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    जम्मू-कश्मीर में कैसे होगा पर्यावरण संरक्षण, LPG वाहनों ने दम तोड़ा, अब CNG भी नहीं हो रहे प्रोत्साहित, जानिए वजह

    By LALIT KUMAREdited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 02:34 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावे जमीनी स्तर पर विफल दिख रहे हैं। वाहनों से बढ़ते प्रदूषण के बावजूद, ग्रीन फ्यूल (LPG, CNG) को प्रोत्सा ...और पढ़ें

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    सरकार सीएनजी पर वसूले जाने वाले वैट में कमी करके इसे सस्ता कर सकती है।

    ललित कुमार, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकारी स्तर पर बातें और दावें तो बहुत हाेते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे जिससे खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    देश के अन्य व्यस्त शहरों की तरह ही प्रदेश की दोनों राजधानियों में इस समय प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों की बढ़ती संख्या है। ऐसे में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए देश भर में प्रयास हो रहे हैं और ग्रीन फ्यूल को हर तरफ प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    देश के अन्य हिस्सों की तरह प्रदेश में भी पहले एलपीजी वाहनों को प्रोत्साहित किया गया और उसके बाद बीते वर्ष सीएनजी वाहन भी लाए गए लेकिन जमीनी स्तर पर इन वैकल्पिक इंधनों को प्रोत्साहित न किए जाने से ये वाहन कभी रफ्तार नहीं पकड़ पाए।

    एलपीजी फिलिंग स्टेशन भी बंद हो गए

    जम्मू की बात करें तो यहां करीब दो दशक पूर्व दो एलपीजी फिलिंग स्टेशन स्थापित हुए थे। एक फिलिंग स्टेशन गांधी नगर हाईवे पर और दूसरा नगरोटा हाईवे पर। पेट्रोल-डीजल से करीब आधे दामों पर यह इंधन उपलब्ध होने से एलपीजी वाहनों की बिक्री भी बढ़ी लेकिन समय रहते ऐसे वाहनों को प्रोत्साहित नहीं किया गया जिससे जम्मू शहर का एकमात्र फिलिंग स्टेशन बंद हो गया।

    अब बीते वर्ष जम्मू शहर में गांधी नगर हाईवे पर ही कला केंद्र के निकट पहला सीएनजी फिलिंग स्टेशन खुला। फिलिंग स्टेशन स्थापित होने से आटोमोबाइल कंपनियों ने जम्मू में अपने सीएनजी वाहन भी उतारें लेकिन प्रदेश में सीएनजी काफी महंगा होने के कारण आज तक इन वाहनों की बिक्री रफ्तार नहीं पकड़ पाई और आज ये फिलिंग स्टेशन सिर्फ अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को इंधन उपलब्ध करवाने तक ही सीमित होकर रह गया है।

    आज जम्मू में व्यवसायिक वाहन चालक डीजल से सीएनजी पर शिफ्ट तो करना चाहते हैं लेकिन यहां पर सीएनजी के दाम भी डीजल के बराबर होने से वे ऐसा नहीं कर रहे जबकि पड़ोसी राज्यों में सीएनजी के दाम काफी कम है क्योंकि वहां की सरकारों ने सीएनजी पर न्यूनतम वैट लागू किया है।

    प्रदेश वैट दाम प्रति किलो

    • जम्मू-कश्मीर 21 प्रतिशत 98 रुपये
    • पंजाब 3 प्रतिशत 87.58 रुपये
    • दिल्ली शून्य 77 रुपये
    • हरियाणा 5 प्रतिशत 86.30 रुपये
    • उत्तर प्रदेश 12.5 प्रतिशत 94 रुपये
    • हिमाचल प्रदेश 13.7 प्रतिशत 90.48 रुपये
    • राजस्थान 7.5 प्रतिशत 91.90 रुपये

    जम्मू-कश्मीर में पड़ोसी राज्यों से कई गुणा अधिक है सीएनजी पर वैट

    देश के अन्य हिस्सों में सीएनजी वाहनों को इसलिए अपनाया गया क्योंकि ये प्रदूषण मुक्त होने के साथ इनका संचालन सस्ता था। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन आधारित है, लिहाजा यहां व्यवसायिक वाहनों की संख्या काफी अधिक है। आज अगर इन टैक्सी चालकों को सस्ता इंधन मिले तो वे तत्काल शिफ्ट कर ले लेकिन हमारे यहां सीएनजी पर 21 प्रतिशत वैट है जो देश में सबसे अधिक है। अब जब वाहन चालकों को कोई लाभ ही नहीं दिख रहा तो वे इस इंधन पर शिफ्ट क्यों करेंगे? यह तो सरकार को सोचना चाहिए कि लोगों को ग्रीन फ्यूल की तरफ कैसे प्रोत्साहित करें।

    -संजय अग्रवाल, चेयरमैन फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन

    नई नीति को दिया जा रहा अंतिम रूप

    प्रदेश में इलेक्ट्रिक एंड ग्रीन फ्यूज संचालित वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से नई नीति तैयार की जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सुविधाएं व रियायतें दिए जाने की तैयारी है। इसी नीति के तहत सीएनजी जैसे ग्रीन फ्यूल को भी बढ़ावा मिल सकता है और सरकार सीएनजी पर वसूले जाने वाले वैट में कमी करके इसे सस्ता कर सकती है।