मंजूरी के 6 साल बाद भी पंजाब और हरियाणा में कोर्ट मैनेजर के पद खाली, क्यों अटकी पड़ी हैं भर्तियां?
पंजाब और हरियाणा की जिला अदालतों में कोर्ट मैनेजर ग्रेड-II के 48 पदों पर भर्ती प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद ठंडे बस्ते में है। जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु के आदेश के बाद भी जिसमें पदों को भरने की बात कही गई थी भर्ती शुरू नहीं हो पाई है। स्वीकृत पदों के लिए 2019 से कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा की जिला अदालतों के लिए कोर्ट मैनेजर ग्रेड-II के 48 पदों को मंजूरी दिए जाने के लगभग छह साल बाद भी भर्ती प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अब देशभर के हाई कोर्ट को कोर्ट मैनेजरों के नियमितीकरण और नियुक्ति के लिए नियम बनाने या संशोधित करने का निर्देश दिया है।
यह घटनाक्रम जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु द्वारा दिए गए उस आदेश के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसमें पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर कोर्ट मैनेजर ग्रेड- II के 48 पदों की भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया ड्राफ्ट सेवा नियमों के आधार पर बिना किसी समय हानि के शुरू की जाती है, तो इसमें कोई नुकसान नहीं होगा।
2019 में ही स्वीकृत किया गया था पद
जस्टिस सिंधु ने कहा था कि इन पदों को सितंबर 2019 में ही स्वीकृत कर दिया गया था, लेकिन उन्हें भरने के लिए अभी तक कोई 'सार्थक अभ्यास' नहीं किया गया है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि मौजूदा परिस्थितियों में इसमें कोई संदेह नहीं है कि न्यायालय प्रबंधक न्याय प्रशासन के लिए बहुमूल्य सहायता प्रदान कर सकते हैं।
यह निर्देश तब आया जब एकल जज को बताया गया कि पूर्ण न्यायालय की मंजूरी के बाद तैयार सेवा नियमों का मसौदा अप्रैल 2019 में पंजाब और हरियाणा सरकार को भेज दिया गया था।
आगे बढ़ने की बजाय रुक गई प्रक्रिया
बार-बार याद दिलाने के बावजूद दोनों राज्यों द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था। यह प्रक्रिया आगे बढ़ने की बजाय रुक गई, जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने जस्टिस सिंधु के आदेश के खिलाफ खुद ही एक खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की।
7 अगस्त, 2024 को जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले पर रोक लगा दी, क्योंकि जाहिर तौर पर एकल पीठ से उनकी राय अलग थी, हालांकि इस बीच सरकारों के लिए मसौदा नियमों को मंजूरी देने पर विचार करने का रास्ता खुला रखा गया।
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