Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    जम्मू कश्मीर में पहली बार छीना भाषा की पाठ्यपुस्तकें जारी, मातृभाषा शिक्षा को बढ़ावा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 12:08 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने पहली और दूसरी कक्षा के लिए छीना भाषा की पाठ्यपुस्तकें जारी की हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और एनसीएफ ...और पढ़ें

    Hero Image

    जम्मू कश्मीर में पहली बार छीना भाषा की पाठ्यपुस्तकें जारी, मातृभाषा शिक्षा को बढ़ावा

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन ने छीना भाषा की कक्षा पहली और दूसरी के लिए पहली बार पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन की घोषणा की है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और फाउंडेशनल स्टेज के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2022 के अनुरूप है, जो मातृभाषा आधारित, बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शिक्षा पर जोर देता है। छीना भाषा की ये पाठ्यपुस्तकें मुद्रित कर आवश्यकतानुसार विद्यालयों में वितरित भी कर दी गई हैं, ताकि कक्षा शिक्षण में समय पर इनका उपयोग सुनिश्चित हो सके।

    छीना भाषा की पाठ्यपुस्तकों की शुरुआत को बोर्ड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसके माध्यम से छीना भाषी बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा मिलेगी, जिससे उनकी बुनियादी साक्षरता, संज्ञानात्मक विकास और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूती मिलेगी।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पना को करती है साकार

    एनसीएफ- 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार की गई इन पाठ्यपुस्तकों में खेल-आधारित, गतिविधि-केंद्रित और बाल-केन्द्रित शिक्षण पद्धति अपनाई गई है। पाठ्य पुस्तकें उम्र के अनुकूल है और सुनने, बोलने, प्रारंभिक पढ़ने व लिखने के कौशल के विकास पर केंद्रित है, जो स्थानीय संस्कृति से जुड़ी आनंददायक और अर्थपूर्ण शिक्षा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पना को साकार करती है।

    बोर्ड ने जम्मू-कश्मीर की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रमों की शुरुआत, संशोधन और मानकीकरण के माध्यम से बोर्ड भावी पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण के लिए प्रयासरत रहा है। छीना भाषा की पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन भाषाई समावेशन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम है।

    यह केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने, भाषाई पहचान को मान्यता देने और बहुभाषी शिक्षा संबंधी राष्ट्रीय नीतियों को कक्षा स्तर पर लागू करने का प्रयास है, विशेषकर जम्मू-कश्मीर के छीना भाषी समुदायों के लिए। इस अवसर पर बोर्ड ने पाठ्यपुस्तक विकास समिति के प्रयासों की सराहना की, जिसकी अगुवाई कश्मीर विश्वविद्यालय के मसूद- ए- समून और प्रो. मुशाविर अहमद ने की। समिति के विद्वतापूर्ण मार्गदर्शन और सूक्ष्म समीक्षा से पाठ्यपुस्तकों में शैक्षणिक गुणवत्ता और भाषाई प्रामाणिकता सुनिश्चित की गई है।