Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    जरा संभलकर चलिये.. सीवर लीकेज से धंस रही सड़कें, अधिकारी नहीं ले रहे संज्ञान; हरियाणा के यमुनानगर में हाल बेहाल

    Updated: Sun, 18 May 2025 05:45 PM (IST)

    यमुनानगर में सीवर लाइन के रिसाव के कारण सड़कें धंस रही हैं जिससे खतरा बढ़ गया है। गोविंदपुरा रोड और डीएवी डेंटल कॉलेज रोड बुरी तरह प्रभावित हैं। पुरानी सीवर लाइनों और नियमित सफाई न होने के कारण यह समस्या बढ़ रही है। नगर निगम ने जन स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है लेकिन स्थिति जस की तस है। लोगों को जरा संभलकर चलने की आवश्यकता है।

    Hero Image
    यमुनानगर में सीवर लीकेज से सड़कों का बुरा हाल

    जागरण संवाददाता, यमुनानगर। अरे भाई जरा संभलकर चलिये... ये बात कहना शहर की सड़कों पर बिल्कुल सटीक बैठ रही हैं। सीवरेज लाइनों के लीकेज होने पर न केवल सड़कों पर गंदा पानी बह रहा, बल्कि सड़क भी धंस रही है। कुछ ही समय पहले बना गोविंदपुरा रोड कई जगह से धंस चुका है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    इसके अलावा डीएवी डेंटल कालेज रोड भी दो जगह से धंस चुका है। बारिश होने पर धंसी सड़क बड़े गड्ढे का रूप ले लेती है। जिसके कारण बड़ा हादसा होने का भय बना रहता हैं। जगाधरी शहर में भी कई जगह इस तरह की समस्या सामने आ चुकी है।

    हाउस की बैठक में उठा मुद्दा

    पूर्व में हाउस की हर बैठक में सीवर लाइनों के लीक व ओवरफ्लो होने का मुद्दा उठा लेकिन आज तक इस समस्या को ठोस समाधान नहीं हो पाया। शिकायत मिलने पर आनन फानन में लाइनों की सफाई करवा दी जाती है। कुछ समय बाद ओवर फ्लो होकर गंदा पानी बहने लगता है।

    रिसाव व ओवरफ्लो बनता कारण दरअसल, शहर में सीवरेज लाइनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। आज तक इनकी लाइनिंग भी नहीं हो पाई है। ताकि सीवर लाइन को मजबूती मिल सके।

    दूसरा, नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती। जिसके कारण पानी का रिसाव जमीन के अंदर भी रहता है और ओवरफ्लो होकर मैनहोल से भी पानी बता है। पानी के बहाव के कारण तारकोल से बनी सड़कों के टूटने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। यदि नियमित रूप से रिपेयर व सफाई होती रहे तो यह समस्या नहीं आती।

    नगर निगम लिख चुका पत्र

    सीवर लाइनों के कारण सड़कों के धंसने पर चिंता जाहिर करते हुए नगर निगम की ओर से जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग को पत्र भी लिखा जा चुका है। बावजूद इसके इस पर संज्ञान नहीं लिया गया। मधु चौक से लेकर भाई कन्हैया साहिब चौक तक तीन-चार जगह सीवर के मैनहोल ओवरफ्लो रहते हैं।

    सुबह के समय पानी का बहाव अधिक होता है। यह सड़क कई जगह से टूट चुकी है। बार-बार इसकी रिपेयर करनी पड़ रही है। कन्हैया साहिब चौक के पास भी सड़क धंस चुकी है। कुछ समय पहले वर्षा होने पर प्यारा चौक पर भी सड़क घंस चुकी है।

    कई दिन बाद इसकी रिपेयर नगर निगम द्वारा की गई थी। सड़क से ऊपर उठ रहे मैनहोल शहर में सड़कों के बीचोबीच सीवर लाइनें दबी हैं। इनके मैनहोल भी सड़कों से ऊपर उठ रहे हैं। जिसके कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है।

    दूसरा, यदि मैनहोल सड़क से ऊपर उठा है तो वह जल्दी टूट जाता है। विश्वकर्मा चौक से लेकर जोड़ियों तक ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। यहां कई जगह सीवर लाइन के मैनहोल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वर्षा होने पर जब पानी का बहाव बढ़ जाता है तो ये ओवरफ्लो हो जाते हैं। कन्हैया साहिब चौक के पास भी एक मैनहोल सड़क से ऊपर उठा हुआ है।

    लाइनों में जम चुकी है गाद

    वार्ड नंबर आठ से पार्षद विभौर पहुजा का कहना है कि शहर में सीवर लाइनें काफी पुरानी हैं। नियमित रूप से सफाई न होने के कारण इसके अंदर गाद जम चुकी है। जिसे कारण ओवरफ्लो की समस्या रहती है। हमने यह मुद्दा हाउस की बैठक में भी उठाया था।

    अधिकारियों से भी इस बारे बात हुई है। पुरानी लाइनों को बदलने की प्लानिंग भी चल रही है। दूसरा, लाइनों की नियमित रूप से सफाई करवाने के लिए भी अधिकारियों को बोला हुआ है। ताकि मानसून सीजन में ओवरफ्लो की समस्या न रहे।

    शिकायत पर नहीं लिया जाता संज्ञान

    वार्ड नंबर 20 से पूर्व पार्षद नीरज राणा का कहना है कि उनके वार्ड में सीवरेज ओवरफ्लो होने की समस्या है। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत भी की जा चुकी है। कई-कई माह तक शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया जाता। वर्षा होने पर समस्या और भी बढ़ जाती है। शहर के सीवरेज सिस्टम में सुधार की जरूरत है। दूसरा, कई जगह ढक्कन भी टूटे हुए हैं। इनसे हादसा होने का भय बना रहता है। वर्जन

    सीवर लाइनों की सफाई का कार्य चल रहा है। सफाई के लिए विभाग को नई मशीनें भी मिल चुकी हैं। जिस-जिस एरिया में दिक्कत है, वहां सफाई करवा दी जाएगी। हमारा प्रयास है कि भविष्य में यह समस्या न रहे।

    दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग।

    ये भी पढ़ें- मंजूरी के 6 साल बाद भी पंजाब और हरियाणा में कोर्ट मैनेजर के पद खाली, क्यों अटकी पड़ी हैं भर्तियां?