हिमाचल में प्राचीन मंदिरों की दुर्दशा, अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा; आखिर क्या है वजह?
हिमाचाल प्रदेश के शक्तिपीठ मंदिरों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। ज्वालामुखी मंदिर के अधीन सभी छोटे मंदिर भी जर्जर हालत में है। टेढ़ा मंदिर की सीढ़ियां टूटी हुई हैं। मंदिरों के जीर्णोद्धार को लेकर योजना बनाई गई हैं। इन्हें जल्द ही मूर्त रूप दे दिया जाएगा। प्रशासन का मंदिरों के रखरखाव की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। यहां के भवनों की हालत भी बहुत खस्ता है।

जागरण संवाददाता, कांगड़ा। 40 करोड़ रुपये से ज्यादा की वार्षिक आय वाले शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर के ऐतिहासिक पुराने मंदिरों का अस्तित्व खतरे में है।
मंदिर न्यास का श्री ज्वालामुखी के अधीन छोटे मंदिरों की मरम्मत और उचित रखरखाव पर ध्यान नहीं है। इनकी मरम्मत करवाने में मंदिर न्यास ज्वालामुखी असमर्थ नजर आ रहा है।
ज्वालामुखी मंदिर के अधीन छोटे-छोटे मंदिरों में तारा देवी मंदिर, भैरव बाबा मंदिर, अष्टभुजी माता मंदिर, टेढा मंदिर और अन्य कई मंदिर आते हैं जिनकी मरम्मत और उचित रख-रखाव वर्षों से न हो पाने की वजह से ये सभी मंदिर अपने अस्तित्व को बिखरता हुआ देख रहे हैं।
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मंदिरों के साथ जुड़ी है ऐतिसाहिक गाथाएं
यह सभी मंदिर ऐतिहासिक मंदिर है और कई ऐतिहासिक गाथाएं इन मंदिरों के साथ जुड़ी हुई हैं। हर साल हजारों की संख्या में भक्त यहां पर माथा टेकने के लिए परिवार सहित आते हैं परंतु मूलभूत सुविधाएं न मिल पाने के कारण यहां यात्री बहुत परेशानी में नजर आते हैं।
ज्वालामुखी के प्रबुद्ध सदस्यों से मांग की है कि मंदिर के अधीन इन सभी ऐतिहासिक मंदिरों के अस्तित्व को बचाने के लिए इस प्राचीन धरोहर को खंडहर होने से बचाने के लिए प्रयास किए जाएं।
ज्वालामुखी मंदिर से टेढ़ा मंदिर पैदल मार्ग की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। पर यहां पर सीढि़यों पर चलना बहुत मुश्किल है। यहां पर जगह-जगह से सीढ़ियां बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। इसके अलावा यहां पर जो भवन है वह बहुत जर्जर अवस्था में हैं। वर्ष 1905 में आए भूकंप में यह मंदिर टेढ़ा हुआ था।
भैरव बाबा, तारा देवी व अष्टभुजी मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य अभी बचा हुआ है। मंदिर की चारद्वारी, फर्श और बिजली का कार्य अभी अधूरा है। तारा देवी मंदिर जाने वाली सीढ़ियों की हालत बहुत खराब है । यहां पर एक डंगा खिसक जाने की वजह से सीढ़ियां टेढ़ी हो गई हैं। अष्टभुजी माता मंदिर में भी यहां यात्रियों को परेशानी होती है यहां ऐतिहासिक तालाब की सफाई और इसकी मरम्मत आदि का कार्य करवाना जरूरी है। इन तीनों मंदिरों के खराब हालात के चलते श्रद्धालु तो परेशान होते ही हैं वहीं धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है।
ज्वालामुखी मंदिर के अधीन आने वाले इन सभी मंदिरों के रख-रखाव न होने के पीछे एक बड़ा कारण मंदिर प्रशासन की अनदेखी ही इनके जीर्णाेद्वार में एक बड़ी चुनौती है। भले ही मंदिर प्रशासन द्वारा इन मंदिरों के जीर्णाेद्वार को लेकर रुपरेखा तैयार की गई है। पर इन योजनाओं को र्मूत रुप देकर ही समस्या का समाधान हो सकता है।
क्या कहते हैं स्थानीय निवासी
स्थानीय निवासी सौरव शर्मा ने बताया कि ऐतिहासिक मंदिरों की दशा को सुधारा जाना समय की मांग है। सरकार व मंदिर प्रशासन इस ओर विशेष ध्यान दें ताकि यात्रियों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिले।
केहर सिंह ठाकुर ने बताया कि करोड़ों रुपये की आय होने के बावजूद मंदिर के अधीन इन छोटे मंदिरों की हालत बहुत खराब है। उनकी दशा सुधारी जानी चाहिए। यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं ऐसे में सुविधाओं का आभाव नहीं होना चाहिए।
अभिनव शर्मा बताते हैं कि छोटे-छोटे मंदिरों का जीर्णोद्धार होने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। नौजवानों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। सरकार इस और विशेष ध्यान दे। मंदिरों के हालात सुधारने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
क्या कहता है प्रशासन
ज्वालामुखी मंदिर के कनिष्ठ अभियंता सुरेश कुमार ने बताया कि मुंशी राम ठाकुर इन मंदिरों की मरम्मत और उचित रखरखाव के लिए यहां पर नए भवन बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किए गए हैं। प्रस्ताव स्वीकृति के लिए जिलाधीश कांगड़ा एवं मंदिर आयुक्त के पास भेजा गया है जैसे ही स्वीकृति मिलती है काम शुरू कर दिए जाएंगे।
ज्वालामुखी मंदिर के अधिकारी मनोहर लाल शर्मा ने बताया, सभी मंदिरों का स्वरूप बदलने व मंदिरों को जाने वाले रास्तों की मरम्मत के लिए और यात्रियों की सुविधाओं के लिए योजनाएं बनाई है। स्वीकृति मिलते ही इन सभी कार्यों को शुरू किया जाएगा।
क्षेत्र के विधायक संजय रतन का कहना है कि ज्वालामुखी मंदिर की बजट बैठक में इन सभी मंदिरों की कायाकल्प करने का निर्णय लिया गया है। बजट का प्रविधान भी कर दिया गया है। आने वाले समय में इन मंदिरों की दशा और दिशा देखने वाली होगी। यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
पूर्व विधायक रमेश धवाला का कहना है कि भाजपा के शासन में इन मंदिरों के रास्तों की मरम्मत करवाई गई थी । तारा देवी मंदिर तक कनोपी का निर्माण करवाया गया था लेकिन उसके उपरांत कोई भी कार्य नहीं हुआ है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
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