कश्मीर में महिलाओं को हुनर दे आत्मनिर्भर बना रहीं शाहीन, लुप्त हो रहे आरी वर्क को जिंदा रखने का उठाया है बीड़ा
शाहीन ने कहा मैं एक मध्य वर्ग परिवार से हूं। आज परिवार के हर सदस्य को आत्मनिर्भर होना चाहिए। मैं आज इतना कमा लेती हूं कि अपने घर का खर्च उठा सकूं। मैं ...और पढ़ें

श्रीनगर, रजिया नूर : कश्मीर में हस्तकला से जुड़े कारीगरों का कोई सानी नहीं। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के गोपालपोरा गांव की रहने वाली 42 वर्षीय शाहीन अख्तर शाल पर खूबसूरत कढ़ाई (आरी वर्क) कर केवल खुद के लिए ही रोजगार नहीं कमा रहीं, बल्कि अन्य जरूरतमंद महिलाओं को भी निश्शुल्क यह हस्तकला सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
शाहीन कश्मीर के साथ देशभर में कई जगह प्रदर्शनी भी लगा चुकी हैं। शाहीना ने अब शाल पर कुरान की एक आयत की कढ़ाई की है। शाहीन ने कहा कि उनका मकसद लोगों को इस हस्तकला की तरफ आकर्षित कर इसे जिंदा रखना है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी शाहीन के इस काम और महिलाओं को यह हस्तकला सिखाने की सराहना कर चुके हैं।
शाहीना ने कहा, शाल पर कढ़ाई करने का मुझे बचपन से ही शोक था। मैंने मेरी सहेली की मां से इस हस्तकला को सीखा। मेरे स्वजन चाहते थे कि मैं कुछ और करूं, उनका कहना था कि इस काम में अब कोई भविष्य नहीं रह गया है, क्योंकि आरी वर्क से जुड़े कारीगर भी इसे छोड़ दूसरे काम कर रहे हैं, लेकिन मैंने ठान लिया कि इसे सीखकर रहूंगी। इसके बाद परिवार ने भी मेरा साथ दिया और शादी के बाद भी मैंने इसे जारी रखा।
म्यूजियम में रखा जाए यह शाल : शाहीन ने कहा, शाल पर कुरान की एक आयत की कढ़ाई करने में मुझे 12 दिन लगे। यह कढ़ाई करने का मेरा मकसद लोगों को इस हस्तकाल की तरफ फिर से आकर्षित करना था। शाहीना ने कहा, मैं चाहती हूं कि मेरा यह शाल किसी म्यूजियम में रखा जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें।
थोड़ा नयापन लाकर जोड़ सकते हैं युवा पीढ़ी को : शाहीना ने कहा, आरी वर्क हमारे कश्मीर की एक मशहूर हस्तकला है। आज से 30-40 वर्ष पहले लाखों लोग इस हस्तकला के माध्यम से अपना रोजगार कमाते थे, लेकिन आज हमारी यह हस्तकला जैसे लुप्त हो रही है और लोग विशेषकर युवा पीढ़ी इससे दूर होती जा रही है। अगर हम अपनी पारंपरिक हस्तकलाओं में थोड़ा सा नयापन लाएं तो हम इसकी तरफ युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं। मैंने अपनी तीनों बेटियों को भी यह कला सिखाई है।
अन्य महिलाओं के रोजगार का भी बनी रही माध्यम : शाहीन ने कहा, मैं एक मध्य वर्ग परिवार से हूं। आज परिवार के हर सदस्य को आत्मनिर्भर होना चाहिए। मैं आज इतना कमा लेती हूं कि अपने घर का खर्च उठा सकूं। मैं चाहती हूं कि मेरी तरह बाकी जरूरतमंद महिलाएं भी इस हस्तकला से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें। मुझे काफी महिलाएं फोन कर यह हस्तकला सीखने की इच्छा जताती हैं। मैं उन्हें निश्शुल्क सिखा रही हूं। अभी तक मैं अपने क्षेत्र की 20 महिलाओं को यह काम सिखाकार उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर चुकी हूं। अभी यह अभियान जारी है।

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