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    फन ट्रैक समझ हल्के में न लें चादर ट्रैक को, जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

    By Rahul SharmaEdited By:
    Updated: Mon, 07 Jan 2019 05:17 PM (IST)

    लद्दाख प्रशासन ने ट्रैकिंग पर जाने वाले सभी पर्यटकों व स्थानीय ट्रैकरों का हेल्थ इंशोरेंस भी अनिवार्य कर दिया है। इसके बिना उन्हें ट्रैक पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    फन ट्रैक समझ हल्के में न लें चादर ट्रैक को, जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

    जम्मू, राहुल शर्मा। प्रकृति की बनाई किसी भी सरंचना को कभी भी हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि ट्रैकिंग के शौकीन लोगों का चादर ट्रैक की ओर काफी रुझान बढ़ा है। परंतु ट्रैक से संबंधित पूरी जानकारी न होने के कारण पिछले कुछ सालों के दौरान दुर्घटनाओं का ग्राफ भी बढ़ा है। एक दर्जन से अधिक लोग इस ट्रैक पर अपनी जान गंवा चुके हैं। जिला प्रशासन ने ट्रैक की लोकप्रियता को कायम रखने और यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को मद्देनजर रख जनवरी व फरवरी में इस ट्रैक को खोलने की अनुमति दी है। चादर ट्रैक पर जाने से पहले ट्रैकर को परमिट हासिल करना होगा। उसके लिए चार दिन की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

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    ट्रैकिंग पर जाने वालों का होगा हेल्थ इंशाेरेंस

    लद्दाख प्रशासन ने ट्रैकिंग पर जाने वाले सभी पर्यटकों व स्थानीय ट्रैकरों का हेल्थ इंशोरेंस भी अनिवार्य कर दिया है। इसके बिना उन्हें ट्रैक पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यही नहीं उन्हें अपने स्वास्थ्य की जांच भी करवानी होगी। लेह पहुंचने पर सबसे पहले पर्यटक होटल में कमरा लेंगे। एक दिन विश्राम करने के बाद तीसरे दिन पर्यटकों को अपने एयरलाइन बोर्डिंग पास के साथ स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपने स्वास्थ्य की जांच करवानी होगी। इसके लिए सीएमओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हेल्ट सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद ट्रैकर को परमिट दिया जाएगा और अगले दिन वह ट्रैकिंग पर जा सकता है। पर ट्रैकिंग ग्रुप के साथ गाइड का होना भी जरूरी है।

    चिलिंग गांव से शुरू होती है ट्रैक की शुरूआत

    चादर ट्रैक लेह से सत्तर किलोमीटर दूर चिलिंग गांव से शुरू होता है। यहीं सिंधु और जंस्कार नदी का संगम भी होता है। चिलिंग के गांव की खोज नेपाली तांबे के कारीगर ने की थी। कारीगर अब भी इस गांव में रहते हैं जो होमस्टे चलाते हैं। चिलिंग से चालीस किलोमीटर दूर नेरक या फिर सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूर पदुम तक ट्रैकिंग की जाती है। पदुम तक आना-जाना 200 किलोमीटर से ज्यादा होता है। ज्यादातर लोग नेरक तक जाते हैं जो आना-जाना 80 किलोमीटर के आसपास है। हफ्ते की लंबी अवधि के लिए ट्रैकर इस दौरान विभिन्न गांवों को छूते हुए जांस्कर घाटी तक पहुंचते हैं। पर्यटक नदी पर घूमते हुए मौसम का लुत्फ भी उठाते हैं। आमतौर पर लोग इस पर 16 किमी तक प्रतिदिन ट्रैकिंग करते हैं और हफ्ते भर में इसे पार करते हैं। गर्मियों में इसी जंस्कार नदी पर सैलानी रिवर राफ्टिंग का आनंद लेने भी आते हैं। 

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