हिमाचल विधानसभा: अंदर कोरम अधूरा और बाहर शोर पूरा, तीन दिन की कार्यवाही में दिखा टकराव; किसका पलड़ा रहा भारी?
धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जनता के मुद्दों पर चर्चा कम और टकराव ज्यादा दिखा। कोरम पूरा न होने से कार्यवाही स्थगित हुई। विपक्ष पंचायत चुनाव पर बहस चाहता था, पर सरकार ने जवाब दिया। सदन में पक्ष-विपक्ष में टकराव हुआ, जिसे अध्यक्ष ने शांत किया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को गुटबाजी पर घेरा और पंचायत चुनाव में देरी के मुद्दे पर पलटवार किया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का धर्मशाला तपोवन स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
प्रकाश भारद्वाज, धर्मशाला। तवोवन में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले तीन दिन जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कम और टकराव अधिक दिखा। स्थिति यह रही कि आम आदमी की समस्याओं का समाधान करने के लिए कोरम पूरा न होने से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
पहले दो दिन पंचायत चुनाव को लेकर विपक्ष चर्चा चाहता था, जिसे सरकार ने न केवल स्वीकार किया बल्कि प्रत्येक बिंदु पर जवाब भी दिया। तीसरे दिन भाजपा की ओर से पहले से निर्धारित रणनीति के कारण प्रश्नकाल विपक्ष की सक्रिय मौजूदगी के बिना औपचारिकता बनकर रह गया।
सदन का संचालन पक्ष व विपक्ष दोनों के आपसी सहयोग व सहमति से होता है। सरकार ने पंचायत चुनाव पर चर्चा की बात मानी, ऐसे में चाहिए था कि भाजपा भी सरकार की बात को मानती।
विधानसभा के अंदर और बाहर टकराव
विधानसभा में पक्ष व विपक्ष में टकराव को देखते हुए अध्यक्ष को आना पड़ा और सख्ती से दोनों पक्षों को शांत करना पड़ा। शुक्रवार को तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायक बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यद्वार के समीप खड़े थे। उसी समय भीतर से सत्ता पक्ष के विधायक केंद्र सरकार द्वारा की जा रही उपेक्षा को लेकर विरोध करने के लिए पहुंच गए। शुक्र है कि दोनों पक्षों के बीच में किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान किसी तरह का कोई संकट पैदा नहीं हुआ।
दोपहर के बाद सदन में स्थिति यह थी कि एक के बाद एक सीट खाली होती नजर आई। इसके चलते विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को कार्य सूची में निर्धारित कामकाज को अगले गैरसरकारी कार्य दिवस के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष पर हावी सरकार, सीएम ने संभाला मोर्चा
विधानसभा शीतसत्र में मुद्दों की गर्माहट देखी गई। नियम-67 के तहत चर्चा में विपक्ष के विधायकों ने सरकार पर तीखे हमले किए, लेकिन सत्ता पक्ष ने सभी आरोपों का क्रमबद्ध तथ्यों के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष को उनकी गुटबाजी पर घेरा। विपक्ष ने पंचायत चुनाव में देरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, लेकिन यह रणनीति उलटी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने शिमला नगर निगम के चुनाव में नौ माह की देरी पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें ही घेर लिया। सरकार सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष पर हावी रही। विधानसभा में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की टिप्पणी के बाद विपक्ष के तीखे तेवरों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं स्थिति को संभाला, जिसके बाद सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।

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