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    शिमला: पहाड़ की नारी होगी सशक्त, उत्पादों को मिलेगा बाजार; 44 हजार महिलाओं को फायदा

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 12:33 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए एक नई पहल की जा रही है। एचपीएमसी 44 हजार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को दिल्ली, गुजरात ...और पढ़ें

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    नारी शक्ति के उत्पादों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच (फाइल फोटो)

    जागरण संवाददाता, शिमला हिमाचल प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल की जा रही है। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन और प्रसंस्करण निगम (HPMC) ने 44 हजार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को दिल्ली, गुजरात और मेट्रो स्टेशनों पर बने आउटलेट्स के जरिए राष्ट्रीय बाजारों में बेचने का प्लान बनाया है।

    3.50 लाख महिलाओं को फायदा

    इस दिशा में सरकार ने एचपीएमसी के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाई है। शिमला में 2 करोड़ रुपये की लागत से 'हिमाचल हाट' बनाया जाएगा, जहां 12 जिलों के उत्पाद एक छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इससे 3.50 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा।

    नया बाजार मिलने से बढ़ेगी आय

    जानकारी के अनुसार, प्रदेश में हिम ईरा से जुड़े 44 हजार महिला स्वयं सहायता समूह हैं। इनसे 3.50 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं के उत्पादों की विभिन्न मेलों और अन्य आयोजनों पर प्रदर्शनी लगाई जाती है। इसके अलावा नलाइन भी उत्पादों की बिक्री होती है। ऐसे में नया बाजार मिलने से उनकी आय बढ़ेगी और हिमाचली हथकरघा एवं हस्तशिल्प का विस्तार होगा।

    मेट्रो स्टेशन पर बेचा जाएगा प्रोडक्ट

    महिलाओं के ये उत्पाद नई दिल्ली के प्रमुख मेट्रो स्टेशन, गुजरात के अहमदाबाद व अन्य बड़े स्टेशन और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित बड़े शहरों के चुनिंदा मेट्रो स्टेशन पर बेचने की तैयारी है।

    'हिमाचल हाट' में ये उत्पाद उपलब्ध

    ग्रामीण कला एवं शिल्प, हथकरघा उत्पाद, ऊनी वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण सामग्री, जैम-जेली, अचार, शहद, पहाड़ी दालें, किन्नौरी राजमाह, काला जीरा, चंबा रूमाल, चंबा थाल, किन्नौरी व कुल्लवी शालें, मसाले तथा पारंपरिक हिमाचली व्यंजन।

    महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनको प्रोत्साहित करने के लिए उनके उत्पादों को एचपीएमसी केस्टॉल और आउटलेट पर प्रदर्शित कर बेचने की योजना है। इस पर कार्य किया जा रहा है। जल्द इस दिशा में कार्य शुरू होने की उम्मीद है।- जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री।