Himachal News: चारों ओर बर्फ ही बर्फ, न सड़क और न कोई मदद; 7 दिन बाद फरिश्ता बनकर आया हेलीकॉप्टर, महिला की बची जान
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम बड़ा भंगाल गांव में एक महिला की सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। भारी हिमपात के कारण सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचना असंभव था। सात दिनों तक मदद की गुहार लगाने के बाद आखिरकार एक निजी हेलीकॉप्टर ने महिला को एयरलिफ्ट किया। ग्रामीणों ने हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए तीन फीट मोटी बर्फ हटाई। अस्पताल में इलाज चल रहा है।

पुष्पराज, मंडी। सोचिए, आपकी मां बीमार है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है। चारों ओर सिर्फ बर्फ ही बर्फ है। न सड़क, न रास्ता, न कोई मदद। हिमाचल के दुर्गम बड़ा भंगाल में रहने वाले सुनील कुमार के लिए यह स्थिति किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। उनकी 60 वर्षीय मां निर्मला देवी सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, लेकिन भारी हिमपात के कारण अस्पताल पहुंचना असंभव था।
सुनील और गांववालों ने सात दिनों तक सेटेलाइट फोन के जरिए मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। आखिरकार जब उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा को फोन किया, तब जाकर एक निजी हेलीकॉप्टर फरिश्ता बनकर आया। हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए पहले गांव वालों ने तीन फीट मोटी बर्फ हटाई, फिर निर्मला देवी को जोनल अस्पताल मंडी पहुंचाया गया।
हिमपात के बीच हेलीकॉप्टर से किया एयरलिफ्ट
बड़ा भंगाल हिमाचल का सबसे दुर्गम इलाका माना जाता है। वहां तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा नहीं है। सिर्फ पैदल चलकर ही जाया जा सकता है, वह भी दो दिन का लंबा सफर तय करना पड़ता है। हिमपात के कारण आवाजाही पूरी तरह बंद हो चुकी थी।
गांव में सिर्फ आठ से दस लोग ही मौजूद थे, जबकि निचले क्षेत्र से आए 13 लोग वहीं फंसे हैं। सात दिनों तक कोई मदद नहीं मिली, तो सुनील कुमार और गांव वालों ने अपने दम पर तीन फीट मोटी बर्फ हटाकर हेलीपैड साफ किया। आखिरकार सोमवार सुबह हेलीकॉप्टर की लैंडिंग हुई और निर्मला देवी को मंडी अस्पताल पहुंचाया।
'हमारी बढ़ रही थी दिल की धकड़न'
सुनील कुमार की आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा कि गांव में कोई सड़क नहीं है, अगर कोई बीमार हो जाए, तो उसे पीठ पर उठाकर दो दिन तक पैदल चलना पड़ता है। मेरी मां की हालत गंभीर थी, ज्यादा दिन तक इंतजार नहीं कर सकते थे।
जैसे-जैसे मां का स्वास्थ्य बिगड़ रहा था हमारे दिल की धड़कनें बढ़ रही थीं। उसकी बहन प्रमिला देवी भी मां के साथ हेलीकॉप्टर में आईं। उसने उपायुक्त कांगड़ा तथा प्रदेश सरकार का आभार जताया।
स्थानीय लोगों ने खुद बनाया है हेलीपैड
सड़क सुविधा न होने के कारण आपात स्थिति में मदद मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से ग्रामीणों ने अपने बलबूते पर एक आपातकालीन हेलीपैड तैयार किया है, ताकि ऐसे संकट के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।
मंडी अस्पताल में इलाज शुरू
निर्मला देवी को जोनल अस्पताल मंडी में भर्ती कराया गया, तो उसके बच्चों की जान में जान आई। डाक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया। अब उसकी हालत में सुधार हो रहा है।
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