Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    जम्मू कश्मीर के कालेजों में कम हुई विद्यार्थयों की रुची, 100 से अधिक डिग्री कालेजों खाली रह गई 20 हजार से अधिक सीटें

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:19 PM (IST)

    जम्मू कश्मीर के डिग्री कॉलेजों में अंडर ग्रेजुएट की 20 हजार से अधिक सीटें खाली हैं खासकर ग्रामीण इलाकों में। सीयूईटी-यूजी के कारण कई छात्रों ने बाहरी राज्यों का रुख किया। प्रोफेसरों और विशेषज्ञों का मानना है कि सीयूईटी-यूजी को समाप्त करके बारहवीं कक्षा के आधार पर ही दाखिले होने चाहिए।

    Hero Image
    राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में प्लानिंग का अभाव भी एक कारण है।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, जम्मू। जम्मू कश्मीर के डिग्री कालेजों में अंडर ग्रेजुएट की बीस हजार से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। जम्मू शहर व श्रीनगर शहर, जिला मुख्यालयों के मुकाबले में ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में सीटें अधिक खाली है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    जम्मू कश्मीर में कुल 143 डिग्री कालेज हैं। इस बार सीटों को भरने के लिए करीब एक सौ कालेज नान-सीयूईटी घोषित किए गए थे लेकिन इसके बावजूद सीटें नहीं भरी गई। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कालेजों के लिए केंद्रीयकृत सिस्टम को लागू करते हुए समर्थ पोर्टल के जरिए दाखिले किए।

    सीटों के बचने के कारण आखिरी तिथि को 31 अगस्त तक किया है। इसमें विद्यार्थियों को मौका दिया गया है। बढ़ी संख्या में विद्यार्थियों का रुख पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तराखंड की तरफ रहा। शहर के बाहरी इलाकों के कई कालेजों में कुल एक सौ दाखिले भी नहीं हुए है।

    यह भी पढ़ें- जिला ऊधमपुर में भारी बारिश व बाढ़ के कारण जलशक्ति विभाग की 148 परियोजनाओं को पहुंचा नुकसान, पानी के लिए मचा हाहाकार

    कई ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्होंने बारहवीं कक्षा में बहुत अच्छे अंक हासिल किए लेकिन जब सीयूईटी-यूजी दिया तो उसमें अंक कम आए। ऐसे कई विद्यार्थियों ने बाहरी राज्यों का रुख कर लिया है।

    एक सौ से अधिक डिग्री कालेजों में सीटें खाली

    आज हालत यह है कि 56 विषयों में एक सौ से अधिक डिग्री कालेजों में सीटें खाली हैं। इनमें एंथरापोलाजी, बायोकेमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, बाटनी, केमिस्ट्री, कामर्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, डिजाइन योर डिग्री, इकोनामिक्स, एजुकेशन, राजनीति विज्ञान, इलेक्ट्रानिक्स, इंग्लिश, फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जियोग्राफी, जियोलॉजी, होटल मैनेजमेंट, इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी, फिजिक्स आदि सभी प्रमुख विषय शामिल हैं।

    यह मेन विषय है जिनको हासिल करने के लिए किसी समय में विद्यार्थियों में होड़ लगी रहती थी। जब बारहवीं कक्षा के आधार पर कालेजों में दाखिले होते थे तो साइंस विषयों में बहुत प्रतिस्पर्धा होती थी। कई बार तो विद्यार्थियों को दाखिले न मिलने के कारण प्रदर्शन करते पड़ते थे।

    यह भी पढ़ें- उत्तर रेलवे ने लिया फैसला, 31 अगस्त को जम्मू में ठप रहेगा रेल यातायात, 51 ट्रेनें रद, 3 ट्रेनें शार्ट-ओरिजिनेट की

    सीयूईटी-यूजी लागू करने के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई

    जम्मू कश्मीर कालेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान प्रो. राजीव जसरोटिया का कहना है कि जम्मू कश्मीर में सीयूईटी-यूजी लागू करने के कारण ही यह स्थिति पैदा हो गई है। हमने इस मुद्दे को विभाग के पास उठाया है। यह आग्रह किया गया है कि सीयूईटी-यूजी को समाप्त करके बारहवीं कक्षा के मेरिट पर ही दाखिले होने चाहिए। सीयूईटी-यूजी व नान-सीयूईटी में असमंजस रहता है।

    सिर्फ जम्मू शहर व श्रीनगर को छोड़ कर सभी कालेज नान-सीयूइटी कर देने चाहिए। इस असमंजस के कारण ही बढ़ी संख्या में विद्यार्थियों का रुख बाहरी राज्यों की तरफ हो गया है। इस कारण अहम विषयों में सीटें खाली बच गई है। जब विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में सीट नहीं मिलती है तो वे बाहर चले जाते है बाद में सीटें बचने पर कम मेरिट वालों को मिल जाती है। पूरे मामले की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

    यह भी पढ़ें- प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक सोनम ने किया सावधान, बोले-खतरा अभी भी बरकरार, कभी भी पैटर्न बदल सकता है मानसून

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में प्लानिंग का अभाव रहा

    जम्मू विश्वविद्यालय में अकादमिक मामलों के पूर्व डीन व अहम प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुके बीस साल से अधिक का टीचिंग का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ जम्मू विवि के प्रो. नरेश पाधा का कहना कि कालेजों या विश्वविद्यालयों में सीटों के खाली रह जाने के कई कारण है। सीयूईटी-यूजी के कारण दूरदराज व ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    बाहरी राज्यों में परीक्षा केंद्र बन जाने के कारण कई जा ही नहीं पाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में प्लानिंग का अभाव रहा। नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए व्यापक योजना की जरूरत थी। आज के समय में विद्यार्थियों के पास विकल्प कम नहीं रहे। पूरे सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।

    यह भी पढ़ें- देश के लिए पदक जीतने वालों ने खेल दिवस को मनाना काला दिवस, बोले- नौकरियों के लिए पिछले 12 वर्ष से कर रहे संघर्ष

    सीटों के न भरने के कारण

    • प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना में पांच हजार विद्यार्थियों का एडजस्ट होना
    • जम्मू कश्मीर के दूरदराज व ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचा मजबूत न होना
    • इंजीनियरिंग व मेडिकल कोर्स के लिए विद्यार्थियों के लिए विकल्प बढ़ना।
    • शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर विद्यार्थियों का विश्वास बाहरी राज्यों में अधिक होना
    • सीयूईटी-यूजी के लिए बाहरी राज्यों में परीक्षा केंद्र बनने।
    • सीयूईटी-यूजी व नान-सीयूईटी के बारे में विद्यार्थियों का जागरूक नहीं होना
    • सीटों की संख्या विद्यार्थियों के मुकाबले अधिक होना।
    • नए कोर्स का न आना व कालेजों में ढांचागत सुविधाओं की कमी होना