'अभी पूर्ण राज्य की मांग करूं तो लानत है...', विधानसभा में भावुक हुए CM उमर अब्दुल्ला; पढ़िए भाषण की 10 बड़ी बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद विशेष सत्र आयोजित किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah Speech) ने भाषण में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि यह हमला पहली बार नहीं हुआ लेकिन 21 साल बाद इतना बड़ा हमला हुआ है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी नहीं है लेकिन वह इसका इस्तेमाल राज्य के दर्जे की मांग के लिए नहीं करेंगे।

डिजिटल डेस्क, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam Terrorists Attack) में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से आज यानी सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया गया है। सदन ने दो मिनट का मौन रखकर पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की गई।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने सरकार की ओर से एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें पर्यटकों पर हुए बर्बर और अमानवीय हमले पर गहरा सदमा और दुख व्यक्त किया गया।
वहीं, सदन में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (CM Omar Abdullah) ने भाषण देते हुए कई बाड़े बातें बोलीं हैं। आइए जम्मू-कश्मीर विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान उमर अब्दुल्ला के द्वारा दिए गए भाषण की 10 बड़ी बातों के बारे में जान लेते हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भाषण की 10 बड़ी बातें
- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये हमला पहली बार नहीं है, इससे पहले भी हमने कई हमले देखे हैं, पहलगाम में यात्रा के कैंप पर हमला होते देखा है। हमने डोडा में हमला होते देखे हैं। हमने कश्मीरी पंडितों की बस्तियों पर हमले होते देखे। हमने सरदारों की बस्तियों पर हमले होते देखे, लेकिन अब ये 21 साल के बाद इतना बड़ा हमला हुआ है।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सिक्योरिटी जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार की जिम्मेदारी नहीं, लेकिन मैं यह मौका इस्तेमाल स्टेटहुड के लिए नहीं करूंगा। इस मौके पर कोई सियासत नहीं, कोई स्टेटमेंट नहीं, सिर्फ हमले की कड़ी निंदा होनी चाहिए। इस वक्त पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करना मेरे लिए लानत की बात होगी।
- सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम के बाद मैं किस मुंह से जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा मांग सकता हूं? मेरी क्या इतनी सस्ती सियासत है? हमने पहले भी राज्य के दर्जे की बात की है और भविष्य में भी करेंगे, लेकिन अगर मैं केंद्र सरकार से जाकर कहूं कि 26 लोग मारे गए हैं। अब मुझे राज्य का दर्जा दे दो, तो यह मेरे लिए शर्मनाक होगा।
- उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि मृतकों के परिवारों से कैसे माफी मांगूं। मेजबान होने के नाते यह मेरा कर्तव्य था कि मैं सुनिश्चित करूं कि पर्यटक सुरक्षित लौटें। मैं ऐसा नहीं कर सका। मेरे पास माफी मांगने के लिए शब्द नहीं हैं।
- सीएम ने कहा कि मैं उन बच्चों से क्या कहूं, जिन्होंने अपने पिता को खो दिया और उस पत्नी से क्या कहूं, जिसने अपने पति को खो दिया, जिसकी कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी? उन्होंने पूछा कि हमारा क्या कसूर था? हम तो बस छुट्टियों में आए थे।
- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जिसने भी यह आतंकी हमला किया, वह कहता है कि उसने यह हमारे लिए किया, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं, क्या हमने इसे मंजूरी दी थी? क्या हमने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था? हम इस हमले के समर्थन में नहीं हैं।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बुरी परिस्थिति में हमें उम्मीद की किरण तलाशनी चाहिए, लेकिन इस समय ऐसी रोशनी मिलना बहुत मुश्किल है। हालांकि, 26 साल में पहली बार मैंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को इस हमले की निंदा करते हुए देखा है, और कहा है कि यह मेरे नाम पर नहीं किया गया।
- सीएम ने कहा कि इस हमले के दौरान स्थानीय लोगों ने पूरी मदद की। सैयद आदिल हुसैन शाह ने जान की परवाह किए बगैर लोगों की जान बचाई। वह चाहता, तो भाग सकता था, लेकिन वह नहीं भागा।
- उमर अब्दुल्ला ने कहा कि होटल वालों ने भी लोगों की मदद के लिए कमरे खोल दिए। इस हमले के खिलाफ हर एक कश्मीरी बाहर आया। मस्जिदों में खामोशी को हम समझ सकते हैं। मैं इसके लिए कश्मीरियो को सलाम करता हूं।
- सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि हम बंदूक के जरिए आतंकवाद को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन उसे खत्म नहीं कर सकते। आतंकवाद का खात्मा तब होगा, जब लोग हमारा साथ देंगे और आज लोग हमारे साथ हैं। ऐसे में हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे लोग दूर हो जाएं।
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