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    फास्ट ट्रैक कोर्ट में छह वर्ष की नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपित दोषी करार, 30 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 01:13 PM (IST)

    जम्मू में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में सोहन सिंह को दोषी ठहराया है। पुलिस के अनुसार 2015 में आरोपित ने बच्ची को बहला-फुसलाकर खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया था। कोर्ट 30 अगस्त को सजा सुनाएगी। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय ने पीएसए के तहत कुलगाम निवासी की हिरासत को रद्द कर दिया।

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    मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट को बिना सोचे-समझे मंजूरी दे दी थी।

    जेएनएफ, जागरण, जम्मू। फास्ट ट्रैक कोर्ट, जम्मू के पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने छह वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित को दोषी करार दिया है। कोर्ट 30 अगस्त को अब आरोपित सोहन सिंह उर्फ सोनू की सजा की घोषणा करेगी।

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    कोर्ट में पुलिस की ओर से पेश मामले के अनुसार 2 मई 2015 को पीड़ित बच्ची अपने घर से एक दुकान पर प्याज लेने के लिए गई थी। इस दौरान आरोपित बहलाफुसला कर उसे अपने साथ खेत में ले गया था और उसका मुंह अपने हाथ से बंद कर उससे दुष्कर्म किया था। बच्ची की चिखोपुकार को सुन कर उसके पिता मौके पर पहुंचे थे।

    बच्ची के पिता को देख कर आरोपित सोहन वहां से भाग गया, जबकि बच्ची खून से लथपथ थी। बच्ची की स्वास्थ्य जांच करवाई गई और वह एक माह तक अस्पताल में भर्ती रही थी। मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट में उससे दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई थी।

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    इसके अलावा कोर्ट में बच्ची के पिता के अलावा एक पोल्ट्री फार्म के मालिक ने भी आरोपित के विरुद्ध कोर्ट में गवाही दी। हालांकि, आरोपित के वकील ने इस मामले को झूठा बता कर उसे फंसाने की बात कोर्ट में कही थी, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए आरोपित सोहन सिंह को बच्ची से दुष्कर्म का दोषी करार दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपित के विरुद्ध पुख्ता सबूत है, जो उसे दोषी करार देने के लिए काफी है

    उच्च न्यायालय ने पीएसए हिरासत को किया रद

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कुलगाम निवासी की पब्लिक सेफ़्टी एक्ट के तहत की गई हिरासत को रद करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट ने पुलिस द्वारा तैयार किए गए डोजियर को बिना सोचे समझे डाक खाने की तरह आगे बढ़ा दिया।

    जस्टिस राहुल भारती ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता पर लगे पीएसए हिरासत के निर्देश को निरस्त कर दिया। यह आदेश कुलगाम के शौंच निवासी रईस अहमद ठोकर के खिलाफ जारी किया गया था।

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    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ठोकर के खिलाफ वर्ष 2019 और 2020 में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं, लेकिन उनमें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इसके बावजूद कुलगाम के एसपी ने उन्हें सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) बताते हुए पीएसए में हिरासत की सिफारिश की। इसी डोजियर पर जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित कर दिया।

    उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि हिरासत आदेश में लिखे शब्द कुलगाम एसपी द्वारा प्रस्तुत आधारों पर यह साफ दिखाते हैं कि मजिस्ट्रेट ने स्वतंत्र रूप से डोजियर नहीं पढ़ा और केवल पुलिस की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। ऐसा रवैया कानून के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है और इस प्रकार की हिरासत शुरुआत से ही अवैध मानी जाएगी।

    उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि ठोकर, जो वर्तमान में सेंट्रल जेल श्रीनगर में बंद हैं, को तुरंत रिहा किया जाए, बशर्ते वे किसी अन्य मामले में वांछित न हों।

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