डल झील का रिसाव रोकने में फेल हुई एजेंसियां, लोगों की आस्था का केंद्र भी है यह झील
आस्था की केंद्र डल झील मैक्लोडगंज के वैभव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। झील में दोबारा रिसाव शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

धर्मशाला, राजेंद्र डोगरा। आस्था की केंद्र डल झील मैक्लोडगंज के वैभव पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। झील में दोबारा रिसाव शुरू हो गया है। हालांकि झील को संवारने व लीकेज रोकने के लिए कई एजेंसियां जुटी हैं और करोड़ों रुपये खर्च भी किए गए हैं लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है। हालांकि स्थानीय बाशिंदों ने डल के अस्तित्व को बचाने के लिए अपने स्तर पर कदम उठाए हैं, लेकिन ये कितने कारगर साबित होते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। इस साल राधाष्टमी स्नान को सफल बनाने के लिए पाइप के जरिये पानी झील में भरा गया था।
झील की धार्मिक मान्यता है और इसे छोटा मणिमहेश भी कहा जाता है। जो लोग मणिमहेश नहीं जा पाते हैं वे राधाष्टमी पर यहीं स्नान कर पुण्य फल अर्जित करते हैं। झील के प्रति अधिकारियों का रवैया भी नकारात्मक ही रहा है। वर्ष 2008 के दौरान झील से गाद निकालने के बाद रिसाव शुरू हुआ था। इसके बाद कई बार लीकेज रोकने के प्रयास हुए व एजेंसियों ने काम भी किया, लेकिन परिणाम अब भी ढाक के तीन पात ही रहा है।
झील केवल भ्रमण स्थल ही नहीं बल्कि इससे धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है। सरकार को चाहिए कि रिसाव को रोके, ताकि वर्षभर पानी रहे। राधाअष्टमी पर हजारों लोग यहां स्नान करते हैं। -करनैल सिंह, अध्यक्ष डल झील बचाओ संगठन।
झील धर्मशाला की शान है। इस धार्मिक स्थल को बचाने के लिए सरकार को कारगर कदम उठाने की जरूरत है। मौजूदा समय में दोबारा रिसाव शुरू हो गया और इसे रोकने के लिए तुरंत कार्य करने की आवश्यकता है। -प्रदीप गुरुंग, वार्डपंच भत्तला पंचायत।
जिस कार्य को प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए, उसे भी नहीं करवाया जा रहा है। झील के अस्तित्व को बचाने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। सरकार को भी अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। -ओंकार सिंह, टैक्सी चालक।
झील के रिसाव को रोकने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। यह समस्या काफी पुरानी है और इस संबंध में प्रशासन की ओर से हरसंभव कदम उठाया जाएगा। -एमआर भारद्वाज, एडीएम कांगड़ा।

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