Himachal News: चिट्टे से मौत समेत इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष, कांग्रेस-BJP के लिए मुसीबत बना नेवा पोर्टल
हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में विपक्षी दल भाजपा राज्य में बढ़ती नशाखोरी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। इसके अलावा सत्ता पक्ष के कांग्रेस विधायक अपने विधानसभा क्षेत्रों में मूलभूत आवश्यकताओं की समस्याओं को उठाएंगे। विधानसभा द्वारा उपयोग किया जा रहा नेवा पोर्टल भी विधायकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।

राज्य ब्यूरो, शिमला। विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के विभिन्न भागों में चिट्टे के आदी युवाओं की हो रही मौतों को भाजपा प्रमुखता से उठाएगी। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता है, जब चिट्टे के आदी किसी व्यक्ति के मरने की खबर न आए। इसके साथ-साथ चिट्टे के साथ पकड़े जाने वालों में प्रशासनिक तंत्र का कोई कर्मचारी होता है या फिर चिट्टे की आपूर्ति करने वाला व्यक्ति।
यह निश्चित हो चुका है कि बजट सत्र में विपक्षी भाजपा विधायकों की ओर से बेकाबू हो चुके नशे पर जोरदार चोट की जाएगी। इसके अतिरिक्त सत्र के लिए विपक्षी विधायकों की ओर से बिना शिक्षकों के चल रहे स्कूलों पर प्रश्न पूछे हैं। बजट सत्र के लिए अभी तक 544 प्रश्न विधानसभा सचिवालय प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं।
जिनमें से 409 प्रश्न तारांकित हैं और 135 अतारांकित। 28 विपक्षी विधायकों की ओर से प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त खामियों को लेकर प्रश्न किए हैं। बिना शिक्षकों के चल रहे स्कूल चपरासी के हवाले हैं। बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल भी हैं, जहां पर एक शिक्षक का ही बच्चों को पढ़ाई का सहारा है।
सदन में जोरदार हंगामा होने के आसार
प्रदेश के अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक नहीं हैं, इस तरह के प्रश्न भी उठाए गए हैं। बस सेवा बंद होने, डिपो में मिली रही घटिया दालों का मामला उठाया जाएगा। सत्ता पक्ष के कांग्रेस विधायकों की ओर से अपने विधानसभा क्षेत्रों में मूलभूत आवश्यकताओं में लो वोल्टेज की समस्या, पेयजल समस्या जैसे प्रश्न किए जाएंगे।
सत्ता पक्ष के विधायकों की ओर से केंद्र सरकार द्वारा राज्य की हो रही उपेक्षा पर भी प्रश्न किए गए हैं। ऐसे में दोनों ओर से माहौल गर्माया रहेगा। सत्ता पक्ष को घेरने के लिए विपक्ष ने पूरी तैयारी कर ली है।
नेवा पोर्टल बना मुसीबत
विधानसभा द्वारा उपयोग किया जा रहा नेवा पोर्टल मुसीबत बन गया है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुखराम चौधरी, जीतराम कटवाल व कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा सहित कई विधायकों ने अधिकारियों से पुरानी व्यवस्था रखने की बात रखी थी।
नेवा पोर्टल आने से अब सत्ता व विपक्षी विधायकों के लिए स्वयं ही प्रश्न अपलोड करने का झंझट पैदा हो गया है। दूसरा व्यक्ति विधायक के पोर्टल को संचालित नहीं कर सकता है।
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