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    संभल जाएं...दिल का मामला है दिल्लगी नहीं! हार्ट अटैक की चपेट में 20 से 30 साल के युवा, रिसर्च में हुआ खुलासा

    Updated: Sat, 28 Sep 2024 07:09 PM (IST)

    युवाओं में हृदयाघात के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। आईजीएमसी शिमला के कार्डियोलॉजी विभाग के शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हृदयाघात के ह ...और पढ़ें

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    अब युवाओं को भी चपेट में ले रहा है हृदयाघात। (फाइल फोटो)

    यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। संभल जाएं युवा...यह दिल का मामला है दिल्लगी नहीं। दिनचर्या में परिवर्तन से अधिकतर बुढ़ापे में होने वाला हृदयाघात अब युवाओं को भी चपेट में ले रहा है। ये चौंकाने वाले तथ्य इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला के कार्डियोलाजी विभाग के शोध में सामने आए हैं। हृदयाघात के हिमाचल में प्रति माह 100 से 150 व आइजीएमसी में 30 से 35 मामले आ रहे हैं। इनमें 10 प्रतिशत मामले 20 से 30 वर्ष के युवाओं के हैं।

    फास्ट फूड का सेवन बन रहा कारण

    यही कारण है कि बच्चों और युवाओं को इसके प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लोग गैस्टिक मान उसकी दवाएं खाते रहते हैं, लेकिन तब तक इलाज में देर हो जाती है और इंजेक्शन का असर नहीं होता। चिकित्सकों की मानें तो दिनचर्या में परिवर्तन, धूमपान, शारीरिक श्रम में कमी और फास्ट फूड का अधिक सेवन हृदयाघात के साथ अन्य बीमारियों का कारण बन रहा है।

    क्या है हृदयाघात

    हृदयाघात को आमतौर पर दिल के दौरे के रूप में जाना जाता है। इसमें दिल के कुछ भाग में रक्त संचार में बाधा होती हैं। इसके उपचार के लिए तीन घंटों के अंदर पहुंचने से बेहतर लाभ होता है। खून को पतला करने का इंजेक्शन लगाया जाता है, जो हृदयाघात में रोगियों की जान बचाने में मददगार है। पहले मात्र 30 प्रतिशत को ही इंजेक्शन लगाया जाता था अब सीएचसी स्तर पर इसके उपलब्ध होने से 90 प्रतिशत से अधिक को लग रहा है।

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    लक्षण व कारण

    सीन में दर्द, रक्त और आक्सीजन की कमी, अधिक पसीना आना, बायें बाजू में दर्द, जबड़े और गर्दन में दर्द। गैस्टिक से पेट में दर्द रहता, कमजोरी व थकान और सही से नींद न आना।

    हृदयघात का मुख्य कारण खराब दिनचर्या यानी लाइफ स्टाइल है। मोटापे से डायबटीज, बीपी और हाइपरटेंशन बढ़ रहा है, जो इस रोग को ज्यादा बढ़ा रहा है। युवा में ऐसे मामले बढ़े हैं। हृदय रोग से बचाव का सबसे कारगर तरीका दिनचर्या में परिर्वतन के साथ मात्र आधा घंटे की सैर हैं जो कई रोगों को दूर करती है। अधिक वसायुक्त, मसालेदार व फास्ट फूड से भी परहेज जरूरी है।

    -डा. पीसी नेगी, विभागाध्यक्ष, कार्डियोलाजी विभाग, आईजीएमसी शिमला।

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