ताकि जेल से सभ्य बन कर निकलें कैदी
जागरण संवाददाता, सोलन : जिला कारागार सोलन में मौजूद 130 बंदियों के व्यक्तित्व सुधार के लिए यह ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, सोलन : जिला कारागार सोलन में मौजूद 130 बंदियों के व्यक्तित्व सुधार के लिए यहां के जेल प्रभारी लगातार प्रयासरत हैं। जेल में मौजूद हर तरह के आरोपी व अपराधी के लिए यहां उसके शौक के आधार पर प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं। बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे जब जेल से बाहर जाएं तो उनमें आवश्यक बदलाव हो चुके हों और वह दोबारा कभी जेल में न आएं और समाज का एक सभ्य अंग बनकर निकले। जेल के भीतर ही बंदियों को स्किल डेवेल्पमेंट कार्यक्रम से भी जोड़ा जाता है, ताकि वे अपराध की दुनिया को छोड़कर एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ें।
जिला कारागार सोलन के 20 बंदी ऐसे हैं, जिन्होंने हाल ही में एशियन पेंट कंपनी द्वारा आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया और अपनी अंदर के स्किल को सुधारा। इस प्रशिक्षण शिविर में बंदियों को कंपनी की टीम ने लगातार 12 दिन तक पेंटिंग के बारे प्रशिक्षित किया। अब वह सभी बंदी जिला कारागार की साज सज्जा समेत बाहर निकलकर अपने घर की भी शोभा बढ़ा सकेंगे। इसके साथ ही पेंटिंग के जरिए वह स्वरोजगार को भी अपना सकेंगे।
जिला कारागार सोलन के सहायक अधीक्षक दीवेश कुमार ने बताया कि यहां दस करीब धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं समय-समय पर आती हैं। बंदियों के जीवन सुधार के लिए यह प्रयास करती हैं। ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए वह शर्तो पर संस्थाओं को अनुमति प्रदान करते हैं। यहां कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जाता है। अधिकतर बंदियों को गजलों व शेयर-शायरी का शौक है।
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सामाजिक व धार्मिक कार्यो में भी आगे
कारागार में मौजूद बंदियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है। यहां बंदियों को धार्मिक व सामाजिक कार्यो से जोड़े रखने के लिए अनेक शिविर शहर व प्रदेश की संस्थाओं द्वारा लगाए जाते हैं। यहां आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के लोग इन्हें जीने की कला के बारे में बताते हैं और कई आसन व क्रियाएं सिखाते हैं, जिससे जेल में मौजूद आरोपियों का मानसिक संतुलन बना रहता है और समाज के प्रति सकारात्मक सोच बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रजापति ब्रह्माकुमारीज के बहने भी कैदियों से मिलने पहुंचती हैं और उनके आवश्यक सुधार के लिए प्रयास करती हैं। इतना ही नहीं शहर की संस्था रोटरी मिड टाउन सोलन के पदाधिकारी भी यहां हर वर्ष पहुंचते हैं और जेल परिसर में पौधरोपण करते हैं, साथ ही पर्यावरण के प्रति बंदियों को भी जागरूक करते हैं।
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ऑनलाइन बिक रही केंचुआ खाद
जेल प्रभारी ने बताया कि परिसर के भीतर उन्होंने जैविक केंचुआ खाद उत्पादन का काम भी कैदियों की मदद से शुरू किया है। यहां मौजूद कई मामलों के आरोपी व कैदी इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं, जिसकी उन्हें आमदनी भी मिलती है। यह केंचुआ खाद खाने के वेस्ट व गोबर से बनाई जाती है। बनाने के बाद इसे ऑनलाइन बेचा भी जाता है। केंचुआ खाद का पैकेट प्रति किलो 25 रुपये और पांच किलो का पैकेट 100 रुपये का बेचा जाता है।

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