Himachal News: हिमाचल परिवहन विभाग का भर गया खजाना, राजस्व विभाग में 131 करोड़ रुपये का इजाफा
हिमाचल परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 912 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जो पिछले वर्ष के 781 करोड़ रुपये से 131 करोड़ रुपये अधिक है। विभाग ने कई सुधारात्मक कदम भी उठाए हैं जैसे एसआरटी की लंबित राशि वसूलना टोकन टैक्स में वृद्धि और यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और फैंसी नंबरों की बिक्री। सबसे अधिक कमाई फैंसी नंबर जारी करने के बाद हुई है।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 912 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले 131 करोड़ रुपये अधिक है। तब 781 करोड़ रुपये का राजस्व था।
विभाग ने 884 करोड़ रुपये राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 28 करोड़ अधिक कमाकर दिए। राज्य सरकार ने विभाग में कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे राजस्व बढ़ा है। वाहनों से लिए जाने वाले विशेष पथ कर (एसआरटी) की लंबित राशि को वसूलने के लिए विशेष अभियान परिवहन विभाग ने चलाया हुआ है।
इसमें 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। टोकन टैक्स से ही विभाग ने 14.57 करोड़ रुपये की कमाई की। यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों पर भी जुर्माना लगाया गया है।
फैंसी नंबर बेचने से हुई मोटी कमाई
पिछले वर्ष केवल छह करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था, जबकि इस वर्ष 12 करोड़ रुपये वसूले। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने परिवहन विभाग में कई तरह बदलाव किए हैं। फैंसी नंबर बेचने के लिए बदले नियम इसमें बड़ा बदलाव था। इससे भी विभाग ने मोटी कमाई की है।
परिवहन विभाग के निदेशक डीसी नेगी ने बताया कि परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में लक्ष्य से 28 करोड़ रुपये अधिक राजस्व अर्जित किया है। एसआरटी की लंबित राशि को वसूला गया। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य सुधार किए, जिससे राजस्व को तय लक्ष्य से ज्यादा हासिल किया जा सका है।
अब 978 करोड़ रुपये का लक्ष्य, कई टैक्स बढ़ाने की तैयारी
परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 978 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया है। विभाग की बैठक में इसको लेकर विस्तृत चर्चा की गई है। सूत्रों की माने तो विभाग अब कई तरह के टैक्स बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। अन्य राज्यों के मुकाबले ये टैक्स अधिक किए जाएंगे।
इसमें टोकन टैक्स सहित कई अन्य तरह के टैक्स शामिल हैं, जो राज्य सरकार अपने स्तर पर लगा सकती है। हालांकि अभी इस पर चर्चा चल रही है। इसका प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय सरकार लेगी। एसआरटी की लंबित देनदारियों के लिए विशेष अभियान प्रदेश भर में चलाया जाएगा।
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