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    Himachal Disaster: अब जीने की इच्छा नहीं... छत पर बैठ रात भर देखा तबाही का मंजर, बाढ़ में बह गया सबकुछ

    Updated: Wed, 09 Jul 2025 04:02 PM (IST)

    मंडी के थुनाग में चुन्नी लाल ने अपनी आंखों के सामने एक रात में सब कुछ तबाह होते देखा। 30 जून की रात आई बाढ़ में उनकी जमीन दुकानें और गाड़ियां सब बह गईं। उन्होंने अपने परिवार के साथ छत पर बैठकर पूरी रात तबाही का मंजर देखा। चुन्नी लाल कहते हैं कि अब जीने की कोई इच्छा नहीं बची है क्योंकि सैलाब उनके सपनों को निगल गया।

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    सराज हलके के थुनाग का चुन्नी लाल

    हंसराज सैनी, मंडी। अब जीने की कोई इच्छा नहीं बची...यह शब्द हैं थुनाग के चुन्नी लाल के, जिनकी आंखों के सामने एक ही रात में उनका सब कुछ बह गया। मकान की छत पर बैठे उन्होंने पूरी रात अपने कस्बे की तबाही को अपनी आंखों से देखा, हर लहर के साथ कुछ छिनता गया।

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    जमीन, दुकानें, गाड़ियां व सबसे बड़ी बात,जीने की चाह। थुनाग में 30 जून की रात जो सैलाब आया, उसने सैकड़ों लोगों के सपनों को निगल लिया। यहां हर पीड़ित की कहानी मार्मिक है। वह बड़ी मुश्किल से आफत के बीच से बचे हैं। अगर उनका मकान थोड़ा भी कमजोर होता तो आज उनका नाम भी किसी लापता सूची में होता।

    दो नालों में बाढ़ से मची तबाही

    जब वर्षा तेज हुई तो चुन्नी लाल दुकान बंद कर घर चले गए। घर में पत्नी, दो भाई, भाभी व दो किरायेदारों को मिलाकर आठ लोग थे। रात करीब साढ़े दस बजे पहला नाला आया, फिर दूसरा, फिर तीसरा...हर तरफ पानी ही पानी। पहले नाले का पानी व साथ में बहकर आया मलबा सीधा थुनाग बाजार में घुस गया।

    फिर दूसरे नाले ने भी अपना रुख बदला। उसने भी जमकर तबाही मचाई। नालों के ठीक ऊपर पहाड़ की चोटियों पर बादल फटे थे। सैलाब अपने साथ देवदार के सैकड़ों पेड़,चट्टानें व मलबा भी बहा लाया। रात ढाई बजे तक तबाही मची रही। चुन्नी लाल व उसके भाइयों की मनियारी व अन्य सामान की दो दुकानें हैं।

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    सैलाब में बह गया सबकुछ

    मलबा घुसने से सारा सामान खराब हो गया। आंखों के सामने चार गाड़ियां बह गई। रातभर पूरा परिवार छत पर बैठा रहा। तेज वर्षा, अंधेरी रात व डरावनी आवाजें। हर क्षण ऐसा लगा कि अब छत भी नहीं बचेगी। लेकिन जब सुबह हुई, तो बचा क्या था? चारों तरफ मलबा, टूटी दुकानें, बहती जिंदगी व बेजान सन्नाटा।

    सैलाब अपने साथ पूरी जमीन भी बहा ले गया। बकौल चुन्नी लाल हम सबने छत पर बैठे एक साथ ये निर्णय किया था—जिएंगे या मरेंगे, साथ ही। लेकिन अब तो सिर्फ जिंदा हैं, जी नहीं रहे, यह कहते हुए उनकी आंखें फिर भर आती हैं।

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