हिमाचल में सरकारी टीचरों के विदेश जाने का सपना रह जाएगा अधूरा, सुक्खू सरकार ने नियमों में किया बदलाव
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट पर विदेश भेजने के नियमों में बदलाव ने विवाद खड़ा कर दिया है। शिक्षा विभाग ने आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और आवेदनों की छंटनी के बाद नियमों में बदलाव किया है। इससे शिक्षक नाराज हैं। संशोधित नियमों में सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है।

अनिल ठाकुर, शिमला। Himachal Pradesh News: सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट पर विदेश भेजने का मामला एक बार फिर विवादों में आ गया है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए नियमों में बदलाव किया है। यह बदलाव तब किया गया है जब इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यही नहीं आवेदनों की छंटनी भी हो चुकी है।
ऐन मौके पर किए इस बदलाव को लेकर शिक्षक वर्ग खासा नाराज है। इससे पहले शिक्षा विभाग ने 4 अक्टूबर 2024 को एक्सपोजर विजिट पर शिक्षकों को विदेश भेजने के लिए नियम बनाए थे। इन्हीं नियमों के आधार पर शिक्षकों ने आवेदन किया था।
नियमों में किया गया बदलाव
पहले तय नियमों के अनुसार नियमित सेवा के साथ सेवानिवृति के लिए भी कम से कम 5 वर्ष बचे होने की शर्त थी। संशोधित नियमों में सेवानिवृति के लिए 5 साल के बजाए अब 1 साल का समय कर दिया गया है।
वहीं, जनजातीय क्षेत्रों से संबंध रखने वाले शिक्षकों के लिए केवल 2 ही अंक थे जबकि अन्यों के लिए 5 अंक भी प्राप्त कर सकते थे। अब इसमें बदलाव किया गया है। अब सेवाकाल के आधार पर ये अंक तय किए हैं।
यदि कोई जनजातीय क्षेत्र का शिक्षक है तो वह अपनी सेवाकाल के अनुसार 5 अंक भी प्राप्त कर सकता है। इसे वर्गीकृत किया गया है यदि किसी शिक्षक ने तीन से 5 साल जनजातीय क्षेत्रों में नौकरी की है तो उसे 3 अंक, 5 से 8 साल सेवा देने पर 4 अंक व आठ साल से अधिक समय जनजातीय क्षेत्र में सेवा देने के लिए 5 अंक निर्धारित किए गए हैं।
दरअसल, एक्सपोजर विजिट पर शिक्षकों को इसलिए भेजा जाता है ताकि वहां पर कुछ सीख कर उसे अपने स्कूल में लागू किया जाए। जिसे सेवानिवृति में एक साल का ही समय बचा है उसे भेजने के लिए नियम बदलने से सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
2024 में उठे थे सवाल, फिर बदला था नियम
शिक्षा विभाग ने पिछले साल यानि वर्ष 2024 में शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट पर विदेश भेजा था। उस वक्त भी चयन पर सवाल उठे थे। जिसके बाद विभाग ने इस बार नियमों में बदलाव किया।
लेकिन छंटनी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित परफॉर्मा जारी करने को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। निदेशक उच्च शिक्षा विभाग डॉ. अमरजीत शर्मा की ओर से बीते शुक्रवार को यह संशोधित परफार्मा जारी किया गया है।
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चयन निदेशालय करेगा, भेजने का कार्य एसएसए का
प्रारंभिक व उच्च शिक्षा निदेशालय शिक्षको का चयन करेगा। विदेश भेजने व वहां पर रहने से लेकर शिक्षण संस्थानों में ले जाने का जिम्मा समग्र शिक्षा निदेशालय का है।
इसके लिए एजेंसी को हायर किया जाता है। प्रधानाचार्य, मुख्य अध्यापक, प्रवक्ता, डीपीई शिक्षकों के चयन का जिम्मा उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन है। जबकि जेबीटी, सीएचटी, टीजीटी, सीएंडवी, पीईटी श्रेणी के शिक्षकों के चयन का जिम्मा प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधीन है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग चयन की प्रक्रिया पूरी कर सूची समग्र शिक्षा निदेशालय को भेज चुका है। जबकि उच्च शिक्षा निदेशालय अभी नियमों में उलझा हुआ है। इससे पहले उच्च शिक्षा विभाग ने चार दिन पहले ही प्रवक्ताओं से एसीआर मांगी थी ताकि छंटनी की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।
दोनों में समरूपता लाई जाए: चौहान
हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि प्रारंभिक व उच्च शिक्षा विभाग से शिक्षको को विदेश भेजने के लिए बनाए नियमों में एकरूपता लाई जाए।
यह मामला पहले भी शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाया गया था। जनजातीय क्षेत्रों के लिए अंकों का क्राइट एरिया बदला है उसमें भी खामिया है। 0-दो या अढाई साल का कार्यकाल जिसने काटा है उसे कोई अंक नहीं है।
निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग डॉ. अमरजीत शर्मा ने कहा कि चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। कुछ मापदंड बदले गए हैं ताकि पात्र शिक्षकों का चयन हो सकें।
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