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    हिमाचल के इस गांव में रहते हैं सिर्फ 6 लोग, BSNL ने यहां भी पहुंचाया 4G इंटरनेट

    By JASWANT THAKUREdited By: Nitish Kumar Kushwaha
    Updated: Thu, 01 Jan 2026 11:30 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में काजा के पास स्थित काकती गांव, जो केवल एक घर वाला भारत का पहला गांव है, अब डिजिटल हो गया है। बीएसएनएल ने यहां 4जी टावर ...और पढ़ें

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    टावर ने संसार से जोड़ दिए गांव में रहने वाले छह लोग।

    जसवंत ठाकुर, मनाली। हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी में काजा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंचे पहाड़ी टीले पर स्थित काकती गांव अब डिजिटल इंडिया से जुड़ गया है। गत नवंबर महीने में बीएसएनएल ने गांव में 4जी टावर स्थापित किया है। गांव में दो भाइयों का एक ही घर है। छोटा भाई कलजंग टाकपा लामा हैं जबकि बड़े भाई छेरिंग नामगयल अपनी पत्नी रिंगजिन यूडन के साथ घर में रहते है।

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    बेटा सोनम छोपेल लामा है जबकि नवांग ज्ञालसन विशेष बच्चा है व नवांग कुंगा टैक्सी चलाते है। यह परिवार अपने वंश की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है। काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गांव है। एडीसी काजा शिखा सिमटिया ने बताया कि काकती राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गांव है। यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां केवल एक ही घर है।

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    सरकारी रिकॉर्ड में काकती गांव की कुल भूमि मात्र 15 बीघा दर्ज है। गांव 300 साल पुराने मिट्टी और पत्थरों से बने एक मड हाउस में सिमटा हुआ है। यही घर इस गांव की पहचान भी है और इसकी आबादी भी। मिट्टी और पत्थरों से बना यह पारंपरिक मड हाउस हिमालयी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    गर्मियों में यह घर प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में भीतर की गर्मी को संजोए रखता है। जब बाहर का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है, तब भी यह घर परिवार को सुरक्षित और अपेक्षाकृत गर्म आश्रय प्रदान करता है।

    छेरिंग ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में बताया कि पहले खबरें हफ्तों बाद मिलती थीं लेकिन अब मोबाइल के जरिए वे पूरी दुनिया से जुड़े हुए हैं। इन दिनों सभी बेटे बाहर हैं। पति पत्नी घर में अकेले ही रहते है।

    हमें शहर की चकाचौंध बिल्कुल पसंद नहीं। कभी कभार रिवालसर व नैनीताल चले जाते हैं लेकिन वहां भी अधिक दिन नहीं रुक पाते। अब तो बिजली आ गई है। सड़क घर तक पहुंच गई है लेकिन फिर भी सर्दियों में कठिन दिनों का सामना करना पड़ता है। छह महीने के लिए राशन पानी जमा करते है।

    रोचकता भरे इस गांव में पहुंचने के लिए है दो रास्ते

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    पहला रास्ता चंडीगढ़ से बाया मनाली व कुंजम काजा होकर है जो 512 किमी के लगभग है। जबकि दूसरा रास्ता चंडीगढ़ से बाया शिमला, किन्नौर व ताबो काजा होकर है जिसकी दूरी 635 किमी के लगभग है। रहने के लिए काजा में होम स्टे व होटल हैं।

    देश के प्रहरी की भी निभाते हैं भूमिका

    स्पीति के लोग देश के प्रहरी की भूमिका भी निभाते है। यह लोग आधुनिक सुविधाओं से दूर एकांत में जीवन यापन करते है। कुछ एक गांव तो चीन सीमा से मात्र 10 से 15 किमी दूर है। लाहुल के अधिकतर लोग आधुनिक सुविधाओं के चलते कुल्लू पलायन कर गए हैं जबकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले स्पीति के लोग आज भी अपनी मातृभूमि को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यह लोग असल में देश के प्रहरी हैं।