मंदिरों के धन पर रोक के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी सुक्खू सरकार, दायर करेगी पुनर्विचार याचिका
हिमाचल सरकार मंदिरों के धन को सरकारी कार्यों में उपयोग पर लगी रोक हटाने के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत ...और पढ़ें
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हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, ऊना। हिमाचल सरकार मंदिरों के धन को सरकारी कार्यों में उपयोग पर लगी रोक हटाने के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि मंदिर निधि का उपयोग गरीबों की शिक्षा, उपचार और गांवों के समग्र विकास जैसे जनकल्याणकारी कार्यों के लिए होता है।
HC में दायर होगी पुनर्विचार याचिका
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, ''प्रदेश के मंदिरों के धन को सरकारी कार्यों में उपयोग पर अदालत की ओर से अक्टूबर में लगाई गई रोक को हटाने के लिए सरकार हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी, क्योंकि संभवतः न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष पूरी तरह प्रस्तुत नहीं हो पाया।''
शनिवार को चिंतपूर्णी के बेहड़ जसवां में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अदालत को यह स्पष्ट किया जाएगा कि मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग गरीबों की शिक्षा, उपचार और गांवों के समग्र विकास जैसे जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाता है।
'यहां खर्च होता है मंदिर का पैसा'
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आगे कहा कि मंदिरों का पैसा केवल मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक ही सीमित नहीं है। इसका उपयोग गरीबों के इलाज, मेधावी बच्चों की शिक्षा, गौशालाओं का संचालन और पंचायतों के बुनियादी ढांचे पर भी खर्च होता है। देश के अन्य बड़े मंदिर भी स्कूल-कालेज सहित कई संस्थाओं को चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी मंदिर भी जनहितकारी कार्यों के संचालन में बड़ी भूमिका निभा रहा है और इन सामाजिक कार्यों में बाधा नहीं आने दी जाएगी। हिमाचल सरकार अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी ताकि प्रदेश में जनसेवा के कार्य प्रभावित न हो। चिंतपूर्णी मंदिर के विकास के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा। विकास की गति को थमने नहीं दिया जाएगा।
विपक्ष के प्रश्नों पर पलटवार
चिंतपूर्णी मेले को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों पर पलटवार करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि जब कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्रि और चंबा के मिंजर मेले को यह गौरव मिल सकता है तो माता रानी के मेले पर उन्हें आपत्ति क्यों है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्ष में मेले में उमड़ा जनसैलाब इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
उन्होंने प्रशासन को आगामी वर्षों में इस मेले को भजन संध्या और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए और भी भव्य रूप दिए जाने की सलाह दी और कहा कि कोई कुछ भी कहे, चिंतपूर्णी महोत्सव ऐसे ही भव्यता के साथ चलता रहेगा।

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