ठंड में बुजुर्गों में हृदय रोग का खतरा गंभीर, विशेष देखभाल जरूरी; विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाय
डा. सुशील शर्मा ने जम्मू के वृद्धाश्रम में हृदय जागरूकता शिविर में बताया कि बुजुर्गों में हृदय रोग का खतरा अधिक होता है, विशेषकर ठंड में। उन्होंने स्व ...और पढ़ें

डा. सुशील शर्मा ने देखभालकर्ताओं को भी प्राथमिक रोकथाम के बारे में जागरूक किया।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू में हृदय रोग विभाग के प्रमुख डा. सुशील शर्मा का कहना है कि बुजुर्गों में हृदय रोग का खतरा अधिक है। उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में हृदय स्वास्थ्य केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखने का माध्यम है। जोखिम कारकों पर नियंत्रण, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और संवेदनशील देखभाल से हृदय संबंधी घटनाओं और दिव्यांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों में हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए और विशेष रूप से वृद्धाश्रमों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रविवार को वृद्ध आश्रम अंबफला, जम्मू में एक दिवसीय हृदय जागरूकता एवं स्वास्थ्य जांच शिविर में डा. सुशील ने यह बात कही।
हृदय रोगों की प्राथमिक रोकथाम के बारे में किया जागरूक
इस शिविर में बुज़ुर्गों के साथ-साथ उनके देखभालकर्ताओं को हृदय रोगों की प्राथमिक रोकथाम और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया गया, ताकि वृद्धावस्था में हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु और जटिलताओं को कम किया जा सके।
डॉ. सुशील शर्मा ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ हृदय और रक्त वाहिकाओं में स्वाभाविक संरचनात्मक और कार्यात्मक बदलाव आते हैं। धमनियां सख्त हो जाती हैं, हृदय की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और हृदय की पंपिंग क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है।
इन परिवर्तनों के कारण उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, अनियमित धड़कन और हार्ट फेल्योर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, उम्र बढ़ना स्वयं कोई बीमारी नहीं है, बल्कि धूम्रपान, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, मानसिक तनाव, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्राल और अनियंत्रित रक्तचाप जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारण हृदय रोग की आशंका को कई गुना बढ़ा देते हैं। इन जोखिमों की समय रहते पहचान और उचित हस्तक्षेप से रोग की प्रगति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए यह भी जरूरी
उन्होंने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुज़ुर्गों की विशेष चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, जहां अनेक पुरानी बीमारियां, सीमित गतिशीलता और अकेलेपन जैसी भावनात्मक समस्याएं हृदय रोग को और गंभीर बना सकती हैं। ऐसे संस्थानों में नियमित रक्तचाप व शुगर जांच, समय पर दवाइयों का सेवन, कम नमक वाला भोजन, निगरानी में शारीरिक गतिविधियां और सांस फूलना, पैरों में सूजन, बेहोशी या अचानक भ्रम जैसे लक्षणों की शीघ्र पहचान अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षित देखभालकर्ता और नर्सिंग स्टाफ समय पर इलाज सुनिश्चित कर जटिलताओं को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिविर में यह भी हुए शामिल
इस अवसर पर वृद्धाश्रम की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सतपाल शर्मा और राजिंदर सिंह ने डा. सुशील शर्मा एवं उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे शिविरों को बुज़ुर्गों के कल्याण के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। शिविर में डा. वेंकटेश येल्लुपु और डा. आदित्य शर्मा ने भी भाग लिया। वहीं, पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों में कमल शर्मा, रणजीत सिंह, राजकुमार, अनमोल सिंह, माखन शर्मा, गोकुल शर्मा, गुरप्रीत सिंह, रोहित नैयर, मोहम्मद अल्ताफ, राजिंदर सिंह, गौरव शर्मा, विकास कुमार और निर्वैर सिंह बाली शामिल रहे।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।