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    जम्मू-कश्मीर में डिग्री कॉलेजों की यह है स्थिति, 63 से अधिक कॉलेज इंचार्ज प्रिंसिपल के सहारे

    By Satnam Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 06:19 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में 60 से अधिक डिग्री कॉलेज इंचार्ज प्रिंसिपल के भरोसे चल रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग इस साल स्थायी प्रिंसिपल नियुक्तियों की उम्मीद कर रहा ...और पढ़ें

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    उच्च शिक्षा विभाग का लक्ष्य मौजूदा कॉलेजों की इमारतों को पूरा करना और नए कोर्स शुरू करना है।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में साठ से अधिक डिग्री कालेजों को इंचार्ज प्रिंसिपल के सहारे चलाया जा रहा है। इस साल उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से प्रिंसिपल के पदों पर स्थायी नियुक्तियां की उम्मीद है।

    उच्च शिक्षा विभाग प्रिंसिपल के पद जम्मू कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन को नए साल में रेफर करेगा। उसके बाद कमीशन की तरफ से इंटरव्यू की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करके 63 कालेजों के प्रिंसिपल की जिम्मेदारी इस समय एसोसिएट प्रोफेसर को सौंपी है।

    प्रदेश में 143 डिग्री कालेज हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के डिग्री कालेजों में इमारतों को पूरा करने की दिशा में काम होगा। जम्मू कश्मीर में साल 2018 में पचास नए डिग्री कालेज खोले गए थे। इनमें प्रिंसिपल की नियुक्तियां इंचार्ज प्रिंसिपल के तौर पर गई। कुछ तबादले करके पुराने प्रतिष्ठित कालेजों के प्रिंसिपल को भेजा गया ताकि कामकाज को सुचारू रूप से चलाया जाए।

    एसोसिएट प्रोफेसर के सहारे चल रहे दूरदराज के कॉलेज

    इस समय जम्मू, श्रीनगर व अन्य शहरों में तो स्थायी प्रिंसिपल हैं लेकिन दूरदराज व ग्रामीण इलाकों में खुले कई डिग्री कालेजों में प्रिंसिपल न होने के कारण एसोसिएट प्रोफेसर को इंचार्ज प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उच्च शिक्षा विभाग इस साल प्रिंसिपल के पद जम्मू कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन को रेफर करने जा रहा है ताकि पदों को भरा जाए। इससे कामकाज में और बेहतरी आएगी।

    बीस से अधिक डिग्री कालेज हैं जो किराए की इमारतों, नजदीकी हायर सेकेंडरी स्कूलों या पंचायत घरों आदि में चल रहे  है। इमारतों का निर्माण कार्य शुरु हो चुका है। इस साल अधिकतर कालेजों की इमारतों के पूर होने की उम्मीद जताई गई  है।

    सरकार की कोशिश कोई नया कालेज न खोल कर पहले से स्थापित कालेजों की इमारतों को पूरा करने, ढांचागत सुविधाएं जुटाई जाएं। कालेजों में नए कोर्स शुरु किए जाएं। कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कोर्स शुरु किए जाएं। कालेजों में विभिन्न विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर पद भरने की प्रक्रिया भी चल रही है।