैठक के लिए निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं। गत वर्ष अक्टूबर माह में बातचीत शुरू तो हुई थी लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई।
दिल्ली में गृह मंत्रालय की हाइ पावर कमेटी की बैठक न होने से क्षेत्रीय संगठनों में असंतोष है। नए साल में लेह अपेक्स बाडी व कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस को बड़ी उम्मीदें हैं कि केंद्र सरकार राज्य दर्जे, संविधान की छठी अनुसूची जैसे मुद्दों पर बातचीत शु़रू करेगा। अब तक गृह मंत्रालय ने लद्दाख के मुख्य मुद्दों पर बातचीत नहीं की है।
बैठक ने बुलाएं जाने से लद्दाख के संगठन में रोष के स्वर उठ रहे हैं। ऐसे में जल्द बैठक में बातचीत के केंद्र सरकार पर दवाब बनाने की रणनीति तय होगी। वहीं जल्द बैठक न होने के स्थिति में धरने, प्रदर्शन की रणनीति पर भी गौर किया जा सकता है।
क्षेत्रीय संगठनों ने करीब एक महीने पहले भेजा था ड्राफ्ट
गृह मंत्रालय के निर्देश पर इन मुद्दों पर बातचीत के लिए क्षेत्रीय संगठनों ने करीब एक महीने पहले ड्राफ्ट भी भेजा था। अब दिल्ली में होने वाली बैठक अहम होगी।ऐसे में आने वाले दिनों में लेह अनेक्स बाडी व कारगिल डेमोेक्रेटिक अलायंस बैठक कर क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
कारगिल डेमोेक्रेटिक पार्टी अलायंस के पदाधिकारी सज्जाद कारगिली का कहना है कि हमने दिसंबर महीने में बैठक बुलाए जाने की उम्मीद लगाई थी। लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से इस दिशा में उचित कार्रवाई नही की जा रही है। ऐसे में हमारे मुद्दों को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल पैदा हो रहे हैं। लद्दाख के लोगों ने दिल्ली में बैठक से बड़ी उम्मीद लगाई हैं। केंद्र सरकार को लोगों के संयम की परीक्षा न लेते हुए उनके उम्मीदें पूरा होने की दिशा में गंभीरता दिखानी चाहिए।
केंद्र सरकार ने अब तक यह लिए फैसले
केंद्र सरकार ने अब तक लद्दाखियों के लिए 95 प्रतिशत नौकरियां आरक्षित करने, महिलाओं को स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने व भोती भाषा को अधिकारिक भाषा का दर्जा देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि राजपत्रित पदों पर लद्दाखियें की भर्ती शुरू होगी।
अब लद्दाखी मुख्य मुद्दों के समाधान की उम्मीद लगाए हैं। ऐसे में अब अगली बैठक में लद्दाख के संगठनों के प्रतिनिधि पूरी कोशिश करेंगे कि छठी अनुसूची, राज्य के दर्जा, अलग लोक सेवा आयोग व लोकसभा की दो सीटें जैसी लद्दाखियों की जायज मांगों को पूरा करने की दिशा में कार्रवाई हो। इसके साथ सितंबर महीने के हिसंक प्रदर्शनों के बाद पकड़े गए सोनम वांगचुक व अन्य लद्दाखियों की रिहाई का मुद्दा भी जोरशो से उठना है।
वर्ष 2024 में लद्दाख के संगठनों से केंद्र सरकार की बातचीत में गतिरोध आ गया था। वहीं गत वर्ष सितंबर में हिसंक प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत के बाद केंद्र सरकार के न्यायिक जांच की घोषणा के बाद अक्टूबर माह में बातचीत शुरू हुई थी।

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