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Kangra News: टांडा मेडिकल कॉलेज ने की बड़ी उपलब्धि हासिल, बिना चीरा लगाए हृदय रोगी का बदला वाल्व

कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज (Tanda Medical college) के विशेषज्ञों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने पहली बार टीएवीआई सर्जरी की। इस सर्जरी को करके चिकित्सकों ने नूरपुर के 78 वर्षीय बुजुर्ग की जान बचा ली। बिना चीरा लगाए रोगी के हृदय का वाल्व बदल दिया। इसके बाद बुजुर्ग को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

By Jagran News Edited By: Deepak Saxena Published: Tue, 14 May 2024 04:31 PM (IST)Updated: Tue, 14 May 2024 04:31 PM (IST)
टांडा मेडिकल कॉलेज ने की बड़ी उपलब्धि हासिल (फाइल फोटो)।

तरसेम सैनी, टांडा (कांगड़ा)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा के विशेषज्ञों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हृदय रोग विभाग के विशेषज्ञों ने बिना चीरा लगाए रोगी का वाल्व बदल दिया यानी ट्रांसकैथेटर अयोर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन (टीएवीआई) सर्जरी की। इसी तरह की सर्जरी टांडा मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुई है। नूरपुर निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग को सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

टीएवीआई सर्जरी में रोगी को लगाया जाता छोटा कट

टीएवीआई सर्जरी में रोगी को बड़ा चीरा लगाने के बजाय छोटा कट लगाया जाता है। इससे रोगी के घाव जल्द भरते हैं। यह सर्जरी ज्यादा उम्र या अत्यधिक जोखिम वाले रोगियों की की जाती है। टांडा मेडिकल कॉलेज के हृदय रोगी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकुल भटनागर ने बताया कि नुरपुर के 78 वर्षीय बुजुर्ग हृदय रोग से पीड़ित थे। वह अयोर्टिक स्टीनोसिस वाल्व बीमारी से ग्रसित थे यानी हृदय की बायीं तरफ वाला वाल्व सिकुड़ गया था।

इससे बड़ी धमनी में रक्त प्रवाह सही ढंग से नहीं हो पा रहा था। इस कारण बुजुर्ग की जान को खतरा था। 11 मई को पीड़ित बुजुर्ग को गंभीर हालत में हृदय रोग विभाग में जांच के लिए लाया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबुधर शर्मा ने उनकी जांच की। सभी तरह के टेस्ट करने के बाद बुजुर्ग के अयोर्टिक स्टीनोसिस वाल्व से पीड़ित होने का पता चला।

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बुजुर्ग की टीएवीआई सर्जरी

ज्यादा उम्र के कारण ओपन हार्ट सर्जरी संभव नहीं थी। विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल भटनागर व डॉ. अंबुधर शर्मा ने अपनी टीम के साथ बुजुर्ग की टीएवीआई सर्जरी की। बिना चीरा लगाए रोगी का बायां वाल्व बदला गया। दो दिन तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। रोगी के स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

डॉ. मुकुल भटनागर ने बताया कि इस तरह की सर्जरी बहुत महंगी है। 2011 में टीएवीआई सर्जरी भारत में शुरू हुई थी। गैरसरकारी अस्पताल में 25 से 30 लाख रुपये खर्च आता है, जबकि सरकारी अस्पताल में भी 10 से 15 लाख रुपये खर्च आता है।

टीएवीआई सर्जरी के लिए विशेष अनुदान दे सरकार

वहीं, टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने बताया कि सरकार टीएवीआई सर्जरी के लिए विशेष अनुदान सुविधा मुहैया करवाए या हिम केयर योजना में इसे शामिल करे तो प्रदेश के गरीब लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। टीएवीआई सर्जरी टांडा मेडिकल कालेज के हृदय रोग विभाग की बड़ी उपलब्धि है। इससे उन हृदय रोगियों को राहत मिलेगी जो गैर सरकारी अस्पताल में इस तरह की सर्जरी का खर्च वहन नहीं कर पाते हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुल भटनागर, डा. अंबुधर शर्मा व उनकी टीम को बधाई। टांडा मेडिकल कालेज के विशेषज्ञ रोगियों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।

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