अनंतनाग: हत्या मामले में तीन महिलाओं को हाईकोर्ट से मिली जमानत, निचली अदालत के फैसले को पलटा
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अनंतनाग के 2023 के एक हत्या मामले में तीन महिलाओं को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत महिलाओं को गैर-जमा ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अनंतनाग जिले के 2023 के एक मर्डर केस में आरोपी तीन महिलाओं को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट गैर-जमानती अपराधों में आरोपी महिलाओं को जमानत देने के लिए कानून के प्रावधान पर ठीक से विचार करने में नाकाम रहा।
पीड़ित की मौत के बाद बढ़ा मामला
जस्टिस राहुल भारती ने चेरी पंजगाम, कोकरनाग की रहने वाली सलीमा बानो, रेशमा और रुबीना की जमानत याचिका मंजूर कर ली। ये तीनों उन 14 लोगों में शामिल थीं, जिनके नाम पुलिस स्टेशन लरनू में FIR दर्ज थे। शुरू में यह FIR धारा 451, 341, 506, 323, 427, 147, 148, 307 के तहत दर्ज की गई थी और बाद में घायल पीड़ित की मौत के बाद इसमें धारा 302 IPC भी जोड़ी गई।
जांच के बाद, पुलिस ने 15 सितंबर, 2023 को 14 आरोपियों के खिलाफ धारा 506, 323, 427, 336, 447, 147, 148, 149, 307 और 302 IPC के तहत चालान पेश किया। शुरू में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि पांच - जिनमें ये तीनों महिलाएं भी शामिल थीं, फरार दिखाए गए थे।
2024 में गिरफ्तार हुईं तीनों महिलाएं
इन तीनों महिलाओं को बाद में जनवरी और मई 2024 में गिरफ्तार किया गया और वे विचाराधीन कैदी के तौर पर न्यायिक हिरासत में रहीं। दो अन्य आरोपी मुश्ताक अहमद अवान और बेगम जान अभी भी फरार हैं और उनके खिलाफ धारा 229 CrPC के तहत कार्रवाई की गई है।
अनंतनाग के प्रिंसिपल सेशंस जज ने अक्टूबर और नवंबर 2024 में अलग-अलग तारीखों पर एक ही आदेश में याचिकाकर्ताओं की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसमें अपराध की गंभीरता और जांच के दौरान उनके आचरण का हवाला दिया गया था।
HC द्वारा ट्रायल कोर्ट का फैसला खारिज
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के रवैये को खारिज करते हुए, कहा कि निचली अदालत ने धारा 437(1) CrPC के प्रावधान की अनिवार्य भावना को नजरअंदाज किया, जो विशेष रूप से अदालतों को गैर-जमानती अपराधों में भी महिलाओं को जमानत देने का अधिकार देता है।
व्यक्तिगत भूमिकाओं का जिक्र नहीं: HC
जस्टिस भारती ने कहा कि FIR और चार्जशीट में सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं, जिसमें आरोपी महिलाओं की व्यक्तिगत भूमिकाओं का जिक्र नहीं है। इसके अलावा, अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार लाठियां थीं, और महिलाओं की सटीक भूमिका साफ़ तौर पर नहीं बताई गई थी।
शिकायतकर्ता सहित कई अहम और चश्मदीद गवाहों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा कम हो गया है।
कोर्ट ने निजी परिस्थितियों पर दिया ध्यान
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की निजी परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा, "इनमें से एक महिला बच्चे को दूध पिलाने वाली मां है और तीनों के छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र तीन से आठ साल के बीच है। याचिकाकर्ता सलीमा के पति भी इसी मामले में जेल में हैं।"
एक खास तौर पर दुखद परिस्थिति में, कोर्ट ने दर्ज किया कि सलीमा ने जेल में रहने के दौरान एक डूबने की घटना में अपने आठ साल के बेटे को खो दिया था, और न तो उसे और न ही उसके पति को बच्चे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाज़त दी गई थी।
हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ दी जमानत
जमानत याचिका मंजूर करते हुए, कोर्ट ने तीनों महिलाओं को 50,000 रुपये के निजी और जमानती बॉन्ड जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया, इस शर्त पर कि वे ट्रायल कोर्ट की पहले से इजाजत के बिना जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से बाहर नहीं जाएंगी। वे गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगी या चल रहे ट्रायल को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी, ऐसा न करने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
याचिकाकर्ताओं/अपीलकर्ताओं की ओर से एडवोकेट एस ए हाशमी पेश हुए, जबकि केंद्र शासित प्रदेश की ओर से सरकारी वकील इलियास लवाय पेश हुए।

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