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    यमुनानगर नगर निगम चुनाव: दांव पर लगी मंत्री, पूर्व मंत्री और 3 विधायकों की प्रतिष्ठा; कौन मारेगा बाजी?

    Updated: Fri, 21 Feb 2025 04:01 PM (IST)

    यमुनानगर नगर निगम चुनाव (Yamunanagar Municipal Corporation Elections) में भाजपा कांग्रेस और साझा उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर है। इस बार मेयर पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पूर्व मंत्री कंवरपाल विधायक घनश्याम दास अरोड़ा पूर्व मेयर मदन चौहान की साख दांव पर है। चुनावी मुद्दों में स्वच्छ शासन भ्रष्टाचार और शहर का विकास प्रमुख हैं।

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    यमुनानगर में रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी और महिला नेत्री के बीच कड़ा मुकाबला। फाइल फोटो

    संजय कांबोज, यमुनानगर। Yamunanagar Municipal Corporation Elections: चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ट्विन सिटी में मेयर के लिए चार प्रत्याशी मैदान है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, पूर्व मंत्री कंवरपाल, विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, पूर्व मेयर मदन चौहान की साख दांव पर हैं।

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    भाजपा और कांग्रेस के बीच लड़ाई

    भाजपा से पूर्व जिला शिक्ष अधिकारी सुमन बहमनी कांग्रेस से पूर्व विधायक राजपाल भूखड़ी की पत्नी किरण देवी इनेलो बसपा व आप की साझी प्रत्याशी एडवोकेट मधु चौधरी व आजाद उम्मीदवार सुमन लता चुनावी रण में हैं।

    हालांकि, लड़ाई भाजपा व कांग्रेस के बीच बताई जा रही है, लेकिन टक्कर देने की स्थिति में साझी उम्मीदवार मधु चौधरी भी रह सकती हैं। तीनों राजनीतिक दल एकजुटता से अपने साझे प्रत्याशी को मैदान में उतरा है। इस बार मेयर पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है।

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    निगम का तीसरा चुनाव

    नया का पहला चुनाव 1887 में हुआ। पहले चेयरमैन बलिंद्र सिंह नरवाल बने। भाजपा के रोशन लाल दुग्गल को हराया था। 1991 में सुभाष शर्मा बने। 1996 में नगर परिषद बनी। नरेश शर्मा पहले चेयरमैन बने। 1987 में बलिंद्र सिंह चेयरमैन बने थे। मार्च 2010 में नगर निगम बना। पहले चुनाव में कांग्रेस से मेयर बाला व दूसरे चुनाव में भाजपा से मदन चौहान मेयर बने। उस समय 20 वार्ड थे अब बढ़कर 22 हो गए। इस बार निगम का तीसरा चुनाव है।

    चार विधानसभा क्षेत्रों में बंटा नगर निगम एरिया

    नगर निगम में कुल 22 वार्ड के लिए 348 बूथ बनाए गए है। इसमें चारों विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यमुनानगर व जगाधरी विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ रादौर व साढौरा क्षेत्र का भी एक बूथ शामिल है। कृषि मंत्री, पूर्व कृषि मंत्री, विधायक और पूर्व मेयर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में पूरी ताकत झोक रहे हैं।

    वहीं, जगाधरी से कांग्रेस के विधायक अकरम खान, साढौरा विधायक रेणू बाला, पूर्व चेयरमैन रमन त्यागी, पूर्व जिप चेयरमैन श्याम सुंदर बत्रा व पूर्व मेयर सरोज बाला भी ताकत लगा रहे है।

    गठबंधन से पूर्व विधायक दिलबाग, बसपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नरेश सारन और आप के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व डीजीपी केपी सिंह के छोटे भाई आदर्श पाल की प्रतिष्ठा भी चुनाव में दांव पर लगी है। वार्ड नौ से भाजपा प्रत्याशी भावना बिट्ट् को निर्विरोध चुन लिया गया। इससे भाजपा प्रत्याशी उत्साहित है। अब 21 वार्ड के लिए 86 पार्षद प्रत्याशी मैदान में डटे हैं। प्रत्याशी पूरा जोर लगाए हुए है, प्रचार भी तेज कर दिया है।

    जातिगत समीकरण करेंगे प्रभावित

    तीन लाख 55 हजार वोटर है। करीब 80 हजार वोट अनुसूचित जाति के हैं। दूसरे नंबर पर ओबीसी ए व बी वर्ग के मतदाता है। बाकी सामान्य श्रेणी के है। पॉश एरिया में भाजपा की पकड़ है, देहात में कांग्रेस मजबूत लग रही है।

    स्वच्छ शासन, भ्रष्टाचार व शहर का विकास बड़ा मुद्दा

    स्वच्छ शासन व शहर का समुचित विकास इस बार बड़ा मुद्दा है। सत्ता पक्ष विकास की गति तीन गुणा अधिक किए जाने का दावा कर रहा है। जबकि विपक्ष की ओर से नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है।

    कांग्रेस प्रत्याशी किरण देवी व साझी प्रत्याशी एडवोकेट मधु चौधरी सफाई व प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा चुकी हैं। सुमन बहमनी सत्तासीन पार्टी से प्रत्याशी हैं। पार्टी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रही है। किरण देवी पूर्व विधायक की पत्नी है। ग्रामीण एरिया में पार्टी का बड़ा वोट बैंक है।

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